Iran Strait of Hormuz Law: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक नए चरम पर पहुंच गया है। ईरान के संसद के डिप्टी स्पीकर हमीदरेजा हाजी-बाबाई ने संकेत दिया है कि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाले वैश्विक शिपिंग पर नियंत्रण कड़ा करने के लिए एक नया कानून लाने की योजना बना रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से आवाजाही अब वैसी नहीं रहेगी जैसी युद्ध से पहले थी।
इजरायली जहाजों पर पूर्ण प्रतिबंध और 'युद्ध हर्जाना'
ईरानी संसद में प्रस्तावित नए कानून के तहत शिपिंग के नियमों में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। इसके तहत इजरायली जहाजों को होर्मुज के रास्ते से पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। साथ ही तेहरान जिन देशों को 'शत्रु' मानता है, उनके जहाजों को तभी गुजरने दिया जाएगा जब उनकी सरकारें ईरान को 'युद्ध हर्जाने' का भुगतान करेंगी। अन्य जहाजों को भी इस रास्ते से गुजरने के लिए अब ईरानी अधिकारियों से स्पष्ट अनुमति लेनी होगी।
'हम समुद्री लुटेरों की तरह हैं': ट्रंप
एक तरफ ईरान कानून बना रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की नाकेबंदी को लेकर हैरान करने वाला बयान दिया है। ट्रंप ने समर्थकों से कहा कि अमेरिकी बलों ने नाकेबंदी के दौरान एक जहाज और उसके तेल पर कब्जा कर लिया है। ट्रंप ने कहा, 'हम समुद्री लुटेरों की तरह हैं... और यह बहुत फायदेमंद व्यवसाय है।' उन्होंने कहा कि अमेरिका अब इस मामले में कोई खेल नहीं खेल रहा है।
'गेंद अब अमेरिका के पाले में है'
ईरान के उप विदेश मंत्री ने वाशिंगटन को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका को चुनना है कि वह कूटनीति का रास्ता अपनाता है या टकराव का।ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के लिए दोनों ही स्थितियों के लिए पूरी तरह तैयार है। वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मोहम्मद जाफर असादी ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से संघर्ष होने की पूरी संभावना है।
ईरान को मिला चीन का साथ, NATO में हलचल
चीन ने ईरानी तेल खरीदने वाली कंपनियों पर लगाए गए नए अमेरिकी प्रतिबंधों को खारिज कर दिया है। चीन ने इसे वैध व्यापारिक गतिविधियों पर अनुचित प्रतिबंध बताया है। इसके साथ ही अमेरिका ने जर्मनी से 5,000 सैनिकों को वापस बुलाने की घोषणा की है, जिससे NATO देशों में चिंता बढ़ गई है। जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि अब यूरोपीय देशों को अपनी रक्षा की जिम्मेदारी खुद लेनी होगी।