Middle East Crisis: बीती रात ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों की भारी बौछार कर दी। ईरान के इस कदम के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में भयंकर युद्ध को लेकर एक बार फिर से सुगबुगाहट तेज हो गई है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि यह 'सटीक और केंद्रित मिसाइल हमला' अमेरिका की आक्रामकता का करारा जवाब है।
निशाने पर अमेरिकी एयर बेस
ईरान ने इस ताजा हमले में मुख्य रूप से दो बड़े अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। हमले के दौरान कुवैत में कई जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अमेरिकी पेट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम (MIM-104 Patriot) से इंटरसेप्टर मिसाइलें छूटती हुई दिखाई दीं।
मिसाइल खतरे को देखते हुए बहरीन में एयर रेड सायरन बजाए गए, जिससे स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया. इसके अलावा इराक के एरबिल में भी मिलिट्री अलर्ट जारी किया गया.
'हिट एंड रन का जमाना गया': IRGC की खुली धमकी
ईरान के IRGC ने एक बेहद कड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि यह हमला ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया है।
IRGC ने चेतावनी देते हुए कहा कि, 'दमनकारी ताकतों को अपने दुस्साहस के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। 'हिट एंड रन' का समय अब खत्म हो चुका है. अगर हमारी सीमाओं या संप्रभुता को छूने की भी कोशिश की गई, तो ऐसा विनाशकारी जवाब दिया जाएगा जो सारे नियमों को पार कर देगा और हम क्षेत्र के सभी अमेरिकी ठिकानों को राख में बदल देंगे।'
ईरान के सभी मिसाइल हमले हुए फेल: अमेरिका
दूसरी तरफ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिकी और मित्र देशों के एयर डिफेंस ने ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया है।
CENTCOM के मुताबिक, 'कुवैत की तरफ दागी गई दो ईरानी मिसाइलें रास्ते में ही तबाह कर गिर गईं। बहरीन की ओर भेजी गई तीन मिसाइलों को अमेरिकी और बहरीन के सुरक्षा बलों ने हवा में ही मार गिराया। कोई भी मिसाइल अपने टारगेट पर नहीं लग सकी।
एक हफ्ते में कुवैत पर तीसरा बड़ा हमला
मिडिल ईस्ट में जारी यह टकराव रुकने का नाम नहीं ले रहा है, पिछले एक हफ्ते में कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकानों पर यह तीसरा हमला है:
29 मई का हमला: ईरान की फतेह-110 मिसाइल ने अली अल सालेम एयर बेस को निशाना बनाया था, जिसमें मलबे की चपेट में आने से अमेरिकी सैनिकों सहित 5 कर्मी घायल हुए थे और 30 मिलियन डॉलर का अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन नष्ट हो गया था।
1 जून का हमला: ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और कामिकेज़ ड्रोनों से बड़ा हमला किया, जिसे अमेरिकी सेना ने इंटरसेप्ट किया था।
2 जून: कुवैत और बहरीन को एक साथ निशाना बनाया गया।
अमेरिका ने ईरान जाने वाले जहाज पर दागी थी मिसाइल
इस मिसाइल हमले से कुछ घंटे पहले अमेरिकी सेना ने खाड़ी में ईरान की समुद्री नाकेबंदी के तहत एक कमर्शियल जहाज को रोककर उसे तबाह कर दिया था।
बोत्सवाना के झंडे वाला 'एम/टी लेक्सी' नामक टैंकर ईरान के खार्ग द्वीप की ओर बढ़ रहा था। अमेरिकी चेतावनियों को नजरअंदाज करने के बाद, अमेरिकी विमान ने हेलफायर मिसाइल दागकर जहाज के इंजन रूम को उड़ा दिया और उसे पंगु बना दिया। अमेरिका 13 अप्रैल से ईरान की समुद्री नाकेबंदी कर रहा है, जिसके तहत अब तक 6 जहाजों को अक्षम किया जा चुका है और 122 के रास्ते बदले गए हैं।