आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर चल रही ग्लोबल रेस के बीच चीन ने टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक नया और हैरान कर देने वाला कदम उठाया है। पूर्वी चीन में हांग्झोउ रोबोट स्कूल नाम से एक अनूठा संस्थान खोला गया है। इस स्कूल की सबसे खास बात यह है कि यहां इंसान नहीं बल्कि इंसानों जैसा दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट ए़डमिशन लेते हैं और अलग-अलग कामों के लिए इनको ट्रेनिंग दी जाती है। AFP की एक खास रिपोर्ट के मुताबिक चीन रोबोट्स को भविष्य के वर्कफोर्स के हिसाब से तैयार कर रहा है, ताकि एडवांस रोबोटिक्स और एआई का कॉमर्शियल इस्तेमाल आसानी से किया जा सके।
इस स्कूल में एक छोटी ह्यूमनॉइड टूर गाइड वूजी है। ये यहां आने वाले मेहमानों और स्कूली बच्चों का स्वागत एक इंटर्न की तरह करती है। यह यूनिट्री कंपनी का कस्टमाइज्ड मॉडल है। वूजी खुद अपनी आवाज में बताती है कि वह अभी ट्रेनिंग पीरियड में है और ये स्कूल रोबोट्स को अलग-अलग किस्म की नौकरियों के लिए खास कोर्स की ट्रेनिंग देता है और इसके बाद उन्हें सर्टिफिकेट भी मिलता है।
स्टूडेंट बनकर रोबोट सीख रहे काम, परीक्षा पास करने पर मिलेगा ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट
लोकल गवर्नमेंट की मदद से झेजियांग यूनिवर्सिटी इस हांग्झोउ रोबोट स्कूल को चला रही है। इसका मुख्य उद्देश्य रोबोटिक्स कंपनियों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को दूर करना है ताकि मशीनों को प्रयोगशालाओं से निकालकर असल दुनिया में काम पर लगाया जा सके।
इस स्कूल में कंपनियां अपने रोबोट्स का इनरॉलमेंट कराती हैं। यहां रोबोट्स के हार्डवेयर और उनकी कैपिसिटी को जांचा जाता है। इन रोबोट्स को उनके फ्यूचर जॉब रोल के हिसाब से खास ट्रेनिंग दी जाती है। झेजियांग यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट के उप निदेशक झाओ हान बताते हैं कि ट्रेनिंग पूरी होने और मूल्यांकन में सफल होने के बाद स्कूल रोबोट्स की क्षमता को के लिए सर्टिफिकेट जारी करेगा। ये बिल्कुल वैसा ही होगा जैसा किसी इंसान को ग्रैजुएशन करने के बाद सर्टिफिकेट मिलता है।
इंसानी दिमाग की तरह सोचना अभी भी बड़ी चुनौती
यूनिट्री जैसी चीन की दिग्गज कंपनियों के ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने अपने मार्शल आर्ट डांस और किकबॉक्सिंग परफॉर्मेंस से दुनिया को हैरान कर रखा है। इसके बावजूद कंपनियों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि असल दुनिया की अनिश्चितताओं को समझकर खुद फैसला लेने वाला रोबोट तैयार करना अभी बहुत कठिन टारगेट है।
रोबोट स्कूल के इंजीनियर झू तियानले ने बताया कि रोबोट के दिमाग को प्रशिक्षित करना बेहद कठिन काम है। तकनीकी महारत हासिल करने के बावजूद रोबोट्स को दुनिया की जटिलताओं को समझाना आज भी एक वैश्विक चुनौती बना हुआ है। टेक रिसर्च ग्रुप ओम्डिया के लियान जिये सु का कहना है कि सिर्फ रोबोट में एआई डाल देना ही काफी नहीं है। उदाहरण के लिए चैटजीपीटी से बात करना अलग बात है लेकिन बुजुर्गों की देखभाल करने या घर के काम करने वाला रोबोट बनाने की हकीकत अभी बहुत दूर है।
कपड़े मोड़ना और ब्लॉक हटाना... डेटा जुटाने के लिए इंसानों की ली जा रही मदद
रोबोट्स को बड़े पैमाने पर काम पर लगाने के लिए भारी मात्रा में डेटा की जरूरत होती है। रोबोट ट्रेनिंग सेंटर में इंसानी ट्रेनर प्लेस्टेशन कंट्रोलर जैसे डिवाइस की मदद से बार-बार एक ही काम करते हैं जैसे कपड़े मोड़ना, ब्लॉक हटाना या केन से स्प्रे करना। रोबोट पार्टनर इंसानों की इन हरकतों की नकल करते हैं। एक रोबोट को पूरी तरह से इस्तेमाल करने लायक मॉडल बनाने के लिए दसियों हजार घंटे के डेटा की जरूरत होती है। अभी चीन के रोजाना के कामों में रोबोट का इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। यहां ट्रैफिक कंट्रोल करना, घरों की सफाई करना और फैक्ट्री के फर्श पर काम करने जैसे ट्रायल जॉब्स रोबोट्स के जिम्मे सौंपे जा रहे हैं।
क्या है चीन की असली मंशा? अमेरिका के साथ छिड़ी नई टेक वॉर
चीन की शी जिनपिंग सरकार ने पिछले दो पंचवर्षीय योजनाओं में रोबोटिक्स क्षेत्र के विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी है। चीन की मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन अब ईवी इंडस्ट्री की तरह मजबूत हो चुकी है। मॉर्निंगस्टार के इक्विटी एनालिस्ट कांगयुक्सियाओ ली के मुताबिक अब उद्योग का अगला चरण यह साबित करना है कि रोबोट आर्थिक रूप से उपयोगी काम कर सकते हैं या नहीं।
काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक ग्लोबल ह्यूमनॉइड बाजार में 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी चीन का दावा है। चीन की इस रणनीतिक बढ़त और आक्रामक तैयारी ने अमेरिका जैसे प्रतिद्वंद्वियों को सतर्क कर दिया है। सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए अमेरिका ने विदेशी ह्यूमनॉइड्स और चार पैरों वाले रोबोट्स के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे टेक-वॉर में एक नया मोर्चा खुल गया है। हालांकि चीन की इंडस्ट्री से से जुड़े एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनियों का ध्यान विदेशी बाजारों के बजाय घरेलू स्तर पर तकनीक को बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप से सफल बनाने पर केंद्रित है।