Iran Vs Israel: मिसाइल से टैंक तक... कौन है वेस्ट एशिया की असली सुपरपावर?
Israel Iran War: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान इजरायल के "अस्तित्व" के लिए खतरा बन चुका है। ईरान के सरकारी मीडिया का दावा है कि इस हमले में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख हुसैन सलामी मारे गए हैं। बढ़ते तनाव के बीच, एक नजर डालते हैं दोनों देशों की सैन्य और तकनीकी ताकत पर जानते हैं कि कौन कितना शक्तिशाली है
Iran Vs Israel: मिसाइल से टैंक तक... कौन है वेस्ट एशिया की असली सुपरपावर? (IMAGE-AI)
13 जून की सुबह इजरायल ने ईरान के कई न्यूक्लियर और मिलिट्री ठिकानों पर हमला कर दिया। तेहरान समेत कई शहरों में धमाकों की खबरें हैं। इजरायल का कहना है कि वह इस "खतरे को जड़ से मिटाने" के लिए ऑपरेशन "Rising Lion" चला रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान इजरायल के "अस्तित्व" के लिए खतरा बन चुका है। ईरान के सरकारी मीडिया का दावा है कि इस हमले में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख हुसैन सलामी मारे गए हैं।
रिहायशी इलाकों पर भी बमबारी हुई, जिसमें बच्चों की मौत की खबर भी है। यह हमला ईरान-इराक युद्ध (1980 के दशक) के बाद अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है – "खून के बदले खून", यानी जवाबी हमला तय है। इससे पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध की संभावना और बढ़ गई है।
इजरायल के मुख्य सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने शुक्रवार को कहा कि इजरायल ने पिछले कुछ घंटों में ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई में दागे गए 100 से ज्यादा ड्रोन को रोका है। उन्होंने कहा, "करीब 200 इजरायली लड़ाकू विमानों ने इस अभियान में हिस्सा लिया और करीब 100 ठिकानों पर हमला किया।" उन्होंने आगे कहा, "हमले जारी हैं।"
बढ़ते तनाव के बीच, एक नजर डालते हैं दोनों देशों की सैन्य और तकनीकी ताकत पर जानते हैं कि कौन कितना शक्तिशाली है। ईरान और इजरायल की सेनाओं की तुलना करने से पता चलता है कि जनशक्ति के मामले में तेहरान यहूदी राष्ट्र से बेहतर है।
ईरान इजरायल में किसके पास कितनी सेना?
ईरान की जनसंख्या इजरायल से दस गुना ज्यादा है। ग्लोबल फायरपावर के 2024 इंडेक्स के अनुसार, ईरान की जनसंख्या 8,75,90,873 थी। इसकी तुलना इजरायल से करें, जिसकी जनसंख्या 90,43,387 है। इसका मतलब है कि ईरान में लोगों का एक बड़ा ग्रुप है, जिसमें से लोगों का सेना के लिए चुनाव किया जा सकता है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरानी सशस्त्र बल पश्चिम एशिया रीजन में सबसे बड़ी सेनाओं में से हैं, जिनमें कम से कम 5,80,000 एक्टिव-ड्यूटी कर्मी और लगभग 200,000 प्रशिक्षित रिजर्व सैनिक हैं, जो रेगुलर आर्मी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के बीच में बंटे हैं।
इसकी तुलना इजरायल से करें, जिसके पास सेना, नौसेना और अर्धसैनिक बलों में 1,69,500 एक्टिव सैन्यकर्मी हैं। इसके अलावा 4,65,000 इसकी रिजर्व फोर्स हैं, जबकि 8,000 अर्धसैनिक बल हैं।
हालांकि, जब रक्षा खर्च की बात आती है तो इजरायल ईरान से आगे निकल जाता है। ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स से पता चलता है कि इजरायल का रक्षा बजट 24 बिलियन डॉलर है, जबकि ईरान का 9.95 बिलियन डॉलर है।
ईरान इजरायल में किसका कितन रक्षा बजट?
