'अभी और भी भीषण होगी जंग...', ईरान ने अमेरिका के डिमांड को मानने से किया इनकार, बताया एकतरफा और गलत

US-Iran War: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान का जंग बीते एक महीने से जारी है और इस जंग के बीच सीजफायर को लेकर बात बनती नहीं दिख रही है। ईरान ने चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए अमेरिका के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है और उन्हें “अवास्तविक, अनुचित और जरूरत से ज्यादा” बताया है

अपडेटेड Mar 30, 2026 पर 4:25 PM
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मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के युद्ध को शुरू हुए चार हफ्ते से ज्यादा समय बीत चुका है।

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के युद्ध को शुरू हुए चार हफ्ते से ज्यादा समय बीत चुका है। ईरान लगातार अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों पर हमले कर रहा है। वहीं इजरायल और अमेरिका, ईरान में लगातार हमले कर रहे हैं। बीते एक महीने से जारी इस जंग के बीच सीजफायर को लेकर बात बनती नहीं दिख रही है। ईरान ने चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए अमेरिका के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है और उन्हें “अवास्तविक, अनुचित और जरूरत से ज्यादा” बताया है।

ईरान ने खारिज किया अमेरिका का प्रस्ताव 

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने साफ किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत सिर्फ बिचौलियों के जरिए ही हो रही है। ईरान की यह प्रतिक्रिया उस समय आई, जब डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव के ज्यादातर बिंदुओं को मान लिया है।


ट्रंप ने जताई थी सहमति

फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने इशारा किया कि तेहरान ने संघर्ष खत्म करने के लिए वॉशिंगटन की शर्तों पर मोटे तौर पर सहमति जता दी है। ट्रंप के अनुसार, यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत के दौरान पाकिस्तान के जरिए ईरान तक पहुंचाया गया था। उन्होंने कहा, “उन्होंने हमारे ज्यादातर बिंदु मान लिए हैं, वे क्यों नहीं मानेंगे?” साथ ही यह भी जोड़ा कि जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ेगी, अमेरिका कुछ और शर्तें भी रख सकता है।

अमेरिका ने रखी थीं 15 मांगे 

अमेरिका के 15-सूत्रीय प्रस्ताव की पूरी जानकारी आधिकारिक तौर पर जारी नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट्स में इसकी मुख्य शर्तों और रियायतों का जिक्र किया गया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना बताया जा रहा है। इसके तहत यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) को रोकना, पहले से मौजूद संवर्धित सामग्री को सौंपना और प्रमुख परमाणु केंद्रों जैसे नतान्ज़, फोर्डो और इस्फ़हान को बंद करना शामिल है। इसके अलावा, इस प्रस्ताव में ईरान से यह भी कहा गया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय निगरानी की अनुमति दे।

इस योजना के तहत ईरान से यह भी कहा गया है कि वह क्षेत्रीय संगठनों को पैसा और हथियार देना बंद करे और मध्य-पूर्व में अपने “प्रॉक्सी मॉडल” को छोड़ दे।

इसका असर हिज़्बुल्लाह और हूती जैसे संगठनों पर पड़ सकता है। इसके अलावा, योजना में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला रखने और बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए करीब एक महीने के अस्थायी युद्धविराम की दिशा में कदम उठाने की बात भी कही गई है। इसके बदले में अमेरिका ने सभी तरह के प्रतिबंध हटाने, निगरानी के तहत नागरिक परमाणु कार्यक्रम में मदद देने और “स्नैपबैक” प्रतिबंध व्यवस्था को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है।

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