Iran Missile Attack: होर्मुज में अब आर-पार के मूड में ईरान! अमेरिकी युद्धपोत पर किया मिसाइल अटैक

Iran Missile Attack: रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी नौसेना की चेतावनी न मानने पर अमेरिकी जहाज को निशाना बनाकर दो मिसाइलें छोड़ी गईं। ईरान का दावा है कि मिसाइल लगने के बाद युद्धपोत आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं रहा और उसे मजबूरन इलाके से पीछे हटना पड़ा

अपडेटेड May 04, 2026 पर 5:27 PM
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ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई तब की गई जब अमेरिकी जहाज ने ईरानी नौसेना की चेतावनियों को लगातार नजरअंदाज किया

Iran-US War: खाड़ी क्षेत्र में एक बार फिर से तनाव चरम पर है और भीषण युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। ईरान की समाचार एजेंसी 'फार्स' ने एक चौंकाने वाला दावा किया है कि ईरानी नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक अमेरिकी युद्धपोत पर दो मिसाइलें दागी हैं। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई तब की गई जब अमेरिकी जहाज ने ईरानी नौसेना की चेतावनियों को लगातार नजरअंदाज किया।

क्या है पूरा मामला?

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कथित हमला रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जास्क द्वीप के करीब हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी नौसेना की चेतावनी न मानने पर अमेरिकी जहाज को निशाना बनाकर दो मिसाइलें छोड़ी गईं। ईरान का दावा है कि मिसाइल लगने के बाद युद्धपोत आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं रहा और उसे मजबूरन इलाके से पीछे हटना पड़ा। स्थानीय सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया कि एक अन्य अमेरिकी युद्धपोत को भी चेतावनी के बाद रास्ता बदलने पर मजबूर कर दिया गया।


ट्रंप का 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' बना हुआ है तनाव की मुख्य वजह

यह टकराव ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' का ऐलान किया है। इस ऑपरेशन का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे या परेशान वाणिज्यिक जहाजों की सहायता करना है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस मिशन में 15,000 सैनिक, 100 से अधिक लड़ाकू विमान, युद्धपोत और अत्याधुनिक ड्रोन तैनात किए गए हैं। ईरान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इस क्षेत्र में किसी भी विदेशी सैन्य गतिविधि के लिए ईरानी अधिकारियों से तालमेल जरूरी है।

अमेरिकी प्रतिक्रिया का इंतजार

ईरान ने इस हमले का बड़ा दावा तो किया है, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका या उसकी नौसेना की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने नहीं आया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दावा सही है, तो यह वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।

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