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Iran-US War Updates: ईरान के खिलाफ युद्ध में UAE की एंट्री? सीजफायर के बीच तेहरान पर बरसाए बम!

Iran-US-Israel War News Updates: अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में अमेरिका की मध्यस्थता से सीजफायर का ऐलान होने के कुछ दिनों बाद ही UAE ने ईरान के अंदर जवाबी हवाई हमले किए। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन हमलों में ईरान के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड May 30, 2026 पर 7:34 AM
Iran-US War Updates: ईरान के खिलाफ युद्ध में UAE की एंट्री? सीजफायर के बीच तेहरान पर बरसाए बम!
Iran-US-Israel War News Updates: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के एनर्जी इंफ़्रास्ट्रक्चर पर हमला रोक दिया

Iran-US-Israel War News Updates: ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने के संकेत देते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने बड़ा कदम उठाया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में अमेरिका की मध्यस्थता से सीजफायर का ऐलान होने के कुछ दिनों बाद ही UAE ने ईरान के अंदर जवाबी हवाई हमले किए। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि इस संघर्ष में UAE की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा गहरी थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन हमलों में ईरान के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें फारस की खाड़ी में लावान द्वीप पर मौजूद एक रिफाइनरी, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास मौजूद केश्म और अबू मूसा द्वीप, बंदर अब्बास का बंदरगाह शहर और विशाल असलुयेह पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं।

अखबार के मुताबिक, असलुयेह एनर्जी हब पर हुए हमले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और विरोध पैदा हुआ। इसके चलते अमेरिका को इजरायल पर दबाव डालना पड़ा कि वह ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोक दे, क्योंकि उसे डर था कि इससे पूरे इलाके में संघर्ष और ज्यादा बढ़ सकता है। इस मामले से जुड़े सूत्रों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि UAE ने ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान के तहत अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर काम किया। यह अभियान सीजफायर के ऐलान के बाद भी कई हफ्तों तक जारी रहा।

इन खुलासों से पता चलता है कि UAE की क्षेत्रीय नीति में एक बड़ा बदलाव आया है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि इस संघर्ष में उसकी भूमिका पहले सार्वजनिक तौर पर बताई गई भूमिका से कहीं ज्यादा आक्रामक रही है। यह कदम खाड़ी के कई दूसरे देशों के सतर्क रवैये से बिल्कुल अलग है। इनमें से कई देशों ने ईरान के जवाबी हमलों के डर से इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने से बचने की कोशिश की थी। युद्ध शुरू होने से पहले खाड़ी देशों ने सार्वजनिक तौर पर यह कहा था कि वे ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों के लिए अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं होने देंगे।

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