Iran Protest: 1 डॉलर 14 लाख रियाल का हुआ! ईरान की मुद्रा में एतिहासिक गिरावट, विरोध में सड़कों पर आई जनता, बाजार भी बंद

Iran Protest: तेहरान के कुछ हिस्सों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। जैसे-जैसे विरोध प्रदर्शन तेज होते गए, ईरान के केंद्रीय बैंक- सेंट्रल बैंक ऑफ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान, जिसे बैंक मरकजी भी कहा जात है, उसके प्रमुख मोहम्मद रजा फरजिन ने इस्तीफा दे दिया

अपडेटेड Dec 30, 2025 पर 7:21 PM
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Iran Protest: ईरान की मुद्रा में एतिहासिक गिरावट, विरोध में सड़कों पर उतरी जनता, बाजार हुए बंद (PHOTO-AP)

ईरान की जनता सड़कों पर उतर आई है। आलम ये है कि कई बड़े शहरों में बाजार तक बंद करने पड़ गए और इसका कारण है- ईरान की करेंसी का डॉलर के मुकाबले नीचे बेहद नीचे गिरना। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले देश की मुद्रा के ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुंचने के बाद, ईरान में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे और बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। सेंट्रल ईरान के इस्फहान, दक्षिण के शिराज और उत्तरपूर्व के मशहद समेत कई बड़े शहरों में भी रैलियां और जुलूस निकाले गए।

तेहरान के कुछ हिस्सों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। जैसे-जैसे विरोध प्रदर्शन तेज होते गए, ईरान के केंद्रीय बैंक- सेंट्रल बैंक ऑफ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान, जिसे बैंक मरकजी भी कहा जात है, उसके प्रमुख मोहम्मद रजा फरजिन ने इस्तीफा दे दिया।

2022 के बाद सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन


साल 2022 के बाद ईरान में ये सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन हैं, जब पुलिस हिरासत में 22 साल की महसा जिना अमिनी की मौत ने देशभर में बड़े आंदोलन को जन्म दिया था। हिजाब ठीक से न पहनने के आरोप में देश की मॉरलिटी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, व्यापारियों ने सोमवार को अपनी दुकानें बंद कर दीं और बाकी कोरबारियों से भी ऐसा ही करने की अपील की। अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी ILNA ने बताया कि कई कारोबारियों ने अपना कामकाज पूरी तरह से बंद कर दिया, हालांकि कुछ ने अपनी दुकानें खुली रखीं।

इस बीच, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अपनी सरकार से प्रदर्शनकारियों की "सही मांगों" को सुनने की अपील की। आधिकारिक IRNA न्यूज एजेंसी के अनुसार, पेजेश्कियन ने कहा, "मैंने गृह मंत्री से प्रदर्शनकारियों की जायज मांगों को सुनने और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत करने का अनुरोध किया है ताकि सरकार समस्याओं को हल करने और जिम्मेदारी से काम करने के लिए अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल कर सके।"

क्यों भड़की है ईरान की जनता?

दरअसल ईरान की मुद्रा रियाल की कीमत हाल के दिनों में बहुत तेजी से गिरी है। हाल ही में 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 14 लाख 20 हजार रियाल तक पहुंच गई थी, जबकि सोमवार को यह थोड़ा संभलकर 13 लाख 80 हजार रियाल प्रति डॉलर पर ट्रेड कर रही थी। यानी ईरान का पैसा लगातार कमजोर होता जा रहा है।

रियाल की इस तेज गिरावट का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। महंगाई पहले से ही बढ़ी हुई है और अब खाने-पीने की चीजें, रोजमर्रा का सामान और जरूरी वस्तुएं और महंगी हो रही हैं। इससे घर चलाना लोगों के लिए और मुश्किल हो गया है।

पेट्रोल के दाम बढ़ने से भी भड़की चिंगारी

बात सिर्फ इतनी ही नहीं है हालात और भी खराब हो सकते हैं, क्योंकि सरकार ने हाल ही में पेट्रोल की कीमतों में भी बदलाव किया है, जिससे खर्च और बढ़ने की आशंका है।

ईरान सरकार ने दिसंबर 2025 में 5 साल बाद पेट्रोल की कीमतों में बड़ा बदलाव किया। ईरान में तीन स्तरीय पेट्रोल खरीद सिस्टम लागू किया गया है।

  • लेवल 1- हर महीने शुरुआती 60 लीटर पेट्रोल 15,000 रियाल (लगभग 1.25 सेंट या 1 रुपए) प्रति लीटर पर मिलेगा।
  • लेवल 2- इसके बाद अगले 100 लीटर पेट्रोल 30,000 रियाल (लगभग 2.5 सेंट या 2 रुपए) प्रति लीटर पर।
  • लेवल 3- उसके बाद का पेट्रोल 50,000 रियाल (लगभग 4 सेंट या 3.3 रुपए) प्रति लीटर पर मिलेगा।

इससे पहले 2019 में ईंधन की 50% कीमत बढ़ने पर भी हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिसमें 300 से ज्यादा लोगों की मौतें हुईं थी।

टैक्स बढ़ाने की भी तैयारी

इसी बीच ईरान के सरकारी मीडिया में खबरें आई हैं कि सरकार 21 मार्च से शुरू होने वाले ईरानी नए साल के साथ टैक्स बढ़ाने की भी योजना बना रही है। इन खबरों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि टैक्स बढ़ने का मतलब है आम जनता पर और बोझ।

खबरों की मानें, तो इस्लामिक सरकार का वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) 10% से बढ़ाकर 12% करने का प्लान है, जो फूड सब्सिडी के लिए इस्तेमाल होगा। टैक्स रेवेन्यू में भी अगले साल 62% की बड़ी बढ़ोतरी का अनुमान, ताकि तेल पर निर्भरता कम हो।

क्या ट्रंप की वजह से बिगड़ रहे ईरान के हालात!

अगर पीछे जाएं, तो हालात पहले ऐसे नहीं थे। साल 2015 में हुए परमाणु समझौते (न्यूक्लियर डील) के समय ईरानी मुद्रा की कीमत करीब 32,000 रियाल प्रति डॉलर थी। उस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त नियंत्रण मान लिया था और बदले में उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटा दिए गए थे। लेकिन 2018 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को इस समझौते से बाहर निकाल लिया, जिसके बाद यह डील टूट गई और ईरान की अर्थव्यवस्था फिर दबाव में आ गई।

एक दिलचस्प बात यह भी है कि ईरान के बाजारों के व्यापारी पहले भी देश के इतिहास में अहम भूमिका निभा चुके हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति में इन्हीं व्यापारियों का बड़ा योगदान था, जो ईरान की राजशाही को हटाकर इस्लामी सरकार को सत्ता में लाए थे। हालांकि, अब सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की इसी धार्मिक सरकार का यही व्यापारी जमकर विरोध कर रहे हैं।

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