US-Iran Talks: कौन हैं अहमद वाहिदी? जो अमेरिका और ट्रंप के साथ बातचीत में बने ईरान के सबसे बड़े 'पावर ब्रोकर'

Ahmad Vahidi Iran Power Broker: वाहिदी 8 फरवरी के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं, लेकिन वे पर्दे के पीछे से सरकार चला रहे हैं। हाल ही में तेहरान में पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री के साथ उनकी सीक्रेट बैठक की खबरें आईं, जिसमें अमेरिका के साथ बातचीत की रणनीति पर चर्चा की गई

अपडेटेड May 21, 2026 पर 4:45 PM
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रिपोर्टों के मुताबिक, जनरल वाहिदी इस समय तेहरान के पावर स्ट्रक्चर में सबसे ताकतवर शख्सियत बनकर उभरे हैं

Ahmad Vahidi: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ईरान के चल रहे बेहद महत्वपूर्ण पीस टॉक के बीच एक नाम पूरी दुनिया के सामने आया है। यह नाम है ईरान के कट्टरपंथी जनरल अहमद वाहिदी का। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, जनरल वाहिदी इस समय तेहरान के पावर स्ट्रक्चर में सबसे ताकतवर शख्सियत बनकर उभरे हैं और अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान की तरफ से सबसे बड़े 'पावर ब्रोकर' बन चुके हैं।

वाशिंगटन स्थित 'इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर' (ISW) के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के प्रमुख जनरल वाहिदी ने न केवल युद्ध के मोर्चे पर बल्कि अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर भी ईरान की नीति को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर अहमद वाहिदी कौन हैं और क्यों ट्रंप के लिए इनसे निपटना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

सर्वोच्च नेता के सबसे करीबी, संकट में संभाली कमान


ईरान में यह सत्ता परिवर्तन ऐसे समय में हुआ है जब देश के नए सर्वोच्च नेता आयातुल्ला मोजतबा खामेनेई फरवरी में हुए इजरायली हमलों में घायल होने के बाद से पूरी तरह एकांतवास में हैं। इसी हमले में उनके पिता अली खामेनेई की मौत हो गई थी।

ऐसे संकट के समय में जनरल वाहिदी सर्वोच्च नेता के सबसे छोटे और बेहद करीबी इनर सर्कल का हिस्सा बन चुके हैं। वाहिदी खुद 8 फरवरी के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं, लेकिन वे पर्दे के पीछे से सरकार चला रहे हैं। हाल ही में तेहरान में पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री के साथ उनकी गुप्त बैठक की खबरें आईं, जिसमें अमेरिका के साथ बातचीत की रणनीति पर चर्चा की गई।

क्यों ट्रंप के साथ डील में अड़े हैं वाहिदी?

मिडल ईस्ट मामलों के अमेरिकी एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका के सामने ईरान इस समय जो बेहद सख्त और समझौता न करने वाला रुख अपनाए हुए है, वह पूरी तरह से वाहिदी की सोच का नतीजा है।

झुकने को तैयार नहीं: वाहिदी का मानना है कि अमेरिका को हर मोड़ पर चुनौती दी जानी चाहिए। वे 'अनंत क्रांति और अनंत प्रतिरोध' की विचारधारा में विश्वास रखते हैं।

यूरेनियम देने से इनकार: बातचीत के दौरान ईरान ने अमेरिका की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें संवर्धित यूरेनियम के भंडार को सौंपने की बात कही गई थी।

ट्रंप की मजबूरी का फायदा: वाहिदी का आकलन है कि डोनाल्ड ट्रंप मिडल ईस्ट में सऊदी अरब और यूएई जैसे अपने सहयोगियों के बुनियादी ढांचे को बचाने के लिए ईरान के साथ दोबारा पूर्ण स्तर का युद्ध शुरू करने से हिचकिचाएंगे। इसलिए ईरान दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

कौन हैं अहमद वाहिदी?

1958 में ईरान के शिराज शहर में जन्मे अहमद शाहचरागी का इतिहास बेहद आक्रामक और विवादित रहा है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद वे रिवोल्यूशनरी गार्ड में शामिल हुए। वे ईरान की खतरनाक विदेशी खुफिया इकाई 'कुद्स फोर्स' के पहले प्रमुख बने और मिडल ईस्ट में ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप्स जैसे- हिजबुल्लाह और हमास नेटवर्क तैयार किया।

अंतरराष्ट्रीय धमाकों के आरोप: अर्जेंटीना के अभियोजकों के मुताबिक, वाहिदी 1994 में अर्जेंटीना के एक यहूदी केंद्र पर हुए बम विस्फोट (85 मौतें) और 1996 में सऊदी अरब के खोबर टॉवर्स ब्लास्ट (19 अमेरिकी सैनिकों की मौत) के मुख्य मास्टरमाइंड थे।

हिजाब प्रदर्शनों का दमन: साल 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद जब ईरान में हिजाब विरोधी आंदोलन भड़का, तब वाहिदी देश के गृह मंत्री थे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर बेहद हिंसक कार्रवाई करवाई थी और महिलाओं की सीक्रेट मॉनिटरिंग के आदेश दिए थे।

जब कूटनीति के मोर्चे पर फेल हुए 'नरमपंथी'

दरअसल, अप्रैल 2026 में पाकिस्तान ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बीच एक गुप्त बैठक की मेजबानी की थी। इस बैठक की अगुवाई ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे थे, लेकिन यह बातचीत बिना किसी डील के खत्म हो गई।

ईरान लौटने पर गालिबफ और अराघची की इस बात के लिए आलोचना हुई कि वे अमेरिका के सामने झुकने को तैयार थे। इस विफलता के बाद, ईरान के पूरे कूटनीतिक सिस्टम को बदल दिया गया और अब वाहिदी ही मध्यस्थों के लिए बातचीत का इकलौता मुख्य जरिया बन चुके हैं।

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