बलूचिस्तान में एक साल के भीतर ही इतने लोग कहां गायब कर दिए गए! क्या पाकिस्तान खेल रहा खूनी खेल?

क्या पाकिस्तान बलूचिस्तान में कोई खूनी खेल खेल रहा है? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि यहां मानवाधिकारों से जुड़ी एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जो बड़ी चिंता की ओर इशारा कर रही है। HRCB की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में बलूचिस्तान के भीतर जबरन गुमशुदगी, हत्याओं के मामलों में बड़ा इजाफा हुआ है।

अपडेटेड Aug 19, 2026 पर 1:19 PM
बलूचिस्तान में बढ़ा ‘दमन’? मानवाधिकार रिपोर्ट में 1,482 जबरन गुमशुदगी का दावा

क्या पाकिस्तान बलूचिस्तान में कोई खूनी खेल खेल रहा है? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि यहां मानवाधिकारों से जुड़ी एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जो बड़ी चिंता की ओर इशारा कर रही है। ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (HRCB) की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में बलूचिस्तान के भीतर जबरन गुमशुदगी, हत्याओं और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के दमन के मामलों में बड़ा इजाफा हुआ है। एएनआई की एक रिपोर्ट में HRCB के हवाले से बताया गया है कि पिछले साल पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, गुप्तचर एजेंसियों और राज्य प्रायोजित स्थानीय मिलिशिया द्वारा बलूच आबादी पर गंभीर अत्याचार किए गए हैं। इससे लोकल लोगों के बीच असुरक्षा और अविश्वास का माहौल गहरा गया है।

एक साल में 1,482 लोग जबरन गायब, 79% का हुआ इजाफा

ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में पाकिस्तानी सेना, उसकी सीक्रेट एजेंसियों और समर्थित स्थानीय मिलिशिया ने मिलकर 1482 लोगों को जबरन गायब किया है। वर्ष 2024 से तुलना करें तो ऐसे मामलों में 79 फीसदी की भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है।


रिपोर्ट में साल 2025 के दौरान कुल 598 लोगों की हत्याओं को दर्ज किया गया है। ये भी पिछले साल के मुकाबले करीब 25 फीसदी अधिक है। इन कुल मौतों में से 325 मामले सीधे तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड की कार्रवाई के कारण हुए हैं।

मासूम बच्चे भी नहीं बचे: 108 बच्चे गायब, 29 की हुई हत्या

बलूचिस्तान में हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों का शिकार मासूम बच्चे भी बने हैं। HRCB की रिपोर्ट के मुताबिक 108 नाबालिग बच्चे साल 2025 में जबरन गुमशुदगी का शिकार बने हैं। दर्दनाक बात ये है कि 29 बच्चों की इस हिंसा और हत्याओं के दौरान मौत का भी आंकड़ा सामने आया है।

फ्रंटियर कोर (FC) बनी मुख्य गुनहगार

रिपोर्ट में पाकिस्तानी सुरक्षा बल फ्रंटियर कोर को बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और हत्याओं का मुख्य अपराधी बताया गया है। कुल दर्ज मामलों में से जबरन गुमशुदगी के 897 मामले सीधे तौर पर फ्रंटियर कोर से जुड़े हैं। 195 लोगों की हत्या का जिम्मेदार भी फ्रंटियर कोर को ही ठहराया गया है।

पत्रकारों, वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं हो रहा दमन

बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों, वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाया गया। वर्ष 2025 के दौरान इन सभी को कानूनी उत्पीड़न, अवैध गिरफ्तारियों और शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये तमाम मानवाधिकार उल्लंघन बड़े पैमाने पर चलाए गए सैन्य अभियानों, कम्युनिकेशन ब्लैकआउट्स और सभा करने की स्वतंत्रता पर लगे प्रतिबंधों के बीच हुए। इसके अलावा पाकिस्तान के आतंकवाद-रोधी कानूनों का गलत इस्तेमाल वैध राजनीतिक और मानवीय गतिविधियों को अपराध घोषित करने के लिए किया गया।

बलूचिस्तान में जबरन गायब किए गए कई लोग लंबी हिरासत में हैं तो कई अन्य कथित तौर पर टारगेट किलिंग का शिकार हो रहे हैं। इन घटनाओं ने स्थानीय आबादी के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के इस मुद्दे को पाकिस्तान की सबसे विवादास्पद और अनसुलझी मानवाधिकार चुनौतियों में से एक माना है। लापता लोगों के परिवार अपने प्रियजनों की जानकारी के लिए लगातार गुहार लगा रहे हैं लेकन उन्हें सुनने वाला कोई नहीं है।

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