देश के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच 'मदर ऑफ ऑल डील' पर सहमति बनी। भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच कई क्षेत्रों में समझौते हुए। इस समझौते से जहां एक जगह भारत और यूरोप की बीच साझेदारी की एक नया चैप्टर शुरू हुआ है तो वहीं कई देशों की नींद भी उड़ गई है। पाकिस्ता भी उन्हीं देशों में शामिल है, जिसकी 'मदर ऑफ ऑल डील' से नींद उड़ी हुई है।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से पाकिस्तान में खलबली
भारत और यूरोपीय यूनियन के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) ने पाकिस्तान में खलबली मचा दी है। 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहे जा रहे इस समझौते से पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने और अर्थव्यवस्था को नुकसान होने का डर है।पाकिस्तान ने गुरुवार को कहा कि वह भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए हालिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के असर की समीक्षा कर रहा है।
पाकिस्तानी एक्सपोर्टर्स और एक्सपर्ट का मानना है कि भारत के इस समझौते से पाकिस्तान की स्थिति उसके दूसरे सबसे बड़े निर्यात बाजार में कमजोर हो सकती है। इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ में बिना टैक्स के बड़े स्तर पर सामान भेजने की सुविधा मिलेगी। पाकिस्तानी उद्योग संगठनों का कहना है कि इससे यूरोपीय संघ की GSP+ योजना के तहत पाकिस्तान को मिलने वाला पुराना फायदा खत्म हो सकता है। साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि इस्लामाबाद इस समझौते से पूरी तरह अवगत है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान यूरोपीय संघ के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। PTI के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से अच्छे और आपसी फायदे वाले रिश्ते रहे हैं।
पाक एक्सपोर्टर्स की उड़ी नींद
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को नरेंद्र मोदी ने 'मदर ऑफ ऑल डील' बताया है। वहीं, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि इस समझौते से करीब दो अरब लोगों का एक बड़ा फ्री ट्रेड ज़ोन बन गया है। पाकिस्तान के लिए चिंता की बात यह है कि इस समझौते के बाद भारत को यूरोपीय संघ में तुरंत ड्यूटी-फ्री एंट्री मिल गई है। इससे GSP+ के तहत पाकिस्तान को जो टैक्स में छूट मिलती थी, खासकर टेक्सटाइल और कपड़ों के सेक्टर में, वह फायदा लगभग खत्म हो सकता है।
पाकिस्तान टेक्सटाइल पर बड़ा खतरा
ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (APTMA) के चेयरमैन कामरान अरशद ने पाकिस्तानी अख़बार डॉन को बताया कि यूरोपीय संघ के 27 देश पाकिस्तान के कुल निर्यात का करीब 8.8 अरब डॉलर, यानी 27.2 प्रतिशत हिस्सा खरीदते हैं। इसके अलावा, हर साल पाकिस्तान के लगभग 7 अरब डॉलर के टेक्सटाइल उत्पाद भी EU देशों में जाते हैं, जो कुल टेक्सटाइल निर्यात का करीब 39 प्रतिशत है। अरशद ने कहा कि भारत को अब अपने 100 प्रतिशत टेक्सटाइल और कपड़ों पर यूरोपीय संघ में बिना टैक्स के पहुंच मिल गई है। इससे बाज़ार में प्रतिस्पर्धा का संतुलन पूरी तरह बदल सकता है और पाकिस्तान के निर्यातकों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
GSP+ के तहत पाकिस्तान को यूरोपीय संघ की करीब 66 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर बिना टैक्स के निर्यात की सुविधा मिलती है। वहीं, पहले भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों पर EU में 12 प्रतिशत तक टैरिफ लगता था। लेकिन अब फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद यह स्थिति बदल रही है। टॉपलाइन सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड शंकर तलरेजा ने कहा कि FTA लागू होने के बाद पाकिस्तान को जो थोड़ा-बहुत प्रतिस्पर्धी फायदा पहले मिलता था, वह भी खत्म होने का खतरा है। उन्होंने यह भी बताया कि देश में प्रोडक्शन की ऊंची लागत इस समस्या को और गंभीर बना रही है।
JS ग्लोबल कैपिटल के विश्लेषक मुहम्मद वकास गनी ने कहा कि भारत में ज़्यादा वैल्यू एडिशन और मज़बूत उत्पादन व्यवस्था है। इससे यूरोपीय संघ के बाज़ार में भारत की प्रतिस्पर्धा और मजबूत हो जाएगी। उद्योग से जुड़े लोगों ने भी ऐसी ही चिंता जताई है। इंटरलूप होल्डिंग्स के चेयरमैन मुसादक ज़ुल्कर्नैन ने कहा कि ऊँची ऊर्जा लागत इस सेक्टर की सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने अरब न्यूज़ से कहा, “असली दिक्कत प्रोडक्शन की लागत है। यहां बिजली का टैरिफ आसपास के देशों की तुलना में 25 से 30 प्रतिशत तक ज़्यादा है।”