Travel Advisory for Iran: भारत ने सोमवार (5 जनवरी) को अपने नागरिकों के लिए एक ट्रैवल एडवाइजरी जारी की। इसमें उन्हें अगली सूचना तक ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी गई है। ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत ने यह एडवाइजरी जारी की है। नई दिल्ली ने अपने नागरिकों से राजधानी तेहरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील की। बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी को लेकर ईरान में युवाओं का विरोध प्रदर्शन बीते एक सप्ताह से चल रहा है।
एडवाइजरी के अनुसार, "नागरिकों को अगली सूचना तक ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।" ट्रैवल एडवाइजरी में कहा गया है, "ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों और PIO को सावधानी बरतनी चाहिए। विरोध प्रदर्शन या प्रोटेस्ट वाली जगहों से बचना चाहिए। खबरों के साथ-साथ तेहरान में भारतीय दूतावास की वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल पर भी नजर रखनी चाहिए।"
इसमें यह भी कहा गया है कि ईरान में रेजिडेंट-वीजा पर रहने वाले भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि अगर उन्होंने अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, तो भारतीय दूतावास में रजिस्ट्रेशन करवा लें। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स इन ईरान (HRAI) के अनुसार, एक मानवाधिकार समूह ने बताया कि ईरान में एक हफ्ते के प्रदर्शन के दौरान 990 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस फायरिंग में 20 लोगों की मौत
जबकि इस हिंसक विरोध प्रदर्शन में कम से कम 20 लोग मारे जा चुके हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कई बार हिंसक झड़पें हुई। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ Gen-Z का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिल रहा है। बढ़ती महंगाई को लेकर बीते 10 दिनों से जारी जेन-जी के विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है।
ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, तेहरान से लगभग 300 किलोमीटर (185 मील) दक्षिण-पश्चिम में लोरेस्टन प्रांत के अजना शहर में हुए विरोध प्रदर्शनों में कम से कम तीन लोग मारे गए और 17 अन्य घायल हो गए। विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे लगाए। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में सड़क पर आगजनी दिखाई दी।
फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि तेहरान से लगभग 470 किलोमीटर दक्षिण में चहारमहल और बख्तियारी प्रांत में लॉर्डेगन शहर में विरोध प्रदर्शन के दौरान दो लोग मारे गए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने शहर की सरकारी इमारतों पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। युवा प्रदर्शनकारियों ने उस इलाके के गवर्नर ऑफिस, मस्जिद, मार्टर्स फाउंडेशन, टाउन हॉल और बैंक की बिल्डिंगों पर पत्थर फेंके।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के करीब 21 राज्यों तक यह हिंसक विरोध की आंच पहुंच चुकी है। 2022 के बाद इसे ईरान में अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन बताया जा रहा है। इस विरोध प्रदर्शन का सबसे बड़ा कारण आर्थिक संकट है। करेंसी की वैल्यू लगातार गिरती जा रही है।
ईरान में लोगों के पास रोजगार नहीं है। इसकी वजह से जनता में भारी आक्रोश है। वैसे तो ईरान में धार्मिक मुद्दों को लेकर कई बार प्रदर्शन देखने को मिला है। लेकिन इस बार यह विरोध ईरान के सुप्रीम लीडर के खिलाफ आर्थिक मुद्दों को लेकर हो रहा है। ईरान में महंगाई की दर 42.2 फीसदी हो गई है। खासतौर से खाद्य पदार्थों की कीमत में 72 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस विरोध-प्रदर्शन में मारे गए लोगों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। ट्रूथ सोशल पर राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा, "अगर ईरान शांति से प्रदर्शन करने वालों पर गोली चलाता है और उन्हें बुरी तरह मारता है, जो उनका रिवाज है... तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा और आगे बढ़ने के लिए तैयार है। इस मामले पर ध्यान देने के लिए आपका धन्यवाद।"
ईरानी अधिकारियों ने देश के अंदरूनी मामलों में अमेरिका के दखल के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अमेरिकी दखल से पूरे इलाके में गड़बड़ी होगी। साथ ही अमेरिकी हितों का नुकसान होगा। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के करीबी सलाहकार अली शमखानी ने ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा को रेड लाइन बताया।