INDIA Alliance Meeting: 'इंडिया' ब्लॉक की बैठक में ये नेता हुए शामिल, जानिए किन मुद्दों पर बनी सहमति

INDIA Alliance Meeting: 'इंडिया' ब्लॉक की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि इस मीटिंग में 25 राजनीतिक दल शामिल हुए। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई और सभी ने अपनी राय रखी

अपडेटेड Jun 09, 2026 पर 8:12 AM
INDIA Alliance Meeting: 'इंडिया' ब्लॉक की बैठक में 25 राजनीतिक दल शामिल हुए

INDIA Alliance Meeting: सोमवार (8 जून) दोपहर नई दिल्ली में विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में विपक्ष की कई पार्टियों के नेताओं ने हिस्सा लिया। मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि इस मीटिंग में 25 राजनीतिक दल शामिल हुए। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई और सभी ने अपनी राय रखी। बैठक में शामिल कई नेताओं ने पुराने गिले-शिकवे भूलकर, बड़ा दिल दिखाते हुए और एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) तथा मोदी सरकार को चुनौती देने का सुझाव दिया।

सूत्रों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने इस बात की जोरदार पैरवी की है कि गठबंधन में शामिल दलों को एक दूसरे की आलोचना करने से बचना चाहिए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद इस गठबंधन को लेकर उनके रुख में बड़ा बदलाव आया है। बैठक में ममता और कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात भी हुई।

सूत्रों ने बताया कि बैठक औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले ममता ने सोनिया गांधी से करीब 10 मिनट लंबी बातचीत की। कांग्रेस ने दोनों नेताओं की एक-दूसरे को गले लगाते हुए तस्वीर भी अपने सोशल मीडिया पर शेयर की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने तर्क दिया कि यदि विपक्षी दलों को बीजेपी और मोदी सरकार को सफलतापूर्वक चुनौती देनी है तो उनके बीच आपसी विश्वास और एकजुटता आवश्यक होगी।


बैठक में क्या-क्या हुआ?

बैठक में शामिल एक नेता ने पीटीआई को बताया, "राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस और 'इंडिया' के अन्य घटक एक तरफ हैं और दूसरी तरफ भाजपा-आरएसएस है। उन्होंने नागरिक समाज आंदोलनों के साथ अधिक जुड़ाव का भी आह्वान किया और आवश्यकता पड़ने पर गठबंधन के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में योगदान देने की इच्छा का संकेत दिया।" राहुल गांधी के बगल में बैठे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी गठबंधन के भीतर किसी तरह की कड़वाहट नहीं होने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सूत्रों के अनुसार, यादव ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को बड़ा दिल दिखाना चाहिए और अलग-अलग राज्यों में भाजपा के विरुद्ध खड़े सबसे मजबूत दल का समर्थन करना चाहिए। पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने तर्क दिया कि जो लोग मानते हैं कि ममता बनर्जी हार गई हैं, वे गलत हैं। बल्कि सच यह है कि संस्थागत कारणों ने इस परिणाम में भूमिका निभाई।

लगभग ढाई घंटे चली बैठक में शामिल एक सांसद ने बताया, "ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें 90 फीसदी यकीन है कि उनका जनादेश लूट लिया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने कहा कि वे 40 फीसदी आश्वस्त हैं। राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें 100 फीसदी यकीन है कि हाल के चुनावों में जनादेश चोरी हुआ है।"

RJD नेता तेजस्वी यादव ने तर्क दिया कि विपक्ष को तत्काल चुनावी मुकाबलों से आगे बढ़कर 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए व्यवस्थित रूप से तैयारी शुरू करने की जरूरत है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि गठबंधन को जमीन पर सक्रिय रहना चाहिए और BJP के खिलाफ निरंतर अभियान चलाना चाहिए।

बैठक में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए शिवसेना (UNT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गठबंधन सहयोगियों के बीच निरंतर बैठकों का प्रस्ताव रखा और तर्क दिया कि हाल के चुनावों से मुख्य सबक यह है कि बेहतर समन्वय की जरूरत है।

