US-Greenland Row: अब ग्रीनलैंड की पूरी जनता को खरीदने की तैयारी में ट्रंप, हर नागरिक को देंगे $10,000 से $100,000

US-Greenland Row: ग्रीनलैंड इन दिनों चर्चा में है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस पर कब्जा जमाना चाहते हैं, वो भी ऐसे द्वीप पर जिस पर बर्फ की चादर बिछी रहती है। यहां मई से जुलाई के आखिर तक 24 घंटे दिन की रोशनी रहती है। जीवन दुरूह है, फिर भी अमेरिका और खास तौर पर ट्रंप इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं

अपडेटेड Jan 09, 2026 पर 9:41 AM
Story continues below Advertisement
US-Greenland Row: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा जमाना चाहते हैं

US-Greenland Row: ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ग्रीनलैंड के लोगों को डेनमार्क से अलग होने और अमेरिका के साथ आने के लिए उन्हें सीधे कैश पेमेंट देने की योजना पर विचार कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने अंदरूनी तौर पर ग्रीनलैंड के निवासियों को प्रति व्यक्ति $10,000 से $100,000 के बीच एकमुश्त पेमेंट देने के बारे में बात की है। ग्रीनलैंड अभी डेनमार्क का एक सेमी-ऑटोनॉमस इलाका है, जिसकी आबादी लगभग 57,000 है। यहां उपयोगी प्राकृतिक संसाधन भरपूर मात्रा में हैं।

न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से कई सूत्रों के अनुसार, ग्रीनलैंड की जनता को कैश देने का यह विचार अभी शुरुआती स्टेज में है। इसके डिटेल्स के बारे में अभी कुछ साफ नहीं हैं। सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी सरकार ने ऐसी रकम पर चर्चा की है जो कुल मिलाकर लगभग $6 बिलियन हो सकती है।

पिछले कुछ समय से कहा जा रहा है कि व्हाइट हाउस ग्रीनलैंड को खरीद सकता है। पेमेंट कई विकल्पों में से एक है जिन पर विचार किया जा रहा है। साथ ही डिप्लोमेटिक समझौते और यहां तक ​​कि मिलिट्री फोर्स के संभावित इस्तेमाल पर भी विचार किया जा रहा है। वैसे यह कब्जा नाटो देशों के लिए एक बुरा सपना होगा, क्योंकि ग्रीनलैंड ने अमेरिका के साथ कई समझौते साइन किए हैं।


यूरोपीय नेताओं ने दी धमकी

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा द्वीप को खरीदने का मुद्दा उठाने के बाद जवाब दिया। नीलसन ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, "बहुत हो गया... अब विलय के बारे में कोई और कल्पना नहीं।" यूरोपीय नेताओं ने भी ट्रंप की धमकी पर चिंता जताई है। डेनमार्क और अमेरिका दोनों नाटो सहयोगी हैं। वाशिंगटन के हालिया बयानों का विरोध हुआ है। मंगलवार को, फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने एक संयुक्त बतान में ट्रंप का विरोध किया।

ग्रीनलैंड को क्यों लेना चाहते हैं ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड में रुचि को लेकर वैश्विक राजनीति में लंबे समय से चर्चा होती रही है। यह रुचि पहली बार व्यापक रूप से तब सामने आई, जब ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान ग्रीनलैंड को खरीदने की संभावना पर सार्वजनिक रूप से विचार जताया। उस समय कई लोगों को यह बयान अजीब लगा। लेकिन इसके पीछे ठोस भू-राजनीतिक, रणनीतिक और आर्थिक कारण मौजूद हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है।

ग्रीनलैंड के लिए ट्रंप की ये लालसा नई नहीं है। 2019 में उन्होंने कहा था कि ये एक शानदार रियल एस्टेट सौदा होगा। हालांकि तब उन्होंने कहा था कि इसे खरीदना उनकी प्राथमिकता नहीं है। 2025 में राष्ट्रपति पद पर दोबारा काबिज होने के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने यह साफ कर दिया कि वह चाहते हैं कि यह बड़ी जमी हुई जमीन यूएस का हिस्सा बन जाए।

अब जरा इसकी भौगोलिक स्थिति का जिक्र करते हैं। मई से जुलाई के आखिर तक, ग्रीनलैंड में 24 घंटे दिन की रोशनी रहती है। ग्रीनलैंड का 80 प्रतिशत हिस्सा 1.6 मील गहरी बर्फ की परत के नीचे है। लगभग पूरा जमा हुआ आइलैंड रहने लायक नहीं है। आइलैंड की आबादी सिर्फ 60,000 है। इनमें से एक चौथाई लोग राजधानी नुउक में रहते हैं।

ग्रीनलैंड की प्राकृतिक संपदा भी ट्रंप की रुचि का बड़ा कारण मानी जाती है। यहां दुर्लभ खनिजों, तेल और गैस के बड़े भंडार होने की संभावना है। एक रिपोर्ट में कहा गया हैं कि यहां का चार लाख वर्ग किलोमीटर का इलाका जो बर्फ से ढका नहीं है उसमें 38 खनिजों के हल्के या भारी भंडार हैं। ये सभी आवश्यक मैटेरियल की यूरोपीय लिस्ट में शामिल हैं। रेयर अर्थ मिनरल्स आधुनिक तकनीक, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहनों और सैन्य उपकरणों के लिए बेहद जरूरी हैं।

यहां कॉपर, ग्रेफाइट, नियोबियम, टाइटेनियम और रोडियम के बड़े भंडार तो हैं ही। साथ ही रेयर अर्थ खनिज का भी अच्छा-खासा भंडार है। यह आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है, जो आने वाले दशकों में वैश्विक शक्ति संतुलन का नया केंद्र बनता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक की बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं।

ये भी पढ़ें- Iran Protest: ईरान के 50 शहरों में भारी विरोध-प्रदर्शन! सड़कों पर दिखा लोगों का हुजूम, इंटरनेट ब्लैकआउट, टेलीफोन सेवाएं भी ठप, 45 की मौत

इन रूट्स से एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच व्यापारिक दूरी कम हो सकती है। ऐसे में ग्रीनलैंड पर प्रभाव रखने वाला देश भविष्य के वैश्विक व्यापार और सैन्य गतिविधियों पर भी असर डाल सकता है। भौगोलिक रूप से यह नॉर्थ अमेरिका का हिस्सा है। अमेरिका पहले से ही ग्रीनलैंड में सैन्य रूप से मौजूद है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।