Middle East Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई एक बार फिर एक्शन में लौट आए हैं। वह देश के नीतिगत फैसलों और सरकारी मामलों में बेहद सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मंगलवार रात को ईरान ने कुवैत, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताजा मिसाइल हमले किए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच हुआ युद्धविराम टूटने की कगार पर पहुंच गया है।
बता दें कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में मोजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि इसी हमले में उनके पिता अली खामेनेई की मौत हो गई थी।
फैसलों में खामेनेई की बढ़ी भागीदारी
अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के सामने गवाही देते हुए विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मोजतबा खामेनेई को लेकर कई अहम जानकारियां साझा कीं। रुबियो ने सीनेटरों को बताया कि ऐसे पुख्ता संकेत मिले हैं कि ईरान के सुप्रीम लीडर अब बड़े स्तर पर सरकारी फैसलों में शामिल हो रहे हैं।
रुबियो के मुताबिक, हालांकि खामेनेई अभी भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन वह लिखित संदेशों और बिचौलियों के जरिए लगातार अपनी सेना और सरकार को निर्देश भेज रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह किसी गुप्त स्थान पर छिपकर 'कूरियर नेटवर्क' के जरिए बातचीत कर रहे हैं।
'दुश्मन देश के टुकड़े करना चाहता है'
हाल ही में 28 मई को ईरान के सरकारी टेलीविजन पर मोजतबा खामेनेई का एक लिखित संदेश प्रसारित किया गया था, जिसमें उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर तीखा हमला बोला था। खामेनेई ने कहा था, 'सैन्य मोर्चे पर हारने के बाद अब दुश्मन आर्थिक दबाव, दुष्प्रचार और प्रतिबंधों के जरिए ईरान में फूट डालना चाहता है और देश के टुकड़े करना चाहता है, ताकि देश को घुटनों पर लाया जा सके। ऐसे समय में सभी ईरानियों को एकजुट रहना होगा'।
पाकिस्तानी मध्यस्थता वाला सीजफायर खतरे में
8 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच एक संघर्षविराम हुआ था। लेकिन हालिया मिसाइल हमलों और केशम द्वीप पर हुई सैन्य कार्रवाइयों के बाद यह समझौता पूरी तरह खतरे में पड़ गया है। हालांकि, मार्को रुबियो ने उम्मीद जताई है कि कूटनीतिक रास्ते अभी भी खुले हैं और आज, कल या अगले हफ्ते तक कोई नया समझौता हो सकता है।
बातचीत के लिए अमेरिका की दो सख्त शर्तें
मार्को रुबियो ने साफ कर दिया कि ईरान के साथ किसी भी नए समझौते या प्रतिबंधों में ढील देने के लिए वाशिंगटन दो शर्तों पर अड़ा हुआ है:
1. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलना: वैश्विक तेल और गैस सप्लाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्ता 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' इस समय पूरी तरह ब्लॉक है। अमेरिका की शर्त है कि ईरान को आधिकारिक तौर पर यह घोषणा करनी होगी कि इस रास्ते से व्यापारिक जहाज बिना किसी हमले या टैक्स के आ-जा सकते हैं। अगर ईरान जहाजों पर हमला रोकना स्वीकार करता है, तो अमेरिका वहां बिछाई गई बारूदी माइंस को हटाने में मदद करेगा।
2. परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन पर रोक: ईरान पर लगे कड़े प्रतिबंधों की मुख्य वजह उसका परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका की दूसरी शर्त है कि ईरान को अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को या तो पूरी तरह से खत्म करना होगा या फिर उस पर बेहद सख्त और दीर्घकालिक सीमाएं स्वीकार करनी होंगी। अगर ईरान इसे छोड़ देता है, तभी उसे प्रतिबंधों से राहत दी जाएगी।