खड़गे ने बताया क्या है गठबंधन का प्लान?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को 'इंडिया' गठबंधन के घटक दलों का आह्वान किया कि वे मोदी सरकार द्वारा खड़ी की गई कथित चुनौतियों से निपटने के लिए उस एकजुटता की भावना को और मजबूत करें, जो इस साल 17 अप्रैल को महिला आरक्षण एवं परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ दिखी थी। उन्होंने विपक्षी गठबंधन की बैठक में दिए अपने शुरुआती संबोधन में यह दावा भी किया कि सरकार संविधान पर हमला जारी रखे हुए है।

खड़गे ने कहा, "यह गठबंधन ठीक तीन साल पहले अस्तित्व में आया था। हमारे सामने मौजूद मुद्दे आप सभी अच्छी तरह जानते हैं। हमने 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में अपनी एकजुटता और एकता को बहुत निर्णायक तरीके से दिखाया, जब हम सबने मजबूती से एकजुट होकर परिसीमन पर मोदी सरकार के दुर्भावनापूर्ण विधेयकों को परास्त किया।"

उनका कहना था, "अब हमें उसी भावना को और मजबूत करना है और आगे बढ़ाना है, ताकि मोदी सरकार के कुशासन के कारण देश के सामने खड़ी कई राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और विदेश नीति से जुड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सके।"

खड़गे ने दावा किया कि SIR के कारण करोड़ों लोगों से उनका मताधिकार छीना जा रहा है। संविधान पर हमला लगातार जारी है, जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने और डराने-धमकाने के औजार के रूप में लगातार किया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा, "गैर-भाजपा सरकारों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। जरूरी वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और आर्थिक माहौल बेहद नकारात्मक है। नई नौकरियां पैदा करने के लिए जिस रफ्तार से नए निवेश आने चाहिए, वे बिल्कुल उस रफ्तार से नहीं आ रहे हैं। कई क्षेत्रों में निजी एकाधिकार बढ़ रहा है और एमएसएमई का भविष्य गंभीर संकट में है।"

उन्होंने आरोप लगाया, "हमारी विदेश नीति के साथ पूरी तरह से समझौता किया गया है और उन पारंपरिक मूल्यों को कायम नहीं रखा गया है, जिनका भारत लंबे समय से पुरजोर समर्थन करता रहा है।" खड़गे ने आगे बताया कि इस बात पर सहमति बनी कि INDIA ब्लॉक की सभी पार्टियां हर दो महीने में बैठक करेंगी और अगली बैठक अगस्त में होगी। उन्होंने कहा कि अगली बैठक तेलंगाना के हैदराबाद में होगी।

इन 5 मुद्दों पर बनी सहमति

1. खड़गे ने बताया कि ये सहमति बनी कि SIR और मतदाता सूची में हेरफेर तथा चुनाव की निष्पक्षता के संबंध में भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र भेजा जाएगा। ये पत्र उन्हें जल्द ही सौंपा जाएगा।

2. लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाले अनेक गंभीर मुद्दों की स्थिति को देखते हुए ये सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि शिक्षा मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

3. वर्तमान में बढ़ती गंभीर आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, अत्याचार और किसानों के मुद्दों को हम उठाते रहेंगे।

4. INDIA गठबंधन के सभी दल हर दो महीने में बैठक करेंगे। हमारी अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में होगी।

5. मानसून सत्र के दौरान संसदीय समन्वय जारी रहेगा और हर सुबह नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी।

कौन-कौन सी पार्टियां हुईं शामिल?

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता उमर अब्दुल्ला, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की महबूबा मुफ्ती और NCP-SP की नेता सुप्रिया सुले शामिल थे।

इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले, सीपीएम के जॉन ब्रिटास, सीपीआई के डी. राजा और कुछ अन्य छोटे दलों के नेताओं ने भी बैठक में हिस्सा लिया। शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे बैठक में वर्चुअल मीडियम से इसमें शामिल हुए।

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वहीं, आम आदमी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) समेत विपक्ष की कुछ पार्टियों ने इस बैठक से दूरी बनाए रखी। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि बैठक में 25 राजनीतिक दल शामिल हुए। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई और सभी ने अपनी राय रखी।

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