ट्रंप से 'डील' की खबरों पर सुलग उठा ईरान! सड़कों पर उतरे कट्टरपंथी, अराघची को गद्दार बताकर खोला मोर्चा
Iran US Peace Deal: रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों और कट्टरपंथी नेताओं का आरोप है कि ईरानी राजनयिक और वार्ताकार वॉशिंगटन के सामने घुटने टेक रहे हैं और समझौते के नाम पर जरूरत से ज्यादा रियायतें दे रहे हैं। कट्टरपंथियों का मानना है कि इस समझौते के लागू होने से होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का जो दबदबा और नियंत्रण है, वह कमजोर हो जाएगा
प्रदर्शनकारी सड़कों पर विदेश मंत्री के इस्तीफे और उनके खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं
Iran Protests Over US Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच आज होने वाली ऐतिहासिक 'शांति डील' को लेकर जहां एक तरफ पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, वहीं दूसरी तरफ खुद ईरान के भीतर ही इस समझौते को लेकर भीषण विद्रोह जैसी स्थिति पैदा हो गई है। शनिवार को ईरान के कई बड़े शहरों में कट्टरपंथियों ने सड़कों पर उतरकर इस प्रस्तावित शांति समझौते का उग्र विरोध किया।
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा विशेष रूप से ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ पर फूटा है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि प्रदर्शनकारी सड़कों पर विदेश मंत्री के इस्तीफे और उनके खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। जानिए आखिर ईरान के ही लोग इस शांति समझौते का विरोध क्यों कर रहे हैं।
ईरानी सड़कों पर 'अराघची इस्तीफा दो' के गूंजे नारे
यह विरोध प्रदर्शन तब शुरू हुआ जब विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी टेलीविजन पर इस डील को लेकर बयान दिया। इसके तुरंत बाद मशहद शहर में विदेश मंत्रालय के दफ्तर के बाहर दर्जनों कट्टरपंथी इकट्ठा हो गए। देखते ही देखते यह विरोध प्रदर्शन राजधानी तेहरान और अन्य शहरों में भी फैल गया। समाचार एजेंसी AFP और फार्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्री के खिलाफ बेहद तीखे नारे लगाए:
'अराघची इस्तीफा दो, आत्मसमर्पण करना बंद करो!'
'अराघची शर्म करो, देश को धोखा देना बंद करो!'
'सम्मान से समझौता करने वाले अराघची मुर्दाबाद!'
ईरान के कट्टरपंथी क्यों कर रहे हैं इस डील का विरोध?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों और कट्टरपंथी नेताओं का आरोप है कि ईरानी राजनयिक और वार्ताकार वॉशिंगटन के सामने घुटने टेक रहे हैं और समझौते के नाम पर जरूरत से ज्यादा रियायतें दे रहे हैं। कट्टरपंथियों के विरोध के मुख्य कारण ये हैं:
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण खोने का डर: कट्टरपंथियों का मानना है कि इस समझौते के लागू होने से जलडमरूमध्य पर ईरान का जो दबदबा और नियंत्रण है, वह कमजोर हो जाएगा। जबकि ईरान हमेशा से इस रास्ते को अमेरिका के खिलाफ अपने सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल करता आया है।
परमाणु नीति से समझौता: ईरान के भीतर इस बात को लेकर भी राजनीतिक खींचतान बढ़ गई है कि क्या इस डील के चक्कर में देश के परमाणु कार्यक्रम और 'परमाणु अप्रसार संधि' (NPT) के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को कमजोर किया जा रहा है।
विदेश मंत्री अराघची ने क्या दी सफाई?
कट्टरपंथियों के भारी विरोध के बीच विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इंटरव्यू में देश को भरोसा दिलाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस उभरते हुए शांति समझौते के बदले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह हटा लेगा। उन्होंने साफ किया कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' हमेशा ईरान की सुरक्षा और विरोधियों को रोकने का मुख्य जरिया बना रहेगा।
समयसीमा को लेकर अब भी असमंजस
एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मध्यस्थ देश पाकिस्तान का दावा है कि रविवार को ही इस फ्रेमवर्क समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक साइन हो सकते हैं, वहीं ईरान के भीतर मचे इस बवाल के बाद ईरानी अधिकारी बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने साफ किया है कि रविवार को ही तुरंत साइन नहीं होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि ईरान जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेगा, हालांकि आने वाले दिनों में समझौता फाइनल होने की उम्मीद काफी ज्यादा है।
इस विरोध प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ हाथ मिलाना ईरान की सरकार के लिए घर के भीतर ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। अगर राष्ट्रपति और विदेश मंत्री अराघची अपने देश के कट्टरपंथियों और सेना के एक धड़े को संतुष्ट नहीं कर पाते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली यह महाडील अधर में लटक सकती है।