पाकिस्तान को चीन ने ही दे दिया धोखा! गिड़गिड़ाते शहबाज की इस डील को बीजिंग ने किया खारिज; लीक दस्तावेजों से बड़ा खुलासा

Pakistan-China: लीक हुए दस्तावेजों से एक और बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पाकिस्तान इस तकनीक को पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार था। उसने चीन के सामने शर्त रखी थी कि वह बलूचिस्तान के गहरे पानी वाले ग्वादर पोर्ट को स्थायी रूप से चीनी नौसेना का सैन्य अड्डा बनाने की इजाजत दे देगा

अपडेटेड May 19, 2026 पर 12:42 PM
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यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ चीन के दौरे से खाली हाथ लौटे हैं

Pakistan-China Deal: सदाबहार दोस्त होने का दम भरने वाले चीन और पाकिस्तान के रिश्तों में एक बहुत बड़ी दरार सामने आई है। एक सनसनीखेज मीडिया रिपोर्ट और लीक हुए खुफिया दस्तावेजों ने अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमेसी में हड़कंप मचा दिया है।

'ड्रॉप साइट न्यूज' द्वारा रीव्यू किए गए सीक्रेट दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ समुद्र से परमाणु हमला करने की ताकत यानी 'सी-बेस्ड न्यूक्लियर सेकंड-स्ट्राइक कैपेबिलिटी' मांगी थी, जिसे चीन ने 'गैर-वाजिब' बताते हुए ठुकरा दिया है।

यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ चीन के दौरे से खाली हाथ लौटे हैं और चीन के बीजिंग बिजली उत्पादकों के भारी-भरकम बकाये कर्ज को लेकर दोनों देशों के बीच पहले से ही भारी खींचतान चल रही है।


क्या है 'सेकंड-स्ट्राइक कैपेबिलिटी' जो चीन से भीख में मांग रहा था पाकिस्तान?

आसान भाषा में समझें तो 'सी-बेस्ड सेकंड-स्ट्राइक कैपेबिलिटी' का मतलब होता है समुद्र के भीतर से परमाणु मिसाइल दागने की क्षमता।

अगर कोई दुश्मन देश पाकिस्तान पर पहला परमाणु हमला करके जमीन और हवा में मौजूद उसके सारे न्यूक्लियर ठिकाने तबाह भी कर दे, तो भी समुद्र की गहराइयों में छिपी परमाणु पनडुब्बियां सुरक्षित बची रहेंगी और वहां से दुश्मन पर जवाबी परमाणु हमला किया जा सकेगा।

ये ताकत भारत के पास है या नहीं?

यह घातक ताकत फिलहाल दुनिया के गिने-चुने देशों- अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और भारत के पास ही है। पाकिस्तान अपने परमाणु त्रिशूल को पूरा करने और भारत के मुकाबले खुद को मजबूत करने के लिए यह तकनीक चीन से मांग रहा था।

चीन ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव?

लीक फाइलों के मुताबिक, चीन ने पाकिस्तान की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। चीनी अधिकारियों ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी संवेदनशील तकनीक देना 'परमाणु अप्रसार' के नियमों का खुला उल्लंघन होगा।

बीजिंग को डर है कि अगर उसने पाकिस्तान को समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता दी, तो दक्षिण एशिया में परमाणु हथियारों की होड़ मच जाएगी। इससे चीन सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में घिर जाएगा और अमेरिका सहित पश्चिमी देशों के कड़े कूटनीतिक और आर्थिक प्रतिबंधों की मार उस पर पड़ सकती है।

ग्वादर पोर्ट को चीनी मिलिट्री बेस बनाने का दिया था लालच

दस्तावेजों से एक और बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पाकिस्तान इस तकनीक को पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार था। उसने चीन के सामने शर्त रखी थी कि वह बलूचिस्तान के गहरे पानी वाले ग्वादर पोर्ट को स्थायी रूप से चीनी नौसेना का सैन्य अड्डा बनाने की इजाजत दे देगा। लेकिन इसके बदले में कंगाल पाकिस्तान ने चीन से कई सुरक्षा गारंटियां मांगी थीं:

अमेरिका से सुरक्षा: पाकिस्तान चाहता था कि अगर ग्वादर को चीनी मिलिट्री बेस बनाने पर अमेरिका भड़कता है और प्रतिबंध लगाता है, तो चीन उसे राजनीतिक और आर्थिक सुरक्षा दे।

भारतीय सेना के बराबर ताकत: पाकिस्तान ने मांग की थी कि चीन उसकी सेना का इस कदर आधुनिकीकरण करे जिससे वह रणनीतिक रूप से भारतीय सेना के बराबर खड़ा हो सके। चीन ने पाकिस्तान की इन सभी शर्तों को मानने से इंकार कर दिया।

CPEC और चीनी नागरिकों की मौतों से भड़का हुआ है बीजिंग

दोनों देशों के बीच बढ़ती इस खटास की एक बड़ी वजह सुरक्षा भी है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की शुरुआत से लेकर अब तक पाकिस्तान में आतंकी हमलों में 21 चीनी नागरिकों की जान जा चुकी है।

हाल ही में इस्लामाबाद में चीनी राजदूत जियांग जैदोंग ने एक सेमिनार में खुलेआम रूप से पाकिस्तान सरकार की आलोचना की थी और कहा था कि पाकिस्तान चीनी नागरिकों को सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम रहा है। इस सुरक्षा चूक और पैसों के विवाद के कारण CPEC के कई बड़े प्रोजेक्ट्स या तो ठप पड़ गए हैं या बेहद सुस्त रफ्तार से चल रहे हैं।

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