ईरान में विरोध प्रदर्शन के दौरान कम से कम 5000 लोगों की मौत का खुलासा हुआ है। ईरान के अधिकारियों ने रविवार को इसकी पुष्टि की। एक ईरानी अधिकारी ने रविवार को बताया कि ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 5,000 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें करीब 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। अधिकारी ने आरोप लगाया कि “आतंकवादियों और हथियारबंद दंगाइयों” ने निर्दोष लोगों को निशाना बनाया। रायटर्स के मुताबिक, अधिकारी ने कहा कि ये आंकड़े जांचे-परखे (वेरिफाइड) हैं और मरने वालों की संख्या में अब बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है।
ये विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को आर्थिक परेशानियों को लेकर शुरू हुए थे। अगले दो हफ्तों में ये पूरे देश में फैल गए और सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए। प्रदर्शनकारियों ने मौलवी शासन को खत्म करने की मांग की। यह अशांति 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सबसे हिंसक मानी जा रही है। ईरान सरकार ने हिंसा के लिए बार-बार विदेशी ताकतों को ज़िम्मेदार ठहराया है। दईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिका और इजराल पर हालात बिगाड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी माना कि इस हिंसा में हजारों लोगों की जान गई है।
24,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी (HRANA) ने शनिवार को बताया कि उसने अब तक 3,308 मौतों का रिकॉर्ड तैयार किया है, जबकि 4,382 मामलों की अभी जांच चल रही है। एजेंसी के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान 24,000 से ज़्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, एक ईरानी अधिकारी ने इन ऊंचे आंकड़ों से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि पुष्टि की गई मौतों की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी। अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि इजरायल और विदेशों में मौजूद कुछ सशस्त्र समूहों ने हिंसा में शामिल लोगों को समर्थन और हथियार दिए।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या या फांसी का सिलसिला जारी रहा, तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ट्रम्प ने कहा कि तेहरान ने तय की गई सामूहिक फांसी को रद्द कर दिया है और इसके लिए उन्होंने ईरान के नेतृत्व का धन्यवाद भी किया। हालांकि, ईरान ने रविवार को संकेत दिया कि फांसी की सज़ा अभी भी दी जा सकती है। सरकारी मीडिया के मुताबिक, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने शनिवार को कहा, “हम देश को युद्ध में नहीं झोंकेंगे, लेकिन घरेलू या अंतरराष्ट्रीय अपराधियों को बिना सज़ा के भी नहीं छोड़ेंगे।” कुल मिलाकर, हालात पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है, जबकि ईरान की तरफ से सख्त रुख भी जारी है।
ईरान की न्यायपालिका के प्रवक्ता असगर जहांगीर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कई मामलों को “मोहारेब” की श्रेणी में रखा गया है। यह इस्लामी कानून का शब्द है, जिसका मतलब है भगवान के खिलाफ युद्ध छेड़ना। ईरानी कानून में इस अपराध के लिए मौत की सज़ा का प्रावधान है। इस बीच, शनिवार को पॉलिटिको को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब ईरान में नए नेतृत्व के बारे में सोचने का समय आ गया है। उन्होंने इशारों में कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए बदलाव जरूरी है।