ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए बल प्रयोग नहीं करूंगा: दावोस में बोले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

Trump on Greenland: ट्रंप ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर डेनमार्क की कड़ी आलोचना की। उन्होंने डेनमार्क को “आभार न मानने वाला” बताते हुए कहा कि वह ग्रीनलैंड पर अपना नियंत्रण छोड़ने से इनकार कर रहा है, जबकि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उसकी रक्षा अमेरिका ने की थी

अपडेटेड Jan 21, 2026 पर 8:22 PM
Story continues below Advertisement
दावोस में ट्रंप ने कहा कि वे ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए बल प्रयोग नहीं करेंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावोस में ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की अपनी मांग को दोहराते हुए तर्क दिया कि "अमेरिका के अलावा कोई भी देश या देशों का समूह ग्रीनलैंड को सुरक्षित करने की स्थिति में नहीं है।" 'देशों के समूह' से उनका मतलब NATO से था। इस दौरान उन्होंने एक बड़ी बात ये भी कही कि वह ग्रीनलैंड को कब्जाने के लिए बल प्रयोग नहीं करेंगे। यह अब तक का उनका सबसे बड़ा बयान है। उन्होंने कहा, “NATO के हर एक सहयोगी देश का यह दायित्व है कि वह अपने इलाके की रक्षा करने में सक्षम हो। हम एक महान शक्ति हैं, लोगों की समझ से भी कई गुना महान शक्ति हैं।”

ट्रंप ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर डेनमार्क की कड़ी आलोचना की। उन्होंने डेनमार्क को “आभार न मानने वाला” बताते हुए कहा कि वह ग्रीनलैंड पर अपना नियंत्रण छोड़ने से इनकार कर रहा है, जबकि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उसकी रक्षा अमेरिका ने की थी।

ट्रंप ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध में डेनमार्क सिर्फ छह घंटे में ही जर्मनी के सामने हार गया था और वो न तो अपनी रक्षा कर सका और न ही ग्रीनलैंड की। उनके मुताबिक, इसके बाद अमेरिका को मजबूरी में ग्रीनलैंड की सुरक्षा संभालनी पड़ी।


उन्होंने यह भी कहा कि उस समय अमेरिका ने डेनमार्क को ग्रीनलैंड वापस सौंपने का फैसला किया, जो अब उन्हें गलत लगता है। ट्रंप ने कहा, “हमने ग्रीनलैंड वापस कर दिया, यह हमारी गलती थी। हमने ऐसा क्यों किया, यह आज भी समझ से बाहर है।”

ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अब वही डेनमार्क अमेरिका के प्रति आभार दिखाने के बजाय ग्रीनलैंड छोड़ने से इनकार कर रहा है, जो उनके अनुसार बेहद हैरान करने वाला है।

ग्रीनलैंड पर नहीं करेंगे बल प्रयोग: ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए बल प्रयोग नहीं करेंगे। यह उनका अब तक का सबसे साफ बयान है, जिसमें उन्होंने सैन्य ताकत के इस्तेमाल से इनकार किया है।

ट्रंप ने कहा, “शायद हमें कुछ भी नहीं मिलेगा, जब तक कि मैं बहुत ज्यादा ताकत और बल का इस्तेमाल करने का फैसला न करूं। अगर ऐसा हुआ तो हम रुकने वाले नहीं होंगे। लेकिन मैं ऐसा नहीं करूंगा। ठीक है, अब लोग कहेंगे- अच्छा हुआ।”

उन्होंने आगे कहा, “यह शायद मेरा सबसे बड़ा बयान है, क्योंकि लोग सोचते थे कि मैं ताकत का इस्तेमाल करूंगा। मुझे ताकत इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। मैं करना नहीं चाहता और मैं ऐसा नहीं करूंगा।”

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका सिर्फ ग्रीनलैंड चाहता है। उनके शब्दों में, “अमेरिका बस एक जगह मांग रहा है, जिसका नाम ग्रीनलैंड है।”

बाद में ट्रंप ने फिर दोहराया कि वह ग्रीनलैंड को लेकर किसी समझौते या किराये (लीज) की बजाय उसका पूरा मालिकाना हक चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “हम ग्रीनलैंड चाहते हैं, पूरे अधिकार और मालिकाना हक के साथ, क्योंकि उसकी रक्षा करने के लिए मालिक होना जरूरी है। किसी जगह की रक्षा आप किराये पर लेकर नहीं कर सकते।”

यूरोपीय देशों से तुरंत बातचीत शुरू करने की मांग

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों से तुरंत बातचीत शुरू करने की मांग की है, ताकि ग्रीनलैंड को अमेरिका की तरफ से हासिल करने की संभावनाओं पर चर्चा की जा सके।

स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करना अमेरिका और यूरोप- दोनों के हित में होगा। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और डेनमार्क NATO का सदस्य देश है।

ट्रंप ने कहा, “इस विशाल भू-भाग और बर्फीले इलाके की सुरक्षा सिर्फ अमेरिका ही कर सकता है। अमेरिका ही इसे विकसित कर सकता है, बेहतर बना सकता है और इसे यूरोप के लिए सुरक्षित और फायदेमंद बना सकता है।”

उन्होंने कहा कि इसी वजह से वह ग्रीनलैंड को अमेरिका की तरफ से हासिल करने को लेकर तुरंत बातचीत चाहते हैं। ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि अमेरिका ने अपने इतिहास में पहले भी कई इलाकों को अपने अधीन लिया है, जैसे कई यूरोपीय देशों ने किया है।

ट्रंप ने यह दलील भी दी कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका के नियंत्रण में आता है, तो इससे NATO की ताकत और सुरक्षा बढ़ेगी। उन्होंने कहा, “यह नाटो के लिए कोई खतरा नहीं होगा, बल्कि पूरे नाटो गठबंधन की सुरक्षा को मजबूत करेगा।”

हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि अमेरिका के साथ NATO ने अब तक न्यायपूर्ण व्यवहार नहीं किया है।

अमेरिका ने किया हमला, तो कनाडा तालिबान स्टाइल में देगा जवाब! 100 साल में पहली बार सेना ने तैयार किया ऐसा मॉडल

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।