पाकिस्तानी सेना पर गिलगित-बाल्टिस्तान चुनावों में कर रही धांधली, LeT से जुड़े आतंकियों का खुलेआम सपोर्ट कर रहा पाक

Gilgit-Baltistan elections 2026: पाकिस्तान की सेना पर गिलगित-बाल्टिस्तान चुनावों में धांधली और LeT से जुड़े उम्मीदवारों का समर्थन करने का आरोप लगा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पर गिलगित-बाल्टिस्तान (GB) में 7 जून को होने वाले चुनावों से पहले क्रैकडाउन करवाने के आरोप लग रहे हैं

अपडेटेड Jun 01, 2026 पर 12:01 PM
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Gilgit-Baltistan elections 2026: गिलगित-बाल्टिस्तान चुनावों में पाक सेना आतंकियों का सपोर्ट कर रही है

Gilgit-Baltistan elections 2026: पाकिस्तान की सेना गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले विधानसभा चुनावों में आतंकियों का खुलकर सपोर्ट कर रही है। एक रिपोर्ट में पाकिस्तानी सेना की नापाक करतूतों का खुलासा हुआ है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पर गिलगित-बाल्टिस्तान (GB) चुनावों से पहले 'क्रैकडाउन' करवाने के आरोप लग रहे हैं। विपक्षी नेता और स्थानीय लोग सेना पर चुनाव प्रचार रोकने, चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर करने और प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े एक राजनीतिक संगठन के उम्मीदवारों को चुनाव में शामिल होने में मदद करने का आरोप लगा रहे हैं।

आतंकी हाफिज सईद की पार्टी लड़ रही चुनाव

खुफिया विभाग के शीर्ष सूत्रों ने 'न्यूज 18' को बताया कि पाकिस्तान की सेना ने गिलगित-बाल्टिस्तान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और शिया-बहुल क्षेत्र में 'पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML)' के उम्मीदवारों का समर्थन किया है। इस पार्टी को व्यापक रूप से LeT के संस्थापक आतंकी हाफिज सईद से जुड़ा एक राजनीतिक मोर्चा माना जाता है।


इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीतिक समूहों के बीच चिंताएं बढ़ा दी हैं। उनका आरोप है कि यह कदम इस क्षेत्र के राजनीतिक और वैचारिक परिदृश्य को बदलने के एक बड़े प्रयास का हिस्सा है। सूत्रों ने बताया कि गिलगित-बाल्टिस्ता में PMML (Pakistan Markazi Muslim League) से जुड़े उम्मीदवारों को चुनाव में उतारने से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का डर पैदा हो गया है। खासकर ऐसे क्षेत्र में जहां शिया समुदाय की आबादी का एक बड़ा हिस्सा है।

शहबाज सरकार पर विपक्ष भड़का

विपक्षी दलों में 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' (PTI) से जुड़े नेता भी शामिल हैं। उन्होंने सेना पर अपने प्रतिद्वंद्वियों को स्वतंत्र रूप से चुनाव प्रचार करने से रोकने का आरोप लगाया है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व पाक पीएम इमरान खान की पार्टी PTI के नेताओं और 'तहरीक तहफ्फुज-ए-आईन पाकिस्तान' (TTAP) गठबंधन के सदस्यों को कथित तौर पर इस्लामाबाद एयरपोर्ट पर रोक दिया गया। साथ ही चुनावी रैलियों को संबोधित करने के लिए स्कार्दू जाने से मना कर दिया गया।

विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया

स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि मतदान से पहले के दिनों में कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया है। उन्हें क्षेत्र से बाहर निकाल दिया गया है। या उन पर प्रशासनिक प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया में लोगों का विश्वास कम हुआ है।

एक वरिष्ठ खुफिया सूत्र ने कहा, "ये कार्रवाइयां चुनाव-पूर्व मैनेजमेंट के एक ऐसे तरीके को दर्शाती हैं, जिसे अपने पक्ष में चुनावी नतीजे लाने के लिए तैयार किया गया है।" उन्होंने आरोप लगाया कि सेना इस क्षेत्र में एक ऐसी राजनीतिक नेतृत्व को उभरने देने की कोशिश कर रही है जो उनके इशारों पर चले।

्अब सेना के अंदरमें हेगा एग्जाम?

आलोचकों ने सेना के नेतृत्व पर उन नीतियों को फिर से लागू करने का भी आरोप लगाया है जो पूर्व सैन्य शासक जनरल ज्या-उल-हक के दौर की याद दिलाती हैं। जनरल जिया ने पूरे पाकिस्तान में इस्लामीकरण की नीतियों को बढ़ावा दिया था। गिलगित-बाल्टिस्तान के स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिया-बहुल इस क्षेत्र में सुन्नी इस्लामी समूहों को बढ़ावा देने का मकसद इस इलाके पर इस्लामाबाद की पकड़ को और मजबूत करना और अधिक राजनीतिक अधिकारों की मांगों को दबाना है। विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया में और भी गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं।

'फॉर्म 47-शैली' के हेरफेर की चेतावनी

कुछ नेताओं ने संभावित 'फॉर्म 47-शैली' के हेरफेर की चेतावनी दी है। यह पाकिस्तान के 2024 के आम चुनावों से जुड़े आरोपों का एक संदर्भ है, जहां विपक्षी दलों ने अधिकारियों पर वोटों की गिनती के दौरान नतीजों में बदलाव करने का आरोप लगाया था। सूत्रों ने यह भी बताया कि पंजाब सरकार के अधिकारियों ने चुनावों से पहले 'चुनावी सुरक्षा ड्यूटी' के लिए गिलगित-बाल्टिस्तान में पंजाब पुलिस बल के 6,000 जवानों की तैनाती को मंजूरी दे दी है।

ये अधिकारी सभी हाईटेक टेक्नोलॉजी से लैस होंगे। विपक्ष ने इस बल पर चुनावों में धांधली करने के मकसद से उस इलाके में जाने का आरोप लगाया है। खुफिया सूत्रों ने इन घटनाक्रमों को एक लंबे समय से चली आ रही 'डीप स्टेट पॉलिसी' का हिस्सा बताया है। इसका मकसद चुनावी मैनेजमेंट और राजनीतिक प्रॉक्सी (प्रतिनिधियों) के इस्तेमाल के ज़रिए पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान पर अपना कंट्रोल बनाए रखना है।

उन्होंने आगे दावा किया कि इस क्षेत्र में LeT से जुड़े राजनीतिक मोर्चों की घुसपैठ से सांप्रदायिक विभाजन और गहरा सकता है। संभवतः इस इलाके की जनसांख्यिकीय और वैचारिक पहचान भी बदल सकती है। पाकिस्तान की सरकार और सेना ने चुनावी प्रक्रियाओं में दखलंदाजी के आरोपों को बार-बार नकारा है।

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उनका कहना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव पूरी तरह से संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार ही कराए जाते हैं। बढ़ते राजनीतिक तनाव, सरकारी दखलंदाज़ी के आरोपों और इस क्षेत्र में चरमपंथियों से जुड़े राजनीतिक तत्वों की बढ़ती भूमिका को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच, 7 जून को होने वाले चुनावों पर सभी की पैनी नजर रहने की उम्मीद है।

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