U-Visa Fraud: अमेरिका में U-Visa पाने के लिए 'फर्जी लूट' का खेल, FBI ने 11 भारतीयों को किया गिरफ्तार

U-Visa Fraud: अमेरिका में 11 भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने इमिग्रेशन लाभ पाने के लिए नकली हथियारबंद डकैती कराने की साजिश रची थी। इन लोगों पर वीजा धोखाधड़ी की साजिश करने का भी आरोप है।

अपडेटेड Mar 14, 2026 पर 12:30 PM
Story continues below Advertisement
अमेरिका में U-Visa पाने के लिए 'फर्जी लूट' का खेल, 11 भारतीय गिरफ्तार

U-Visa Fraud: अमेरिका में 11 भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने इमिग्रेशन (प्रवासन) लाभ पाने के लिए नकली हथियारबंद डकैती कराने की साजिश रची थी। इन लोगों पर वीजा धोखाधड़ी की साजिश करने का भी आरोप है।

मैसाचुसेट्स के बोस्टन में मौजूद फेडरल एजेंट्स के मुताबिक, इस समूह ने अलग-अलग बिजनेस वाली जगहों पर नकल डकैती की घटनाओं को अंजाम दिया। इन लोगों ने अमेरिका में ऐसा इसलिए किया ताकि वहां काम करने वाले कर्मचारी खुद को किसी अपराध का शिकार बता सकें, जो कि एक खास तरह का वीजा पाने के लिए जरूरी शर्त है।

U-Visa पाने के लिए 'झूठी डकैती'


अमेरिका "U-Visa" प्रदान करता है, जो गंभीर अपराधों के शिकार व्यक्तियों को दिया जाता है जो कानून लागू करने वाली एजेंसियों की जांच में सहयोग करते हैं।

जांच एजेंसियों ने बताया कि आरोपियों ने कॉन्वीनियंस स्टोर, शराब की दुकानों और फास्ट-फूड रेस्टोरेंट में कम से कम छह फर्जी लूट की घटनाओं को अंजाम दिया।

अमेरिका में इस तरह हुई फर्जी डकैती?

उन्होंने बताया कि इस पूरे नाटक के लिए बहुत बड़ी प्लानिंग की गई थी। इसमें एक व्यक्ति नकली लुटेरे का रूप धारण करता, बंदूक जैसी दिखने वाली कोई वस्तु लहराते हुए दुकान में प्रवेश करता, काउंटर से नकदी लेता और फिर मौके से फरार हो जाता।

FBI ने बताया कि इन लोगों की प्लानिंग में सबसे खास बात ये थी कि वे यह सुनिश्चित करते थे कि पूरी घटना रेस्टोरेंट के CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हो जाए, ताकि यह एक असली अपराध लगे।

जांच में यह भी पता चला कि नकली लूट के बाद, दुकान में मौजूद लोग तुरंत पुलिस से संपर्क नहीं करते थे। वे जानबूझकर अधिकारियों को सूचित करने से पहले पांच मिनट या उससे अधिक समय तक इंतजार करते थे, जिससे "लुटेरे" को आसानी से भागने का मौका मिल जाता था। इससे इस नकली घटना को और भी ज्यादा असली जैसा दिखाया जा सकता था।

लोग खुद बने डकैती का शिकार

आरोप है कि इस योजना में शामिल लोग इन नकली डकैती में शामिल होने के लिए पैसे देते थे, जिससे वे खुद को झूठे पीड़ित के रूप में पेश कर सकें। आरोप है कि इस योजना का आयोजक पैसे प्राप्त करता और फिर दुकानों के मालिकों में यह पैसा बांट देता, ताकि वे अपनी दुकानों में इन नकली डकैतियों को अंजाम दे सकें।

आरोपियों में से छह - जितेंद्रकुमार पटेल, महेशकुमार पटेल, संजयकुमार पटेल, अमिताबहेन पटेल, संगीताबेन पटेल और मितुल पटेल - को मैसाचुसेट्स में गिरफ्तार किया गया था और आज सुबह बोस्टन की फेडरल कोर्ट में प्रारंभिक पेशी के बाद रिहा कर दिया गया। जबकि अन्य - रमेशभाई पटेल, रोनाकुमार पटेल, सोनल पटेल और मिनकेश पटेल - को केंटकी, मिसौरी और ओहियो में गिरफ्तार किया गया और उनकी प्रारंभिक पेशी हुई। वे बाद में बोस्टन के फेडरल कोर्ट में पेश होंगे।

सभी आरोपी कोर्ट में पेश

सभी आरोपियों को अदालत के सामने पेश किया गया और आगे की कार्यवाही बोस्टन के फेडरल कोर्ट में होनी है।

अमेरिकी कानून के तहत, अगर वीजा धोखाधड़ी से संबंधित साजिश साबित हो जाती है, तो आरोपियों को पांच साल तक की कैद, तीन साल की निगरानी और 250,000 डॉलर तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

यह कार्रवाई FBI, इमिग्रेशन विभाग और कई राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से की गई थी।

अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल ये केवल आरोप हैं। कानून के तहत, सभी आरोपियों को अदालत में दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाता है।

यह भी पढ़ें: ट्रंप का दावा, अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप पर की बमबारी, सैन्य ठिकाने 'पूरी तरह तबाह'

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।