अब 1000 kg से ज्यादा विस्फोटक वाले मिसाइल दागे जाएंगे! ईरान की अमेरिका और इजरायल को खुली चुनौती

US Iran War: सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब ईरान अपनी रणनीति बदल रहा है। पहले ईरान बड़ी संख्या में सस्ते लेकिन खतरनाक ड्रोन और मिसाइल भेजकर दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को थकाने की कोशिश करता था। इनमें खास तौर पर Shahed-131 drone और Shahed-136 drone का इस्तेमाल किया जाता था

अपडेटेड Mar 10, 2026 पर 6:55 PM
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US Iran War: अब 1000 kg से ज्यादा विस्फोटक वाले मिसाइल दागे जाएंगे! ईरान की अमेरिका और इजरायल को खुली चुनौती (FILE PHOTO)

ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध के बीच बड़ा बयान दिया है। ईरान की सेना से जुड़े इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक वरिष्ठ कमांडर ने कहा है कि अब ईरान केवल ऐसे मिसाइल दागेगा, जिनमें 1000 किलोग्राम या उससे ज्यादा विस्फोटक होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हमलों की ताकत और नुकसान कई गुना बढ़ सकता है और यह युद्ध में एक नई रणनीति की शुरुआत हो सकती है।

हमलों की तीव्रता बढ़ाने का दावा

लेबनान के टीवी चैनल Al Mayadeen के मुताबिक, IRGC के ब्रिगेडियर जनरल माजिद मौसावी ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के सैन्य ठिकानों पर हो रहे हमलों की संख्या और तीव्रता दोनों बढ़ाई जाएगी।


उन्होंने कहा कि अब तक जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया है, उनमें दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और सऊदी अरब की रस तनुरा रिफाइनरी जैसे अहम ढांचे भी शामिल हैं।

रणनीति में बड़ा बदलाव

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब ईरान अपनी रणनीति बदल रहा है। पहले ईरान बड़ी संख्या में सस्ते लेकिन खतरनाक ड्रोन और मिसाइल भेजकर दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को थकाने की कोशिश करता था।

इनमें खास तौर पर Shahed-131 drone और Shahed-136 drone का इस्तेमाल किया जाता था।

अब ईरान कम संख्या में लेकिन ज्यादा ताकतवर और तेज मिसाइलों से हमला करने की तैयारी कर रहा है, ताकि एयरबेस और भूमिगत सैन्य ठिकानों जैसे मजबूत लक्ष्यों को ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सके।

ईरान के पास बड़ा मिसाइल भंडार

अमेरिका के थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मुताबिक, ईरान के पास मध्य पूर्व का सबसे बड़ा और विविध मिसाइल भंडार है।

इसमें कई तरह की मिसाइलें शामिल हैं, जैसे:

  • Soumar missile – जिसकी रेंज करीब 3000 Km मानी जाती है।
  • Sejjil missile – इसकी मारक क्षमता करीब 2000 Km है।
  • Khorramshahr missile – यह 1800 Kg तक का विस्फोटक ले जा सकती है।
  • Kheibar Shekan missile – जिसकी रेंज करीब 1450 Km बताई जाती है।

पहले क्या थी रणनीति?

युद्ध की शुरुआत में ईरान की रणनीति यह थी कि वो बड़ी संख्या में सस्ते ड्रोन और मिसाइल दागकर अमेरिका और उसके सहयोगियों की एयर डिफेंस सिस्टम को थका दे।

उदाहरण के लिए PATRIOT एयर डिफेंस जैसे सिस्टम एक मिसाइल को रोकने के लिए कई इंटरसेप्टर मिसाइल दागते हैं।

एक पैट्रियट मिसाइल की कीमत करीब 40 लाख डॉलर तक हो सकती है, जबकि एक शहेद ड्रोन की कीमत लगभग 50 हजार डॉलर होती है।

भारी मिसाइल से बढ़ेगा खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर 1000 Kg से ज्यादा विस्फोटक वाले मिसाइल इस्तेमाल किए जाते हैं, तो उनके गिरने पर होने वाला नुकसान पहले से कई गुना ज्यादा हो सकता है।

विश्लेषकों के मुताबिक, अगर ऐसी मिसाइल को रोका नहीं जा सका, तो उसके विस्फोट का दायरा और तबाही भी लगभग दोगुनी हो सकती है।

यही कारण है कि अब अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों की एयर डिफेंस सिस्टम के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान एक साथ ज्यादा संख्या में ड्रोन और भारी मिसाइलों का इस्तेमाल करता है, तो युद्ध और भी खतरनाक और लंबा हो सकता है।

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