US-Iran war: ऐसा लग रहा है कि मिडिल ईस्ट में एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच घातक युद्ध की शुरुआत हो सकती है। CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने महीनों की खुदाई और मरम्मत के काम के बाद अपने अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों को दोबारा खोल लिया है। बुलडोजर-ट्रकों से 50 टनलें खोलकर सड़कें सुधार ली गई हैं। इससे ईरान इजरायल पर फिर भारी मिसाइल हमले कर सकता है। CNN द्वारा जारी गई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरानी सेना ने 18 अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों पर अमेरिकी और इजरायली हमलों में निशाना बनाई गई 69 सुरंगों में से 50 के एंट्री गेट सफलतापूर्वक फिर से खोल दिए हैं।
इन हमलों का शुरुआती मकसद सड़कों को नष्ट करके और सुरंगों के मेन गेट को मलबे से दबाकर तेहरान की मिसाइल भंडारों तक पहुंच को सीमित करना था। CNN के अनुसार, ईरान ने मलबे को हटाने और ठिकानों तक पहुंच बहाल करने के लिए बुलडोजर और डंप ट्रक का इस्तेमाल किया। संघर्ष के दौरान खुदाई के उपकरणों पर बार-बार हमले होने के बावजूद यह काम जारी रहा।
विशेषज्ञों ने CNN को बताया कि ये घटनाक्रम दर्शाते हैं कि ईरान की मिसाइल क्षमताएं उम्मीद से कहीं अधिक मजबूत हैं। जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉनप्रोलिफरेशन स्टडीज के रिसर्च एसोसिएट सैम लेयर ने कहा, "ईरान मिसाइलें दागना तब तक जारी रख सकता है, जब तक उसके पास लॉन्चर और उन्हें चलाने वाली टीमें मौजूद हैं, भले ही मिसाइलों का उत्पादन रुक गया हो।" उन्होंने आगे कहा, "ऐसा कुछ भी नहीं है जो लॉन्चरों को उन मिसाइलों के विशाल भंडार से लैस होने से रोक सके, जो ईरानियों के पास अभी भी मौजूद हैं।"
CNN ने रिपोर्ट दी कि हालांकि लड़ाई के दौरान ईरान की मिसाइल दागने की दर में काफी गिरावट आई थी। फिर भी तेहरान ने मुख्य ठिकानों तक पहुंच धीरे-धीरे बहाल करके पूरे संघर्ष के दौरान मिसाइलें दागना जारी रखा। सात हफ्ते से भी ज्यादा समय पहले हुए संघर्ष-विराम के बाद से खुदाई और मरम्मत का काम और भी तेज हो गया है।
न्यूज़ रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ईरान ने अमेरिकी और इजरायली हमलों से क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत कर ली है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि बमबारी से बने ज्यादातर गड्ढों को भर दिया गया है। कुछ मामलों में सड़कों को फिर से बनाया गया है। लेयर ने तर्क दिया कि यह अभियान सामरिक (tactical) और रणनीतिक (strategic) सफलता के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है।
उन्होंने CNN से कहा, "अमेरिकी सेना सामरिक सफलताएं हासिल करने में माहिर है। ईरान की मिसाइल सेना को भूमिगत रूप से दबाना और निष्क्रिय करना इसका एक बेहतरीन उदाहरण है।" उन्होंने आगे कहा, "हालाँकि, अगर इसके साथ-साथ युद्ध के कुछ तर्कसंगत रणनीतिक उद्देश्य और जीत हासिल करने की कोई व्यावहारिक योजना न हो, तो इसका परिणाम अंततः एक रणनीतिक विफलता के रूप में सामने आ सकता है।"
CNN ने आगे बताया कि हालाँकि ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक अस्थायी समझौता हो गया है। लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर बातचीत अभी भी जारी है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर फिर से दुश्मनी शुरू होती है, तो तेहरान अपने हथियारों के ज़खीरे को कम करने की पिछली कोशिशों के बावजूद, मिसाइल लॉन्च करने की एक बड़ी क्षमता अपने पास रख सकता है।
CNN की रिसर्च के बारे में सवालों का जवाब देते हुए पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने उस खास आकलन पर कोई टिप्पणी नहीं की। इसके बजाय, उन्होंने अपने पहले के एक बयान को दोहराते हुए कहा, "अमेरिका की सेना दुनिया में सबसे ताकतवर है और उसके पास वह सब कुछ है जिसकी उसे राष्ट्रपति द्वारा चुने गए समय और जगह पर कार्रवाई करने के लिए जरूरत है।"