Iran-US War: अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरी बार किया हमला, ट्रंप बोले- 'तेहरान का अब अस्तित्व ही नहीं रहेगा'

Iran-US War: अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर हमले किए हैं। इन हमलों की वजह एक कमर्शियल जहाज पर हुआ हमला बताया गया है। शनिवार 27 जून को हुए ये नए हमले इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के तहत लागू हुआ सीजफायर (युद्धविराम) अब टूटने की कगार पर पहुंच गया है

अपडेटेड Jun 28, 2026 पर 7:41 AM
Iran-US War: अमेरिका और ईरान के बीच सीज़फ़ायर अब टूटने की कगार पर पहुंच गया है

Iran-US War: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से युद्ध शुरू हो गया है। अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर हमले किए हैं। इन हमलों की वजह एक कमर्शियल जहाज पर हुआ हमला बताया गया है। शनिवार 27 जून को हुए ये नए हमले इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के तहत लागू हुआ सीजफायर (युद्धविराम) अब टूटने की कगार पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान ने पनामा के तेल टैंकर पर ड्रोन हमला कर सीजफायर को तोड़ा है।

अमेरिकी सेना ने सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान समझौते को नहीं मानता तो उसकी अस्तिव ही नहीं रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार तड़के कहा कि अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर नए सैन्य हमले किए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा युद्धविराम समझौते का फिर से उल्लंघन करने के बाद की गई।

'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा, "अमेरिकी विमानों ने युद्धविराम समझौते का 'फिर से' उल्लंघन करने के कारण ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों तथा तटीय रडार साइटों पर हमला किया है!" उन्होंने आगे कहा, "बहुत मुमकिन है कि वे कभी न सीखें! एक समय ऐसा आ सकता है जब हम समझदारी से काम न ले पाएं और हमें उस काम को मिलिट्री के ज़रिए पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़े, जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था।"


ट्रंप ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी

ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, "अगर ऐसा हुआ, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा!" अमेरिकी सेना के अनुसार, ये हमले ट्रंप के निर्देश पर किए गए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि शनिवार को एक कमर्शियल जहाज पर हमले के बाद अमेरिकी सैन्य विमानों ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया।

ईरान में कहां किया हमला?

CENTCOM ने बताया कि इस ऑपरेशन में ईरान के मिलिट्री सर्विलांस इंफ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन सिस्टम, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटीज और माइन-लेयरिंग क्षमताओं को निशाना बनाया गया। बाद में यह साफ किया गया कि इन हमलों में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और उसके आसपास कई जगहों पर ईरान के 10 मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाया गया।

सेना ने कहा कि ईरान के पास सीजफायर समझौते का सम्मान करने का मौका था। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय, उसकी सेनाओं ने कथित तौर पर 'किकू' (Kiku) नाम के ऑयल टैंकर पर वन-वे ड्रोन से हमला किया।

अमेरिका ने हमलों को ऑयल टैंकर पर हुए हमले से जोड़ा

CENTCOM के अनुसार, जब 'किकू' होर्मुज स्ट्रैट से गुज़र रहा था, तब उस पर हमला हुआ। उस समय उसमें 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) लदा हुआ था। यह टैंकर पिछले हफ्ते की शुरुआत में कतर के एक ऑयल फील्ड से निकला था और ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) में स्थित संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक बंदरगाह की ओर जा रहा था।

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की शिप-ट्रैकिंग जानकारी के अनुसार, ऐसा लग रहा था कि यह जहाज ओमान के तट के पास वाले रास्ते का इस्तेमाल कर रहा था। यह रूट ईरान द्वारा अपने जलक्षेत्र से तय किए गए रास्ते के विकल्प के तौर पर उभरा है।

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