दुनिया में आने वाली है भयानक महामंदी! होर्मुज संकट पर IEA की बड़ी चेतावनी, 'रेड जोन' के करीब है ग्लोबल इकोनॉमी

IEA Red Zone Warning: IEA ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच कल को कोई समझौता हो भी जाता है और होर्मुज का रास्ता खुल भी जाता है, तो भी बाजार तुरंत शांत नहीं होने वाला है। रास्ता खुलने के बाद भी बाजार काफी समय तक बेहद उतार-चढ़ाव वाले दौर से गुजरेगा

अपडेटेड Jun 02, 2026 पर 6:58 PM
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फातिह बिरोल ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बताया है

Global Energy Crisis: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ठप है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर एक बेहद डरावनी चेतावनी जारी की है। IEA का कहना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में यह गतिरोध जून के बाद भी जारी रहा, तो दुनिया की अर्थव्यवस्था एक खतरनाक 'रेड जोन' में प्रवेश कर जाएगी।

IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने 'CNBC-TV18' को दिए इंटरव्यू में साफ कहा कि दुनिया के पास अब इस कच्चे तेल के झटके से बचने के लिए बैकअप या बफर स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। उन्होंने इसे इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बताया है, जिससे भारी मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई का नुकसान हुआ है।

जून के बाद 'रेड जोन' में क्यों जाएगी वैश्विक अर्थव्यवस्था?


फातिह बिरोल के अनुसार, अब तक दुनिया ने अपने पुराने स्टॉक के दम पर गुजारा कर लिया है, लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा रहा है:

बफर स्टॉक खत्म: देशों के पास मौजूद इन्वेंट्री, तेल का स्टॉक और जेब का पैसा अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और नया स्टॉक बाजार में नहीं आ रहा है।

वेकेशन सीजन बढ़ाएगा आफत: जून के बाद जुलाई और अगस्त में दुनिया भर के कई देशों में ट्रैवल सीजन शुरू हो जाता है। इस दौरान फ्लाइट्स, गाड़ियां और बसों का संचालन चरम पर होता है, जिससे ईंधन की डिमांड अचानक कई गुना बढ़ जाएगी।

एशिया पर सबसे ज्यादा मार: अगर जून के अंत तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बिना किसी शर्त के पूरी तरह नहीं खोला गया, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था, खासकर एशियाई देशों जैसे- भारत, चीन के लिए 'रेड जोन' या मंदी का दौर शुरू हो जाएगा।

सप्लाई बहाल भी हुई, तो भी मंहगाई का लगेगा झटका

IEA ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच कल को कोई समझौता हो भी जाता है और होर्मुज का रास्ता खुल भी जाता है, तो भी बाजार तुरंत शांत नहीं होने वाला है। रास्ता खुलने के बाद भी बाजार काफी समय तक बेहद उतार-चढ़ाव वाले दौर से गुजरेगा।

मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई को दोबारा पूरी तरह बहाल करना आसान नहीं होगा, क्योंकि यह क्षेत्र दुनिया के कुल तेल निर्यात का 20% से अधिक हिस्सा संभालता है। ऐसे में कई देशों में भारी महंगाई देखने को मिलेगी, खासकर उन देशों में जिनकी करेंसी डॉलर के मुकाबले कमजोर है।

क्या IEA बाजार में जारी करेगा इमरजेंसी तेल का दूसरा स्टॉक?

इस साल मार्च में संकट से निपटने के लिए IEA के सभी 32 सदस्य देशों ने अपने आपातकालीन रिजर्व से 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में छोड़ने का ऐतिहासिक फैसला किया था।

फातिह बिरोल ने बताया कि मार्च में जब यह इमरजेंसी तेल बाजार में आया, तो कच्चे तेल की कीमतें करीब 20 डॉलर प्रति बैरल तक नीचे गिर गई थीं। इस फैसले को भारत जैसे उभरते देशों ने भी पूरा समर्थन दिया था।

जब उनसे पूछा गया कि क्या IEA तेल की दूसरी किस्त जारी करेगा, तो उन्होंने कहा कि IEA लगातार बाजार की स्थितियों पर नजर रख रहा है। हालांकि, अभी हालात उस गंभीर स्तर पर नहीं पहुंचे हैं जहां दूसरा स्टॉक जारी किया जाए, लेकिन अगर सही समय आया तो हम निश्चित रूप से इसके लिए आगे बढ़ेंगे।

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