Iran-Israel War: इधर अमेरिका का ईरान पर हमला उधर मुश्किल में घिरा पाकिस्तान, ठंडी पड़ी इस्लामिक भाईचारे की गुहार

Iran-Israel War: कुछ समय पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ईरान के समर्थन में खुलकर बयान दिया था। उन्होंने कहा, “ईरानी हमारे भाई हैं और हम इस मुश्किल समय में पूरी मजबूती से उनके साथ खड़े हैं। हम उनके हितों की रक्षा करेंगे।” आसिफ ने यह भी कहा कि इस समय मुस्लिम देशों की एकता बेहद जरूरी है

अपडेटेड Jun 22, 2025 पर 2:56 PM
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ईरान और इजरायल के जंग के बीच अब अमेरिका भी कूद पड़ा है।

Iran-Israel War:  ईरान और इजरायल के जंग के बीच अब अमेरिका भी कूद पड़ा है। अमेरिका ने ईरान पर शनिवार की देर रात को हमला किया और उसके 3 न्यूक्लियर साइट पर बम दागे हैं। वहीं इस हमले के बाद ईरान के साथ इस्लामिक भाईचारे की गुहार और झूठी हुंकार भरने वाला पाकिस्तान ने नपा-तुला बयान दिया है। अब पाकिस्तान ने ईरान पर अमेरिका के हमले की निंदा की है। पाकिस्तान ने कहा है कि अमेरिका का यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला गलत है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन पहले ही पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “पाकिस्तान, ईरान के न्यूक्लियर साइट पर अमेरिका द्वारा किए गए हमलों की निंदा करता है। ये हमले इजरायल के हमलों की एक कड़ी के बाद हुए हैं। हमें इस पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की गहरी चिंता है।”

ईरान के साथ दोस्ती का दिखावा


पाकिस्तान ने सभी पक्षों से संघर्ष रोकने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। पाकिस्तान ने कहा है कि नागरिकों की जान और संपत्ति का सम्मान किया जाना चाहिए और सभी पक्षों को संघर्ष को तुरंत समाप्त करने के लिए कदम उठाने चाहिए। बयान में जोर देकर कहा गया है कि, “सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून, का पालन करना चाहिए। क्षेत्र में संकटों का हल केवल संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप बातचीत और कूटनीति से ही संभव है।”

वहीं अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले ने पाकिस्तान को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है, क्योंकि कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था। यह नामांकन भारत-पाकिस्तान संकट (2025) के दौरान उनके "कूटनीतिक प्रयासों और नेतृत्व" को मान्यता देते हुए किया गया था। हालांकि, रविवार को ट्रंप ने पाकिस्तान के करीबी सहयोगी ईरान पर हमला करने का फैसला लिया, जिससे पाकिस्तान की स्थिति असहज हो गई।

मुश्किल में घिरा पाकिस्तान

बता दें कि ईरान और पाकिस्तान एक-दूसरे के करीबी सहयोगी हैं। दोनों देश सीमा, इस्लामी विरासत और ऐतिहासिक व्यापार मार्गों को साझा करते हैं। कुछ समय पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ईरान के समर्थन में खुलकर बयान दिया था। उन्होंने कहा, “ईरानी हमारे भाई हैं और हम इस मुश्किल समय में पूरी मजबूती से उनके साथ खड़े हैं। हम उनके हितों की रक्षा करेंगे।” आसिफ ने यह भी कहा कि इस समय मुस्लिम देशों की एकता बेहद जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इज़राइल केवल ईरान को ही नहीं, बल्कि यमन और फिलिस्तीन को भी निशाना बना रहा है। ऐसे में सभी मुस्लिम देशों को मिलकर एकजुट होना चाहिए।

ईरान की तरह पाकिस्तान भी इजरायल का मुखर विरोधी है और वह गाज़ा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इज़रायली कार्रवाई का खुलकर विरोध करता है। हाल ही में दोनों देशों के बीच सीमा पार हमलों के बाद तनाव बढ़ा था। इन हमलों को दोनों पक्षों ने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने की कार्रवाई बताया था। इसके बाद कई उच्च स्तरीय दौरे और सुरक्षा वार्ताएं भी हुईं।

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