मध्य पूर्व (Middle East) से वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लेबनान में हुए हालिया युद्धविराम के बाद, ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सभी कमर्शियल जहाजों के लिए पूरी तरह से खोलने का ऐलान किया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इसकी जानकारी दी।
अराघची ने X पर एक पोस्ट कर लिखा, "लेबनान में हुए सीजफायर के अनुरूप, अब होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में सभी कमर्शियल जहाजों के लिए रास्ता पूरी तरह खोल दिया गया है। यह खुला रास्ता सीजफायर के बाकी बचे समय तक रहेगा। जहाजों को ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन की ओर से पहले ही घोषित किए गए कोऑर्डिनेटेड रूट से ही गुजरना होगा।"
ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह छूट लेबनान में चल रहे युद्धविराम के साथ जुड़ी हुई है। ईरान ने उन रूटों की जानकारी पहले ही दे दी है, जिनसे होकर जहाज गुजर सकते हैं। इससे पहले युद्ध और तनाव के चलते इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही को लेकर भारी जोखिम बना हुआ था, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही थी।
ईरान ने ब्लॉक क्यों ब्लॉक किया था होर्मुज?
दुनिया की 'ऑयल लाइफलाइन' कहे जाने वाला होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच का एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20% से 25% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, UAE और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी रास्ते पर निर्भर हैं।
यह समुद्री मार्ग इतना संकरा है कि इसके सबसे कम चौड़े हिस्से की दूरी महज 33 किलोमीटर के आसपास है। इस पर ईरान का सीधा प्रभाव रहता है। इसी के चलते ईरान ने अमेरिका-इजरायल साथ चले संघर्ष के दौरान इसे बंद कर दिया था और यहां से दुश्मन के तेल वाले जहाजों को निकलने नहीं दे रहा था।
होर्मुज का रास्ता पूरी तरह खुलने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई सुचारू होगी, जिससे कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है।
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। इस रास्ते का सुरक्षित रहना और फिर से खुलना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए सुखद संकेत है।