ईरान में फांसी का खौफनाक रिकॉर्ड, 2025 में 1,639 लोगों को दी गई सजा-ए-मौत; 36 साल का टूटा रिकॉर्ड

Iran Executions: रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े ईरान की न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। 2024 में 975 लोगों को फांसी दी गई थी, जिसकी तुलना में 2025 में इसमें 68% की बढ़ोतरी देखी गई। ईरान में पूरे साल करीब 4 से 5 लोगों को हर रोज फांसी के फंदे पर लटकाया गया

अपडेटेड Apr 13, 2026 पर 2:07 PM
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फरवरी 2026 से अमेरिका और इजरायल के साथ जारी युद्ध के बीच भी ईरान ने फांसी की रफ्तार कम नहीं की

Iran Executions: ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर एक बेहद हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। दो प्रमुख एनजीओ नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) और पेरिस स्थित टुगेदर अगेंस्ट द डेथ पेनल्टी (ECPM) की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में ईरान ने कम से कम 1,639 लोगों को फांसी दी। यह 1989 के बाद से अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं साल 2025 में 11 फांसी सार्वजनिक रूप से दी गई हो गई जो पिछले साल के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है।

हर दिन औसतन 4 फांसी

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े ईरान की न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। 2024 में 975 लोगों को फांसी दी गई थी, जिसकी तुलना में 2025 में इसमें 68% की बढ़ोतरी देखी गई। ईरान में पूरे साल औसतन 4 से 5 लोगों को हर रोज फांसी के फंदे पर लटकाया गया। IHR का कहना है कि यह संख्या केवल वे हैं जिनकी पुष्टि हो सकी है, वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है क्योंकि आधिकारिक मीडिया कई मामलों की रिपोर्ट नहीं करता।


विरोध को दबाने के लिए अपना रहे दमन का रास्ता

मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि ईरान सरकार मौत की सजा को अपनी 'सत्ता बचाने' और 'जनता में डर पैदा करने' के औजार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।जनवरी 2026 में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारी अब भी फांसी के खतरे का सामना कर रहे हैं। वहीं फरवरी 2026 से अमेरिका और इजरायल के साथ जारी युद्ध के बीच भी ईरान ने फांसी की रफ्तार कम नहीं की। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक प्रदर्शनों से जुड़े 7 लोगों को फांसी दी जा चुकी है, जिनमें एक ईरानी-स्वीडिश नागरिक भी शामिल था।

अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर मार

रिपोर्ट में बताया गया है कि फांसी की सजा पाने वालों में समाज के हाशिए पर रहने वाले समूह सबसे ज्यादा हैं। पश्चिम में रहने वाले कुर्द और दक्षिण-पूर्व के बलूच समुदायों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया है। ये दोनों ही सुन्नी इस्लाम को मानते हैं। 2025 में कम से कम 48 महिलाओं को फांसी दी गई, जो पिछले 20 साल में सबसे ज्यादा है। इनमें से 21 महिलाओं को अपने पति या मंगेतर की हत्या के आरोप में फांसी दी गई। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि इनमें से कई महिलाएं खुद घरेलू हिंसा और दुर्व्यवहार की शिकार थीं। कुल फांसी की सजाओं में से लगभग आधी नशीली दवाओं से जुड़े अपराधों के लिए दी गईं।

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