मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संकट के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि अब दूसरे देशों को अपनी ऊर्जा जरूरतें खुद पूरी करनी होंगी और अमेरिका हर बार मदद के लिए आगे नहीं आएगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज समुद्री मार्ग में बाधा के कारण पूरी दुनिया की ऑयल और गैस सप्लाई पर असर पड़ा है।
ब्रिटेन समेत कई देशों पर निशाना
ट्रंप ने खासतौर पर यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों को निशाने पर लिया, जिन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि जिन देशों को जेट फ्यूल नहीं मिल रहा है, उन्हें अब खुद आगे बढ़कर अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
“अमेरिका हर बार मदद नहीं करेगा”
ट्रंप के बयान का सबसे सख्त हिस्सा यह रहा कि उन्होंने सहयोगी देशों को आत्मनिर्भर बनने की सलाह देते हुए कहा कि अमेरिका अब हर बार उनकी मदद के लिए मौजूद नहीं रहेगा। उन्होंने कहा, “अब आपको खुद लड़ना सीखना होगा। जैसे आप हमारे साथ नहीं थे, वैसे ही अब अमेरिका भी आपके लिए हर बार खड़ा नहीं रहेगा।” यह बयान ग्लोबल स्तर पर अमेरिका की विदेश नीति में संभावित बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
ईरान को लेकर भी किया बड़ा दावा
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि ईरान को इस संघर्ष में काफी नुकसान हुआ है और “कठिन हिस्सा पूरा हो चुका है।” हालांकि, जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं और इस इलाके में संघर्ष जारी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से ग्लोबल ऑयल की सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट से तेल की कीमतों में उछाल आता है और एनर्जी संकट गहरा सकता है। हालिया घटनाक्रम के बाद कई देशों में ईंधन की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ग्लोबल असर और बढ़ती अनिश्चितता
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप का यह बयान ग्लोबल बाजारों में अनिश्चितता और बढ़ा सकता है। एक ओर जहां एनर्जी संकट पहले से ही गहराता जा रहा है, वहीं अमेरिका का यह रुख सहयोगी देशों के लिए नई चुनौती पैदा कर सकता है। इसके साथ ही, यह बयान इस बात का संकेत भी देता है कि आने वाले समय में देश अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर ज्यादा आक्रामक रणनीति अपना सकते हैं।
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