जब टूटने की कगार पर थी अमेरिका-ईरान डील, तब शहबाज-मुनीर के 'सीक्रेट प्लान' से पलटी पूरी बाजी; पाकिस्तान के मास्टरस्ट्रोक से दुनिया हैरान!

Pakistan US Iran Peace Deal: शहबाज शरीफ ने देश की नेशनल असेंबली में उन राजों से पर्दा उठाया, जो अब तक पब्लिक की नजरों से दूर थे। उन्होंने माना कि बातचीत के अंतिम दौर में कई मौके ऐसे आए जब लगा कि दोनों देश फिर से युद्ध की आग में कूद जाएंगे और बातचीत पूरी तरह टूट जाएगी। लेकिन पर्दे के पीछे पाकिस्तान की सेना और सरकार ने जो गोटियां चलीं, उसने इस डील को मुकाम तक पहुंचा दिया

अपडेटेड Jun 16, 2026 पर 10:30 AM
इस असंभव सी दिखने वाली कूटनीतिक जीत के पीछे पाकिस्तान की बहुत बड़ी भूमिका रही है

How Pakistan Mediated US-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच 100 से अधिक दिनों तक चले घातक युद्ध को रोकने के लिए सोमवार को जिस शांति समझौते का ऐलान हुआ, उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। इस असंभव सी दिखने वाली कूटनीतिक जीत के पीछे पाकिस्तान की बहुत बड़ी भूमिका रही है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद देश की नेशनल असेंबली में उन राजों से पर्दा उठाया, जो अब तक पब्लिक की नजरों से दूर थे। शहबाज शरीफ ने माना कि बातचीत के अंतिम दौर में कई मौके ऐसे आए जब लगा कि दोनों देश फिर से युद्ध की आग में कूद जाएंगे और बातचीत पूरी तरह टूट जाएगी। लेकिन पर्दे के पीछे पाकिस्तान की सेना और सरकार ने जो गोटियां चलीं, उसने इस डील को मुकाम तक पहुंचा दिया।

आइए 'परत-दर-परत' पूरी टाइमलाइन और इनसाइड स्टोरी से समझते हैं कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता का यह खेल कैसे खेला:


पर्दे के पीछे के असली 'हीरो' रहे असीम मुनीर

शहबाज शरीफ ने संसद में साफ तौर पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर का नाम लिया। उन्होंने बताया कि जब भी बातचीत टूटने की कगार पर पहुंचती, असीम मुनीर कूटनीतिक कड़ियों को वापस जोड़ देते थे। शरीफ ने सांसदों से कहा, 'इस पूरे दौर में मुनीर दिन-रात जागते रहे। उन्होंने युद्ध की लपटों को बुझाने के लिए अपनी रातों की नींद कुर्बान कर दी'।

कई पल ऐसे थे जब बातचीत थमने वाली थी, लेकिन आर्मी चीफ ने हार नहीं मानी। अगर यह प्रयास जारी न रहता, तो शांति का सपना चकनाचूर हो जाता।

फरवरी से जून तक, कूटनीति की पूरी 'टाइमलाइन'

पाकिस्तान की यह राह आसान नहीं थी। डील की यह पूरी प्रक्रिया कई उतार-चढ़ाव से होकर गुजरी:

28 फरवरी 2024: युद्ध की शुरुआत

ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद इसी दिन अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध छिड़ गया था और ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बंद कर दिया था। ईरान की कमान नए सर्वोच्च नेता मोझतबा खामेनेई ने संभाली।

31 मार्च: चीन के साथ मिलकर 'पीस प्लान'

पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर एक साझा 5-पॉइंट पीस प्लान साइन किया। चीन को चिंता थी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से उसका तेल और गैस आयात ठप हो रहा था।

8 अप्रैल: सीजफायर और ट्रंप की डेडलाइन

आर्मी चीफ असीम मुनीर ने अमेरिकी अधिकारियों को लगातार कई फोन किए। ट्रंप द्वारा ईरान पर बड़े हमले की डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले पाकिस्तान एक अस्थायी सीजफायर कराने में कामयाब रहा। ट्रंप ने मुनीर और शहबाज शरीफ के 'व्यक्तिगत अनुरोध' पर इस सीजफायर को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया।

11-12 अप्रैल: इस्लामाबाद में डायरेक्ट टॉक

पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में दोनों देशों की गुप्त बातचीत होस्ट की। 1979 के बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच यह सबसे उच्च स्तरीय सीधी बातचीत थी, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल हुए। हालांकि, यह बैठक बिना किसी समझौते के खत्म हो गई।

मई: तेहरान का सीक्रेट दौरा

फेस-टू-फेस बातचीत बंद होने के बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच 'शटल कूटनीति' शुरू की। मई में असीम मुनीर और आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी खुद तेहरान गए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कई बार इस्लामाबाद का दौरा किया और कहा कि वे नतीजे आने तक पाकिस्तान के साथ जुड़े रहेंगे।

13-14 जून: कूटनीतिक तूफान

शनिवार तक पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार ने सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों से बात की। सऊदी अरब ने पाकिस्तान के इस प्रयास की खुलकर तारीफ की। शहबाज शरीफ ने कहा कि 'फाइनल ड्राफ्ट तैयार है और शांति बेहद करीब है'।

आखिरी 48 घंटे: जब लगा कि फिर छिड़ जाएगी जंग

रविवार को, यानी डील के ऐलान से कुछ घंटे पहले, इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर एक भीषण हवाई हमला कर दिया। इस हमले से तेहरान भड़क गया।

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया कि क्या अमेरिका के पास अपने वादों को लागू करने की 'इच्छा या क्षमता' है भी या नहीं। माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था और लग रहा था कि महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। लेकिन पर्दे के पीछे पाकिस्तान ने फिर से दोनों पक्षों को संभाला। इसके तुरंत बाद शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर डील की घोषणा की और मिनटों बाद डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस पर मुहर लगा दी।

इस 14-पॉइंट समझौते में क्या-क्या है?

ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस समझौते (MoU) के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

स्थायी सीजफायर: लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत और स्थायी रूप से बंद होंगे।

नाकेबंदी हटेगी: अमेरिका 30 दिनों के भीतर ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा और वहां से अपनी सेनाएं पीछे खींचेगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलेगा: व्यापारिक जहाजों के लिए यह महत्वपूर्ण जलमार्ग दोबारा खोल दिया जाएगा।

$24 बिलियन रिलीज होंगे: अगले 60 दिनों की बातचीत के दौरान ईरान के फ्रीज किए गए $24 बिलियन के एसेट्स चरणबद्ध तरीके से जारी किए जाएंगे। इसी दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा होगी।

मिसाइल प्रोग्राम पर राहत: ईरान के मिसाइल प्रोग्राम और सशस्त्र समूहों को उसके समर्थन के मुद्दे को फिलहाल के एजेंडे से हटा दिया गया है।

पाकिस्तान के लिए बड़ी कूटनीतिक साख

इस डील को पूरा कराने में कतर, सऊदी अरब, तुर्की और चीन ने भी पर्दे के पीछे से पाकिस्तान की मदद की। लेकिन मुख्य भूमिका इस्लामाबाद की ही रही। शहबाज शरीफ ने गर्व से सांसदों से कहा, 'दशकों से दुनिया के देश जिस सम्मान और कूटनीतिक साख की तलाश में थे, वह आज इस शांति प्रक्रिया के जरिए पाकिस्तान को हासिल हुई है'। अब इस समझौते पर शुक्रवार को जिनेवा में आधिकारिक हस्ताक्षर होने जा रहे हैं।

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