H-1B Visa News: भारतीयों को अमेरिकी कोर्ट से बड़ी राहत, एच-1बी वीजा पर ट्रंप की $100,000 फीस रद्द
H-1B Visa News: अमेरिकी की एक अदालत ने नए एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर की लगाने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कदम को खारिज कर दिया है। अमेरिका में भारतीय मूल के कई संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अदालत का ये फैसला राहत भरी है
H-1B Visa News: अमरीकी संघीय अदालत ने एच-1बी वीज़ा आवेदनों पर एक लाख डॉलर का शुल्क अवैध ठहराया है
H-1B Visa News: अमेरिका की एक अदालत ने एच-1बी वीजा आवेदनों पर लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को अवैध करार दिया है। अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसलों को रद्द कर दिया है। यह शुल्क राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के आदेश के तहत प्रस्तावित किया गया था। अदालत ने कहा कि कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की मंजूरी के बिना ऐसा शुल्क नहीं लगाया जा सकता।
अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के कई संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे एच-1बी वीजा से जुड़े लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही व्यवस्था में स्पष्टता बनी रहेगी। एच-1बी वीज़ा के जरिए अमरीकी कंपनियां दुनिया भर के कुशल पेशेवरों को नौकरी देती हैं।
जज ने क्या कहा?
ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1 बी वीजा के लिए 1 लाख डॉलर (लगभग 83 लाख रुपए) की अतिरिक्त फीस लगाने के फैसले को रद्द करने वाले एक जज ने कहा कि इस मामले का मुख्य मुद्दा इमिग्रेशन नीति नहीं, बल्कि यह था कि क्या राष्ट्रपति प्रशासन ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना नया टैक्स लगा दिया था। 42 पन्नों के अपने फैसले में अमेरिकी जिला जज लियो टी. सोरोकिन ने कहा कि एच-1 बी नीति वास्तव में एक अनधिकृत टैक्स थी और यह राष्ट्रपति को कानून द्वारा दी गई शक्तियों से बाहर थी।
उन्होंने आदेश में लिखा, "अदालत का मानना है कि यह नीति एच-1 बी याचिकाओं पर टैक्स लगाती है, जबकि इसके लिए कांग्रेस ने कोई अधिकार नहीं दिया है। एच-1 बी याचिकाओं पर 1 लाख डॉलर का टैक्स लगाने की अनुमति किसी कानून में नहीं है।" ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि यह शुल्क विदेशी नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की राष्ट्रपति की शक्ति का हिस्सा है लेकिन जज ने इस दलील को खारिज कर दिया।
ट्रंप की अपील खारिज
उन्होंने कहा कि जिन इमिग्रेशन कानूनों का हवाला दिया गया है, वे राष्ट्रपति को नया टैक्स लगाने का अधिकार नहीं देते। उन्होंने लिखा, "इन कानूनों को इस तरह नहीं पढ़ा जा सकता कि वे कांग्रेस की विशेष टैक्स लगाने की शक्ति राष्ट्रपति को सौंपते हों।" फैसले में बार-बार कहा गया कि राष्ट्रपति के पास इमिग्रेशन मामलों में व्यापक अधिकार होते हैं, लेकिन उनकी भी संवैधानिक सीमाएं हैं।"
जज ने कहा, "कार्यपालिका (एग्जीक्यूटिव) के पास विदेशी नागरिकों के प्रवेश और निष्कासन को लेकर व्यापक अधिकार हैं, लेकिन ये अधिकार असीमित नहीं हैं।" उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति की शक्तियां संविधान की सीमाओं या कांग्रेस द्वारा दिए गए अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकतीं। सरकार ने यह भी तर्क दिया था कि 1 लाख डॉलर की राशि टैक्स नहीं बल्कि इमिग्रेशन प्रतिबंध का हिस्सा है। इस पर जज ने साफ कहा, "टैक्स को प्रतिबंध नहीं कहा जा सकता।"
फैसले में अमेरिकी संविधान का भी उल्लेख किया गया, जिसमें टैक्स लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस को दिया गया है। जज ने कहा कि कांग्रेस कुछ मामलों में यह अधिकार सरकारी एजेंसियों को दे सकती है। लेकिन इसके लिए स्पष्ट कानूनी अनुमति होना जरूरी है। उन्होंने पाया कि जिन इमिग्रेशन कानूनों का हवाला दिया गया, वे राष्ट्रपति को नियम, प्रतिबंध और शर्तें लगाने की अनुमति तो देते हैं, लेकिन नया टैक्स बनाने की अनुमति नहीं देते।
जज ने यह भी कहा कि इस नीति को लागू करने वाली सरकारी एजेंसियां अपने कानूनी अधिकारों से आगे बढ़ गई थीं। संवैधानिक मुद्दों के अलावा, अदालत ने यह भी पाया कि एजेंसियों ने जरूरी नियम बनाने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया और न ही यह ठीक से समझाया कि नियोक्ताओं पर इतनी बड़ी अतिरिक्त लागत क्यों डाली जा रही है। अंत में अदालत ने इस नीति को अवैध घोषित करते हुए पूरे देश में इसे रद्द कर दिया।
क्या है H1B वीजा?
एच-1बी (H-1B) वीजा अमेरिका का एक अस्थायी (non-immigrant) कार्य वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशी पेशेवरों को विशेष कौशल वाली नौकरियों में नियुक्त करने की अनुमति देता है। यह आमतौर पर आईटी, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, डेटा साइंस, इंजीनियरिंग, फाइनेंस, मेडिकल और रिसर्च जैसे क्षेत्रों के लिए उपयोग किया जाता है।
H-1B वीज़ा की मुख्य बातें
अमेरिकी नियोक्ता (Employer) का स्पॉन्सर होना आवश्यक है।
नौकरी ऐसी होनी चाहिए जिसमें आमतौर पर बैचलर डिग्री या उससे अधिक योग्यता की आवश्यकता हो।
वीजा आमतौर पर 3 वर्ष के लिए मिलता है और इसे बढ़ाकर अधिकतम 6 वर्ष तक किया जा सकता है। कुछ मामलों में ग्रीन कार्ड प्रक्रिया चलने पर इससे अधिक विस्तार भी संभव है।
हर साल H-1B वीजा की संख्या सीमित होती है (सामान्यतः 65,000 + अमेरिकी मास्टर डिग्री धारकों के लिए 20,000 अतिरिक्त), इसलिए अक्सर लॉटरी प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
भारतीयों के लिए इसका महत्व क्या है?
भारत से बड़ी संख्या में पेशेवर H-1B वीजा पर अमेरिका में काम करते हैं। विशेष रूप से आईटी कंपनियां और टेक उद्योग इस वीजा का व्यापक उपयोग करते हैं। यदि किसी भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर को अमेरिका की किसी टेक कंपनी से नौकरी का ऑफर मिलता है, तो कंपनी उसके लिए H-1B वीज़ा आवेदन कर सकती है। आवेदन स्वीकृत होने पर वह इंजीनियर अमेरिका जाकर उस कंपनी के लिए काम कर सकता है।