ईरान को लेकर आ गया सबसे बड़ा अपडेट! ट्रंप की ये शर्त मानने को तैयार हुआ तेहरान; अब तो डील हो गई फाइनल...

Iran US Nuclear Deal: रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की सबसे बड़ी और सख्त शर्त मान ली है। यह डील अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने की दिशा में एक 'बड़ा ब्रेकथ्रू' मानी जा रही है। जानिए इस ऐतिहासिक समझौते की पूरी डिटेल

अपडेटेड May 24, 2026 पर 10:55 AM
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अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान के पास मौजूद यूरेनियम कई परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त था

Iran-US Deal: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को लेकर एक बड़ी अपडेट सामने आई है। बातचीत के बीच आखिरकार एक बड़ी कामयाबी मिली है! मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की सबसे बड़ी और सख्त शर्त मान ली है। यह डील अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने की दिशा में एक 'बड़ा ब्रेकथ्रू' मानी जा रही है। जानिए इस ऐतिहासिक समझौते की पूरी डिटेल।

ट्रंप की कौन-सी शर्त मानने को तैयार हुआ ईरान?

न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के साथ बन रहे इस नए समझौते के तहत ईरान अपने 'अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम' के पूरे भंडार को छोड़ने के लिए राजी हो गया है।


अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान के पास मौजूद यह यूरेनियम कई परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त था। ईरान ने एक लिखित बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि वह अपने यूरेनियम के भंडार को त्याग देगा।

'न्यूक्लियर डस्ट' बना था समझौते में अड़चन 

ईरान के पास मौजूद यूरेनियम का यह भंडार बातचीत में सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार इसे 'न्यूक्लियर डस्ट' कहकर संबोधित करते थे और उनका मुख्य उद्देश्य ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था।

रिपोर्ट के मुताबिक, दो अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान यूरेनियम का भंडार छोड़ने के लिए 'राजी हो गया है। हालांकि, इस यूरेनियम को कैसे खत्म किया जाएगा या इसे किस देश में ट्रांसफर किया जाएगा, इस पर भविष्य की बैठकों में चर्चा होगी।

'नहीं माने तो फिर होगी सैन्य कार्रवाई'

यह समझौता आसान नहीं था। अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि अगर सीजफायर की बातचीत आगे बढ़ने के बावजूद वह यूरेनियम के मुद्दे पर समझौता नहीं करता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य हमले शुरू कर सकता है। इस दबाव के बाद ईरान झुकने को तैयार हुआ।

तीन चरणों में लागू हो सकती है यह मेगा-डील

रॉयटर्स के मुताबिक, इस समझौते का फ्रेमवर्क तीन चरणों में लागू हो सकता है:

पहला चरण: युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करना।

दूसरा चरण: स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के संकट को हल करना।

तीसरा चरण: एक व्यापक समझौते के लिए 30 दिनों की बातचीत का दौर शुरू करना।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को फिर से खोला जा सकता है, जिससे ईरान स्वतंत्र रूप से तेल बेच पाएगा, और बदले में उसके परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत जारी रहेगी।

'डील हो गई है, बस अंतिम डिटेल्स बाकी'

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस समझौते का श्रेय लेते हुए कहा कि यह 'काफी हद तक बातचीत' के बाद तैयार हुआ है और अंतिम डिटेल्स पर चर्चा चल रही है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस समझौते से स्ट्रैट ऑफ होर्मुज भी खुलेगा, जो युद्ध के कारण बंद था।

समझौते की पुष्टि, लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं

हालांकि, ईरान ने ट्रंप के कुछ दावों विशेष रूप से स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को खोलने के तरीके को 'झूठ' बताया है, लेकिन समझौते की बात को खारिज नहीं किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि 'विवादों को कम करने की दिशा में प्रगति हुई है, लेकिन अभी भी कुछ मुद्दों पर चर्चा बाकी है'।

वैसे यह समझौता अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से चल रहे परमाणु विवाद को सुलझाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। इससे न केवल क्षेत्रीय युद्ध का खतरा टल सकता है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार को भी बड़ी राहत मिल सकती है, क्योंकि स्ट्रैट ऑफ होर्मुज फिर से खुल जाएगा।

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