Iran US War: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर से खाड़ी में युद्ध के काले बादल मंडराने लगे हैं। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान के साथ शांति वार्ता 'तेजी से' आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के एक सीनियर सैन्य अधिकारी के बयान ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है।
ईरानी कमांडर का साफ कहना है कि अमेरिका के साथ युद्ध होना अब तय है। दोनों तरफ से दावों और धमकियों के इस दौर ने मिडिल ईस्ट की राजनीति में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है।
ईरानी कमांडर की ट्रंप को खुली धमकी
ईरान के सेंट्रल मिलिट्री कमांड (खातम अल-अंबिया) के डिप्टी हेड मोहम्मद जाफर असादी ने एक बेहद तीखा बयान जारी किया है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि अमेरिका के साथ दोबारा दुश्मनी और जंग शुरू होना अब टाला नहीं जा सकता।
मोहम्मद जाफर असादी ने कहा, 'अमेरिका चाहता है कि हम पूरी तरह उसके सामने आत्मसमर्पण कर दें, लेकिन ईरानी कौम कभी घुटने नहीं टेकेगी। और जब तक हम आत्मसमर्पण नहीं करेंगे, तब तक युद्ध होना बिल्कुल तय है'।
ट्रंप का अलग ही दावा: 'तेजी से चल रही है शांति वार्ता'
ईरानी कमांडर के इस खौफनाक बयान से ठीक उलट, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद सकारात्मक और हैरान करने वाला दावा किया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि ईरान के साथ बैक-चैनल बातचीत बहुत 'तेजी से' आगे बढ़ रही है।
ट्रंप इस बातचीत को लेकर काफी उत्साहित और उम्मीदों से भरे नजर आ रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया है कि अगले एक हफ्ते के भीतर कोई बड़ा समझौता हो सकता है। ट्रंप के मुताबिक, इस समझौते से न सिर्फ सीजफायर की अवधि बढ़ेगी, बल्कि व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्ता यानी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को भी दोबारा खोला जा सकेगा।
IRGC ने दी बातचीत रोकने की धमकी
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप का यह बयान ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) से जुड़ी एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के कुछ ही घंटों बाद आया। ईरानी मीडिया का दावा था कि उनका देश अमेरिका के साथ चल रही वार्ता को सस्पेंड कर रहा है और इस जंग में अब 'अन्य मोर्चे' खोलने की तैयारी में है। ईरान के इस आंतरिक विरोधाभास ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को उलझन में डाल दिया है कि क्या सच में ईरान में सरकार और सेना के बीच सब कुछ ठीक है?
क्या होगा अगर बंद रहा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
दुनिया भर के बाजारों के लिए 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का खुला रहना बेहद जरूरी है। वैश्विक तेल सप्लाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर ट्रंप की कोशिशें नाकाम रहती हैं और यह रास्ता बंद रहता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ेगा।
फिलहाल दोनों देशों के बीच की स्थिति 'इधर कुआं, उधर खाई' जैसी बनी हुई है। एक तरफ ट्रंप की कूटनीति इस विवाद को शांति से सुलझाने का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ ईरान के जनरलों का आक्रामक रुख किसी बड़े महायुद्ध की ओर इशारा कर रहा है। अब देखना ये हैं कि ऊंट किस करवट बैठता है।