Ipsos Report: दुनिया भर में छाई आर्थिक अनिश्चितता और युद्ध के बीच भारत एक 'ब्राइट स्पॉट' बनकर उभरा है। इप्सोस (Ipsos) की लेटेस्ट रिपोर्ट 'वॉट वरीज द वर्ल्ड' (What Worries the World) के अनुसार, जहां दुनिया के अधिकांश देश निराशा और मंदी की आशंका से घिरे हैं, वहीं भारतीयों का अपने देश की दिशा पर भरोसा कायम है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और एनर्जी मार्केट को तहस-नहस करके रख दिया है।
दुनिया से उलट भारत में 'पॉजिटिव' माहौल
इप्सोस ने दुनिया के 29 देशों में सर्वे किया, जिसके नतीजे चौंकाने वाले हैं। 'वॉट वरीज द वर्ल्ड' सर्वे में शामिल 29 में से 25 देशों के नागरिकों का मानना है कि उनका देश 'गलत दिशा' में जा रहा है। फ्रांस और पेरू जैसे देशों में निराशा का स्तर सबसे ज्यादा दर्ज किया गया। वहीं भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां के लोग मानते हैं कि देश 'सही रास्ते' पर है। भारत के साथ-साथ सिंगापुर, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भी पॉजिटिविटी देखी गई है।
भारत की मजबूती के पीछे क्या है वजह?
इप्सोस इंडिया के सीईओ सुरेश रामलिंगम ने भारत के इस लचीलेपन के पीछे तटस्थ भू-राजनीतिक रुख, ऊर्जा सुरक्षा के प्रयास और घरेलू नीतियों को बताया है। उनका मानना है कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत ने एक संतुलित और तटस्थ रुख अपनाया है, जिससे उसे वैश्विक तनाव के सीधे असर से बचने में मदद मिली है। वाहन ईंधन संकट से निपटने के लिए भारत ने सक्रिय कदम उठाए हैं और तेल आयात के स्रोतों का विविधीकरण किया है, ताकि सप्लाई रुकने का जोखिम कम हो सके। और वैश्विक उथल-पुथल के बीच सरकार के प्रो-एक्टिव फैसलों ने जनता के भरोसे को बनाए रखा है।
भले ही कुल मिलाकर भारतीय आशावादी हैं, लेकिन रिपोर्ट में कुछ घरेलू चुनौतियों का भी जिक्र किया गया है:
महंगाई और बेरोजगारी: वैश्विक स्तर पर बढ़ते ऊर्जा खर्च और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण महंगाई और नौकरियों को लेकर चिंता बनी हुई है।
शिक्षा और अपराध: शिक्षा की गुणवत्ता और अपराध व हिंसा को लेकर भी जनता ने अपनी फिक्र जाहिर की है।
भ्रष्टाचार: भ्रष्टाचार अभी भी भारतीयों की प्रमुख चिंताओं की सूची में शामिल है।
अमेरिका और अन्य देशों का हाल
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका समेत कई विकसित अर्थव्यवस्थाएं इस समय महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव से जूझ रही हैं। भारत के विपरीत, इन देशों में जनता का मूड काफी हद तक नकारात्मक है, जिसका मुख्य कारण लंबे समय से चल रहे युद्ध और आर्थिक अस्थिरता है।