बांग्लादेश: जेल में बंद हिंदू सिंगर की इलाज ना मिलने से मौत, परिवार ने यूनुस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

Bangladesh Hindu: हिंदू सिंगर और अवामी लीग के जिला स्तर के सांस्कृतिक सचिव प्रोलॉय चाकी का रविवार को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वे पाबना सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में थे और आरोप है कि कस्टडी के दौरान उन्हें समय पर मेडिकल सहायता नहीं दी गई

अपडेटेड Jan 12, 2026 पर 5:02 PM
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Bangladesh: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हमले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हमले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। वहीं हिंसा की बढ़ती घटनाओं के बीच एक और गंभीर मामला सामने आया है। एक हिंदू गायक और सांस्कृतिक कार्यकर्ता की न्यायिक हिरासत में मौत हो गई है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।

जेल में इलाज ना मिलने से मौत

रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंदू सिंगर और अवामी लीग के जिला स्तर के सांस्कृतिक सचिव प्रोलॉय चाकी का रविवार को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वे पाबना सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में थे और आरोप है कि कस्टडी के दौरान उन्हें समय पर मेडिकल सहायता नहीं दी गई। इस घटना ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और जेलों में कैदियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


प्रोलॉय चाकी पहले से कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। उन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और आंखों से जुड़ी गंभीर समस्याएं थीं। 9 जनवरी को उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें तुरंत पाबना जनरल हॉस्पिटल ले जाया गया।

परिवार ने यूनुस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

हालत बिगड़ने पर बेहतर इलाज के लिए उन्हें राजशाही मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल रेफर किया गया। वहाँ इलाज के दौरान 11 जनवरी की रात करीब 9 बजे उनकी मौत हो गई। इस घटना ने उनकी सेहत और इलाज को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिवार ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इलाज में देरी और जरूरी मेडिकल सुविधाओं की कमी की वजह से चाकी की जान गई। परिवार का दावा है कि अगर समय पर सही इलाज मिला होता, तो उनकी मौत रोकी जा सकती थी।

मातृभूमि की रिपोर्ट के अनुसार, मृतक के परिवार ने जेल प्रशासन पर मेडिकल लापरवाही का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने और पर्याप्त सुविधाओं की कमी के कारण प्रोलॉय चाकी की मौत हुई। रिपोर्ट में उनके बेटे सानी चाकी के हवाले से बताया गया है कि पाबना जनरल हॉस्पिटल में सही इलाज नहीं मिला और उन्हें दूसरे अस्पताल भेजने में भी देरी हुई, जिससे उनके पिता की हालत और बिगड़ गई। वहीं, पाबना जिला जेल के सुपरिटेंडेंट मोहम्मद उमर फारुक ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि चाकी की तबीयत बिगड़ते ही उन्हें तुरंत मेडिकल मदद दी गई थी और उनकी पहले से चली आ रही बीमारियों को भी ध्यान में रखा गया था।

प्रोलॉय चाकी इसलिए किया गया था गिरफ्तार

प्रोलॉय चाकी को 16 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। बताया गया है कि यह गिरफ्तारी अवामी लीग से उनके कथित संबंधों के कारण हुई, जिस पर फिलहाल बांग्लादेश में प्रतिबंध है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि चाकी की मौत देश की जेलों में हिरासत के दौरान हो रही मौतों की एक बड़ी और चिंताजनक तस्वीर दिखाती है। ऐन ओ सलीश केंद्र के अनुसार, साल 2025 में बांग्लादेश की जेलों में कुल 107 लोगों की मौत हुई। इनमें 69 विचाराधीन कैदी और 38 सजा काट रहे कैदी शामिल थे। यह आंकड़ा 2024 में हुई 65 जेल मौतों की तुलना में काफी ज्यादा है, जिससे जेलों में कैदियों की सुरक्षा और इलाज पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

यह मामला बांग्लादेश के सुनामगंज ज़िला में हुई एक और घटना के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है। वहाँ जॉय महापात्रो नाम के एक हिंदू व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। परिवार का आरोप है कि एक स्थानीय व्यक्ति ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। गंभीर हालत में उन्हें इलाज के लिए सिलहट MAG उस्मानी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ बाद में उनकी मौत हो गई।

इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।

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