Iran Retaliatory Strike on US Bases: मिडिल ईस्ट में तनाव अब बेकाबू हो चुका है और ताजा हालात एक घटक युद्ध में तब्दील हो गए हैं। अमेरिकी बमबारी से भड़के ईरान की सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने बहरीन की राजधानी मनामा में स्थित अमेरिकी नौसेना के सबसे शक्तिशाली पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर मिसाइलों और ड्रोनों से भीषण हमला कर दिया है।
इस हमले के बाद अमेरिकी मुख्यालय से आग की ऊंची लपटें और धुएं का गुबार उठता देखा गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ईरान का दावा है कि उसने अमेरिका और उसके सहयोगियों से जुड़े 85 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
बहरीन और कुवैत में आधी रात को गूंजे सायरन और फिर हुए धमाके
ईरान के इस बड़े जवाबी हमले से खाड़ी देशों में हड़कंप मच गया है। बहरीन की राजधानी मनामा में आधी रात को एयर रेड सायरन बजने लगे। इसके तुरंत बाद सलमान पोर्ट स्थित अमेरिकी 5th Fleet मुख्यालय और शेख ईसा एयर बेस पर एक के बाद एक कई जोरदार धमाके सुने गए।
ईरान ने कुवैत में स्थित अमेरिकी सेना के मुख्य ठिकाने अली अल सालेम एयर बेस पर भी ताबड़तोड़ मिसाइलें दागी हैं। ईरानी मीडिया के मुताबिक, यहां अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉर्डन में स्थित अजराक एयर बेस को भी इस संयुक्त ड्रोन और मिसाइल ऑपरेशन में निशाना बनाया गया है।
ईरान ने अमेरिका का खतरनाक 'रीपर ड्रोन' भी मार गिराया
इस भीषण जंग के बीच ईरान ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने बुशहर प्रांत के ऊपर उड़ान भर रहे अमेरिका के बेहद आधुनिक और घातक MQ-9 रीपर ड्रोन (MQ-9 Reaper Drone) को आसमान में ही मार गिराया है। ईरान का आरोप है कि यह ड्रोन अमेरिकी हमलों के बाद जासूसी और टार्गेट लॉकिंग के लिए भेजा गया था।
अमेरिका पर इतना क्यों भड़का ईरान?
ईरान की यह खौफनाक जवाबी कार्रवाई अमेरिका द्वारा पिछले दिनों की गई उस महा-बमबारी का नतीजा है, जिसने ईरान के होश उड़ा दिए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के भीतर घुसकर 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए।
अमेरिका ने ईरान के कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर्स, एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय रडार साइट्स, एंटी-शिप मिसाइल पोजिशंस और IRGC की दर्जनों फास्ट अटैक बोट्स को पूरी तरह नष्ट कर दिया था।
अमेरिका का कहना था कि ईरान ने 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' से गुजर रहे तीन कमर्शियल जहाजों पर हमला कर सीजफायर तोड़ा था, जिसके जवाब में यह कार्रवाई जरूरी थी। इस अमेरिकी हमले में ईरान के बंदर अब्बास, सीरिक और केश्म द्वीप के पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में भीषण आग लग गई थी।