अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयरस्ट्राइक के बाद खुलकर ईरान युद्ध पर पहली बार बात की है। डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ईरान में मिलिट्री ऑपरेशन जारी है। ईरान पर अभी और बड़े हमले होंगे। ये हमला ईरान को समय रहते एक्शन न लेने की सजा है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने अमेरिका के साथ धोखा किया। ईरान के खिलाफ 5 हफ्ते की तैयारी है। जरुरत पड़ी तो जंग को और बढ़ाएंगे। ईरान अपने हथियार डाल दे नहीं तो ऐसे ऑपरेशन होंगे, जिसे दुनिया ने नहीं देखा होगा।
ईरान पर होंगे और भी हमले - ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करने का फैसला इसलिए लिया गया, ताकि तेहरान के परमाणु हथियार बनाने की कोशिशों को रोका जा सके और पश्चिम एशिया में सक्रिय हथियारबंद समूहों को मिल रहे उसके समर्थन पर लगाम लगाई जा सके। व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह कदम उठाने का यही “आखिरी और सबसे सही मौका” था। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने यह कार्रवाई उन खतरों को खत्म करने के लिए की है, जो उनके अनुसार ईरान की मौजूदा सरकार से पैदा हो रहे थे। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा खतरे को रोकना और भविष्य में बड़े जोखिमों को कम करना है।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान की नेतृत्व व्यवस्था अब अपनी सीमाओं के बाहर सक्रिय हथियारबंद समूहों को हथियार, पैसा और रणनीतिक मदद न दे सके। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान लंबे समय से लेबनान में हिज़्बुल्लाह, गाजा में हमास, इराक की शिया मिलिशिया और यमन के हूथी समूह को समर्थन देता रहा है। ट्रंप ने यह बयान व्हाइट हाउस में आयोजित एक समारोह के दौरान दिया, जहां उन्होंने तीन अमेरिकी सैनिकों को मेडल ऑफ ऑनर से सम्मानित किया। इनमें से दो सैनिकों को यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान से ईरान की सैन्य ताकत को पहले ही बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि ईरान की नौसेना से जुड़े ठिकानों और संसाधनों को निशाना बनाया गया है और अमेरिका मजबूत इरादों के साथ यह अभियान आगे भी जारी रखेगा।