हालांकि, जब रक्षा खर्च की बात आती है, तो इजरायल ईरान से आगे निकल जाता है। ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स से पता चलता है कि इजरायल का रक्षा बजट 24 अरब डॉलर है, जबकि ईरान का 9.95 अरब डॉलर है।
हालांकि, वाशिंगटन के फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज (FDD) के अनुसार, ईरान की सैन्य ताकत, खासतौर से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC), अपनी फंडिंग के लिए केवल सरकारी रक्षा बजट पर निर्भर नहीं है।
FDD ने बताया, "सेना तेहरान स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों की मार्केट वेल्यू का (पांचवां हिस्सा) कंट्रोल करता है और हजारों दूसरी कंपनियों की मालिक है, जो सभी सशस्त्र बलों के लिए रेवेन्यू पैद करते हैं। इसके अलावा, IRGC ईरान की अंडरग्राउंड अर्थव्यवस्था के एक अहम हिस्से को नियंत्रित करता है।”
हथियारों के मामले में इजरायल ईरान से आगे
भले ही ईरान सैन्य संख्या के मामले में इजरायल से आगे निकल सकता है, लेकिन हथियारों के मामले में तेल अवीव बढ़त रखता है। उदाहरण के लिए, इजरायल के पास तेहरान से ज्यादा हवाई शक्ति है।
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स से पता चलता है कि इजरायल के पास कुल 612 विमान हैं, जबकि ईरान के पास 551 हैं। ध्यान देने वाली एक अहम बात यह है कि इजरायल की वायु सेना में F-15s, F-16s और F-35s जैसे सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान शामिल हैं। लेकिन ईरान के पास ऐसा कुछ नहीं है।
इजरायल के पास सबसे प्रसिद्ध मल्टी लेवल एयर डिफेंस सिस्टम भी है, जिसमें आयरन डोम, डेविड स्लिंग, एरो और पैट्रियट शामिल हैं।
ईरना के पास मिसाइलों का जखीरा
हालांकि, ईरान का मिसाइल भंडार बहुत बड़ा है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज ने रिपोर्ट दी है कि ईरान के पास पश्चिम एशिया में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का सबसे बड़ा जखीरा है, जिसमें क्रूज मिसाइलें और एंटी-शिप मिसाइलें शामिल हैं। साथ ही 2,000 किलोमीटर तक की रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइलें भी शामिल हैं। इनमें इजरायल सहित किसी भी लक्ष्य को भेदने की क्षमता और रेंज है।
वास्तव में, ईरान ने अपनी सैन्य परेड के दौरान ड्रोन और मिसाइलों के अपने जखीरे को प्रदर्शित करते हुए, इस निर्माण को कोई रहस्य नहीं बनाया है, और वो ड्रोन एक्सपोर्ट बिजनेस में भी है। ईरान के ड्रोन का इस्तेमाल रूस, यूक्रेन में कर रहा है और सूडान में संघर्ष में भी सामने आया है।
जमीनी ताकत की बात करें, तो इजरायल के पास 1,370 टैंक हैं, जबकि ईरान के पास 1,996 हैं। हालांकि, इजरायल से ज्यादा टैंक होने का मतलब यह नहीं है कि सैन्य ताकत में इजाफा होगा।
इसके अलावा, यहूदी राष्ट्र के पास अपने शस्त्रागार में ज्यादा एडवांस टैंक हैं, जैसे कि मर्कवा टैंक, जिन्हें दुनिया में सबसे बेहतरीन डिजाइन वाले और भारी बख्तरबंद टैंकों में से एक माना जाता है।
नेवी पावर में दोनों ही देश पीछे
ईरान और इजरायल में से किसी के पास नौसेना की बहुत ज्यादा ताकन नहीं है। हालांकि, ईरान को छोटी नावों से हमला करने की अपनी क्षमता के लिए जाना जाता है। ग्लोबल फायरपावर के अनुसार, तेहरान के बेड़े की ताकत 67 है और इजरायल की 101 है। इसके अलावा, इसके पास 19 पनडुब्बियां हैं, जबकि इजरायल के पास पांच हैं।
परमाणु शक्ति के मामले में इजरायल सबसे आगे है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की पिछली रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के पास लगभग 80 परमाणु हथियार हैं।
इनमें से लगभग 30 ग्रेविटी बम हैं, जिन्हें विमान से फायर किया जा सकता। बाकी 50 हथियार Jericho II मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से दागे जाने वाले हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि वे अपने मोबाइल लांचर के साथ यरुशलम के पूर्व में एक सैन्य अड्डे की सुंरग में हैं।
ईरान की प्रॉक्सी पावर
ईरान की सैन्य ताकतों में से एक सबसे बड़ी ताकत उसका जटिल सैन्य तंत्र है। असल में, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के विरोधी, खासतौर से अमेरिका और इजरायल, दशकों से ईरान पर सीधे सैन्य हमले करने से बचते रहे हैं, क्योंकि वे उससे उलझना नहीं चाहते हैं।
नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में नेशनल सिक्योरिटी मामलों की एसोसिएट प्रोफेसर और ईरान की सेना की विशेषज्ञ अफशोन ओस्टोवर ने अमेरिकी न्यूज आउटलेट को बताया, "ईरान पर हमला न होने का एक कारण है। ऐसा नहीं है कि ईरान के विरोधी ईरान से डरते हैं। बल्कि उन्हें एहसास है कि ईरान के खिलाफ कोई भी युद्ध बहुत गंभीर युद्ध हो सकता है।"
ईरान पूरे पश्चिम एशिया में प्रॉक्सी मिलिशिया के एक नेटवर्क को हथियार, ट्रोनिंग और सपोर्ट देता है, जिसे "प्रतिरोध की धुरी" के रूप में जाना जाता है। इन मिलिशिया में लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हौथी, सीरिया और इराक में मिलिशिया गुट और गाजा में हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद शामिल हैं।
ईरान की सबसे बड़ी ढाल हैं ये लड़ाकू गुट
हालांकि, उन्हें ईरान की सशस्त्र सेनाओं का हिस्सा नहीं माना जाता है, लेकिन वे युद्ध के लिए तैयार हैं, भारी हथियारों से लैस हैं और ईरान के प्रति पूरी तरह वफादार हैं और हमला होने पर तेहरान की सहायता के लिए भी आ सकते हैं।
ब्रूकिंग्स फॉरेन पॉलिसी की उपाध्यक्ष और डायरेक्टर सुजैन मैलोनी ने कहा, "ईरानी की सबसे बड़ी ताकतों से एक मिलिशिया का नेटवर्क है जिसे उसके नेतृत्व ने तैयार किया, ट्रेनिंग और एडवांस हथियार दिए हैं। यह नेटवर्क लेबनान से लेकर पाकिस्तान तक करीब पूरे मध्य पूर्व में फैला हुआ है, और ये प्रॉक्सी तेहरान की सुरक्षा की एक बड़ी ढाल साबित हुए हैं।"
फिलहाल इजरायल के इस कदम से आने वाले समय में क्या होगा ये कहना मुश्किल है। लेकिन तब तक, दुनिया की सांसें थम सी गई हैं, क्योंकि पश्चिम एशिया पर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं।