Iran-US War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (25 मार्च) को कहा कि उनका प्रशासन ईरान में सही लोगों से बात कर रहा है। साथ ही यह भी कहा कि ईरानी शासन अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए बहुत ज्यादा उत्सुक है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान अमेरिका की इस शर्त पर सहमत हो गया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं रखेगा। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के नए सेक्रेटरी के तौर पर मार्कवेन मुलिन के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान बोलते हुए ट्रंप ने दावा कि अमेरिका को ईरान के मामले में जबरदस्त सफलता मिल रही है।
उन्होंने कहा, "वहां के सभी नेता जा चुके हैं। किसी को नहीं पता कि किससे बात की जाए। लेकिन हम असल में सही लोगों से बात कर रहे हैं और वे समझौता करने के लिए इतने ज्यादा उत्सुक हैं कि आपको अंदाजा भी नहीं है कि वे कितनी शिद्दत से समझौता करना चाहते हैं।"
क्या ईरान परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हुआ?
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान इस बात पर सहमत हो गया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं रखेगा। उन्होंने कहा, "वे हमसे बात कर रहे हैं। वे समझदारी की बात कर रहे हैं। और याद रखिए, इसकी शुरुआत इसी बात से होती है कि वे परमाणु हथियार नहीं रख सकते।"
उन्होंने बिना कोई और जानकारी दिए दावा किया, "मैं पहले से कुछ नहीं कहना चाहता, लेकिन वे (ईरान) इस बात पर सहमत हो गए हैं कि वे कभी भी परमाणु हथियार नहीं रखेंगे। वे इस पर राजी हो गए हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को ईरान से एक तोहफा मिला है, जिसकी कीमत बहुत ज्यादा है। हालांकि, उन्होंने इसके बारे में कोई डिटेल्स नहीं दिया।
युद्ध खत्म करने के लिए 15-सूत्रीय प्लान भेजा
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने ईरान को युद्ध खत्म करने और उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए एक व्यापक 15-सूत्रीय प्लान भेजा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान समझौता करना चाहता है। यह प्रस्ताव मध्यस्थों के माध्यम भेजा गया है। इसमें लड़ाई रोकने, ईरान की परमाणु गतिविधियों पर रोक लगाने और क्षेत्र में नया रूप देने के लिए एक व्यापक रूपरेखा तैयार की गई है।
प्लान में कहा गया है कि ईरान अपने तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों को बंद करे। अपने देश में यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोक दे और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी निलंबित कर दे। साथ ही, ईरान द्वारा प्रॉक्सी समूहों को दी जा रही मदद पर भी रोक लगाने और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने की बात कही गई है। इस योजना में एक महीने के युद्धविराम का प्रस्ताव भी है। इसमें ईरान से यह वादा करने को कहा गया है कि वह कभी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा।
साथ ही, उसे अपने पास मौजूद परमाणु सामग्री को तय समय के भीतर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को सौंपना होगा। इसमें नतान्ज, इस्फहान और फ़ोर्डो परमाणु ठिकानों को सेवा से बाहर करने और उन्हें नष्ट करने के लिए भी कहा गया है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी निकाय को ईरान के भीतर की जानकारी तक पूरी पहुंच प्रदान करने की बात कही गई है। क्षेत्रीय स्तर पर ईरान से कहा गया है कि वह अपने सहयोगी समूहों को समर्थन देना बंद करे और उन्हें धन या हथियार न दे।
इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते के रूप में खुला रखने की बात भी शामिल है। मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर बाद में चर्चा करने की बात कही गई है, जिसमें मिसाइलों की संख्या और उनकी मारक क्षमता पर सीमा तय की जा सकती है। साथ ही, ईरान की सैन्य ताकत को केवल आत्मरक्षा तक सीमित रखने का प्रस्ताव भी है। इसके बदले में ईरान पर लगे सभी परमाणु से जुड़े प्रतिबंध हटाने की बात कही गई है।
अमेरिका, बुशहर में एक नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास में मदद करने को भी तैयार है, जिससे बिजली बनाई जा सकेगी। लेकिन इस पर निगरानी रखी जाएगी। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के मुताबिक, यह योजना काफी हद तक ट्रंप सरकार की पहले की मांगों जैसी है, जो 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले रखी गई थीं। वॉल स्ट्रीट जर्नल और न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना बिचौलियों के जरिए पहुंचाई गई है।