India-Nepal Border Dispute: नेपाल सरकार ने भारत के साथ सीमा से जुड़े मुद्दों पर प्रधानमंत्री बालेन शाह के हालिया बयानों को लेकर मचे विवाद को शांत करने की कोशिश की है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में कहा कि काठमांडू द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सीमा से जुड़े सभी मामलों को सुलझाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का समर्थन नहीं करता है। यह सफाई विपक्षी दलों की बढ़ती आलोचना के बीच आया है। विपक्ष ने प्रधानमंत्री शाह पर ऐसे बयान देने का आरोप लगाया है जिनका मतलब यह निकाला जा सकता है कि वे नेपाल-भारत सीमा वार्ता में बाहरी दखल को बढ़ावा दे रहे हैं।
इस मुद्दे के कारण संसद में विरोध-प्रदर्शन हुए हैं और विपक्षी सांसदों ने शाह के इस्तीफे की मांग की है। इसके बाद शिशिर खनाल ने बुधवार 10 जून को संसद को बताया कि नेपाल और भारत के बीच सीमा-पार कब्जे के मुद्दे को सुलझाने के लिए एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप काम करेगा। उन्होंने इस विषय पर प्रधानमंत्री बालेन शाह की टिप्पणियों को स्पष्ट करने का प्रयास किया।
खनाल ने कहा कि बॉर्डर मैनेजमेंट पर नेपाल-भारत जॉइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) की अगली बैठक अगस्त में भारत में होगी। उन्होंने यह जानकारी तब दी, जब विपक्षी सांसदों ने इस मामले पर प्रधानमंत्री शाह से स्पष्टीकरण की मांग करते हुए कई बार प्रतिनिधि सभा में हंगामा किया।
बालेन शाह ने क्या कहा था?
पिछले महीने नेपाल की संसद में प्रधानमंत्री बालेन शाह के इस बयान से बड़ा विवाद खड़ा हो गया था कि नेपाल ने भी अलग-अलग जगहों पर भारतीय इलाकों पर कब्जा किया है। बयान में यह भी कहा था कि इस मुद्दे को सुलझाने के लिए हिमालयी देश ने चीन और ब्रिटेन से बात की है। नई दिल्ली ने इस विवाद को सुलझाने में किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को साफ तौर पर खारिज किया है।
खनाल ने साफ किया कि तकनीकी टीमों ने दिखाया है कि ऐसी जगहें हैं जहां नेपाली पक्ष जिस जमीन पर कंट्रोल करके उसका इस्तेमाल कर रहा है, वह असल में भारतीय इलाके में हो सकती है। जबकि भारतीय पक्ष जिस जमीन पर नियंत्रण करके उसका इस्तेमाल कर रहा है, वह असल में नेपाली इलाके में हो सकती है।
विदेश मंत्री ने कहा, "प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह का बयान इन्हीं तकनीकी तथ्यों से जुड़ा था। जब उन्होंने सीमा से जुड़े मुद्दों पर बात की, तो वह सीमा-पार कब्जे का जिक्र कर रहे थे।" विदेश मंत्री खनाल ने कहा कि नेपाल-भारत सीमावर्ती इलाकों में गायब हो चुके सीमा स्तंभों को फिर से लगाने, साथ ही उनके रखरखाव और पुनर्निर्माण का काम तेजी से जारी है।
उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत दोनों ही इस मुद्दे को सुलझाने के लिए संवेदनशीलता के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सीमा क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए दोनों देशों के बीच सीमा के मानचित्रण का काम जारी है। खनाल ने कहा कि मानचित्रण का काम पूरा होने के बाद सीमा क्षेत्र से जुड़ी डिटेल्स जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।