US-Iran: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव की चिंगारी भड़क उठी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को तेहरान में एक फोरम के दौरान स्पष्ट कर दिया कि उनका देश यूरेनियम एनरिचमेंट से कभी पीछे नहीं हटेगा। अराघची का यह कड़ा रुख उस समय आया है जब अरब सागर में अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन की तैनाती की जा चुकी है। अमेरिकी सैन्य घेराबंदी को नजरअंदाज करते हुए अराघची ने कहा, 'उनकी सैन्य तैनाती हमें डरा नहीं सकती, चाहे हम पर युद्ध ही क्यों न थोप दिया जाए, हम अपनी शर्तों पर अडिग रहेंगे।'
ओमान में जारी है वार्ता पर वाशिंगटन पर अविश्वास
दिलचस्प बात यह है कि यह बयानबाजी ऐसे समय हो रही है जब पिछले शुक्रवार को ही ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का सिलसिला दोबारा शुरू हुआ है। जून 2025 में इजरायल और ईरान के बीच हुए 12 दिवसीय युद्ध के बाद यह पहली आधिकारिक मुलाकात है। हालांकि, अराघची ने साफ कहा कि तेहरान को वाशिंगटन पर बहुत कम भरोसा है। ईरान चाहता है कि उसके ऊपर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं, जिसके बदले में वह परमाणु कार्यक्रम पर 'भरोसा कायम करने वाले' कुछ कदम उठाने को तैयार है। इस पूरी कवायद में ईरान अपने रणनीतिक साझेदारों चीन और रूस से लगातार सलाह-मशविरा कर रहा है।
'परमाणु बम नहीं, इंकार करने की शक्ति हमारी ताकत'
पश्चिमी देशों और इजरायल के इन आरोपों पर कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है, अराघची ने एक तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम बम नहीं बना रहे हैं। महाशक्तियों को 'ना' कहने की ताकत ही हमारा असली परमाणु बम है।' दूसरी ओर इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने ईरान के इस कार्यक्रम को वैश्विक शांति के लिए 'साफ खतरा' बताया है। तनाव के बीच, अमेरिकी वार्ताकारों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने शनिवार को USS अब्राहम लिंकन का दौरा कर ट्रंप की 'शक्ति के माध्यम से शांति' की नीति का संदेश बुलंद किया।
प्रतिबंधों के बीच भविष्य को लेकर अनिश्चितता बरकरार
एक तरफ मेज पर बातचीत हो रही है, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात से जुड़ी शिपिंग संस्थाओं पर नए प्रतिबंध भी थोप दिए है। अराघची ने चेतावनी दी कि एक तरफ सैन्य दबाव और दूसरी तरफ प्रतिबंधों का जारी रहना, कूटनीति पर सवाल खड़े करता है। घरेलू मोर्चे पर भी ईरान मुश्किलों से घिरा है। पिछले दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत की खबरें हैं। अब दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या ओमान की यह बातचीत किसी ठोस नतीजे पर पहुंचती है या फिर यह केवल एक और सैन्य टकराव की भूमिका मात्र है।