नेतन्याहू ने ट्रंप को किया बुरी तरह जलील! चेतावनी के बाद भी इजरायल ने ठेंगा दिखाकर ईरान पर दागीं मिसाइलें
US-Israel-Iran War: एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दिनों ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर बेहद तीखी बहस हुई थी। लेबनान में हमलों को आक्रामक रूप से बढ़ाने के लिए ट्रंप ने नेतन्याहू को बुरी तरह फटकारा था। ट्रंप ने भड़कते हुए यहां तक कह दिया था, 'अगर मैं नहीं होता तो तुम आज जेल में होते, मैं तुम्हें बचा रहा हूं'
ईरान पर इजरायल के ताजा हमले के बाद अमेरिका में यह चर्चा तेज हो गई है कि युद्ध में नेतन्याहू बॉस बनने का प्रयास कर रहे है
Trump Humiliated By Israel: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को खत्म कराने के ट्रंप के दावों को अब तक का सबसे बड़ा लगा है। पिछले तीन महीनों से दुनिया भर के तेल बाजारों को हिलाकर रखने वाली इस जंग में एक बार फिर इजरायल और ईरान ने एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा भूचाल तब आया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सीधी चेतावनी और फोन कॉल को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर हमले का आदेश दे दिया। इस कदम के बाद अमेरिकी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इजरायल पर से अमेरिकी राष्ट्रपति का प्रभाव पूरी तरह खत्म हो चुका है?
'नेतन्याहू ने नहीं मानी ट्रंप की बात'
ट्रंप की बात न मानकर ईरानपर जवाबी हमला करने के नेतन्याहू के फैसले से अमेरिकी राजनीति में हड़कंप मच गया है। विपक्ष ने इसे अमेरिकी ताकत और खुद राष्ट्रपति ट्रंप की अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती करार दिया है।
कनेक्टिकट से विपक्षी सीनेटर क्रिस मर्फी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि नेतन्याहू ने ट्रंप को सरेआम शर्मिंदा किया है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध ट्रंप और अमेरिकी ताकत के लिए शुरू से ही अपमानजनक रहा है। जब ट्रंप खुद फोन करके नेतन्याहू को हमला न करने के लिए कहते हैं और कुछ ही घंटों में इजरायल जवाबी हमला कर देता है, तो यह अपमान और ज्यादा बढ़ जाता है।
This war has been humiliating for Trump and American power generally. And when Trump announces he is going to call Netanyahu and tell him not to retaliate, and within hours Netanyahu retaliates, the humiliation just compounds. https://t.co/W6fXLYlGd9
विपक्ष के बड़े नेताओं ने भी ट्रंप की नीतियों की कड़ी आलोचना की है। विपक्ष अब इस युद्ध को रोकने के लिए संसद में युद्ध शक्तियों का प्रस्ताव आगे बढ़ाने की मांग कर रहा है, क्योंकि यह जंग अमेरिकी जनता के बीच भी बेहद अलोकप्रिय हो चुकी है।
अगर मैं नहीं होता तो तुम आज जेल में होते: ट्रंप
सोमवार को इस भीषण युद्ध के 100 दिन पूरे हो चुके हैं। अमेरिका में पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों और अपनी गिरती लोकप्रियता के कारण 79 वर्षीय राष्ट्रपति ट्रंप इस जंग को हर हाल में रोकना चाहते हैं, लेकिन कोई भी समझौता हाथ नहीं आ रहा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दिनों ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर बेहद तीखी बहस हुई थी। लेबनान में हमलों को आक्रामक रूप से बढ़ाने के लिए ट्रंपने नेतन्याहू को बुरी तरह फटकारा था। ट्रंप ने भड़कते हुए यहां तक कह दिया था, 'अगर मैं नहीं होता तो तुम आज जेल में होते। मैं तुम्हें बचा रहा हूं। तुम्हारी इन हरकतों की वजह से आज हर कोई तुमसे और इजरायल से नफरत कर रही है'।
'सभी मोर्चों पर सीजफायर' से ही बनेगी बात
शांति का यह रास्ता इसलिए भी पेचीदा हो गया है क्योंकि ईरानी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ कोई भी शांति समझौता या पीस डील तभी मुमकिन है, जब इजरायल सभी मोर्चों पर युद्ध विराम लागू करे। ईरान की मांग है कि इजरायल को ईरान के साथ-साथ लेबनान और गाजा में भी तुरंत अपने हमले रोकने होंगे।
इसके उलट इजरायल ने बेरुत और दक्षिणी इलाकों में हिजबुल्लाह के खिलाफ अपने सैन्य ऑपरेशन्स को और ज्यादा तेज कर दिया है, जिसमें हजारों लोग हताहत हुए हैं।
'बॉस मैं हूं, नेतन्याहू नहीं...', ट्रंप ने दिखाई धौंस लेकिन इजरायल अड़ा
इतने बड़े सैन्य संकट और इजरायल की मनमानी के बाद भी ट्रंप यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि पूरा कंट्रोल उनके हाथ में है। उन्होंने ये तक दावा किया है कि इस नए मिसाइल अटैक से शांति वार्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कड़क अंदाज में कहा, 'इससे डील पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सारे फैसले मैं ही करता हूं। नेतन्याहू फैसले नहीं लेता, उसके पास कोई विकल्प नहीं होगा'। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों ने अपना-अपना शौक पूरा कर लिया है, इजरायल और ईरान दोनों ने एक-दूसरे पर हमले कर दिए, अब हमें आगे किसी और हमले की जरूरत नहीं है।
लेकिन ट्रंप की इस नसीहत के विपरीत, इजरायली सेना ने साफ कर दिया है कि वे ईरान के इस ताजा मिसाइल हमले का बदला लेने के लिए लेबनान में हिजबुल्लाह पर अपने हमलों को और ज्यादा तेज करेंगे। जानकारों का कहना है कि नेतन्याहू का यह अड़ियल रुख आने वाले दिनों में अमेरिका और इजरायल के रिश्तों पर हमेशा के लिए एक गहरा और स्थायी असर छोड़ सकता है।