Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी जंग अमेरिका के लिए काफी महंगा पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती 6 दिनों में ही $11 बिलियन से ज्यादा खर्च हो गए। अब ट्रंप प्रशासन इस युद्ध के लंबा खिंचने पर कांग्रेस से नए फंड की डिमांड की तैयारी में हैं। हालांकि, युद्ध को लेकर अमेरिका ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने रविवार को स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने के लिए अमेरिका के पास पर्याप्त पैसा है। हालांकि, लंबी अवधि की तैयारी और सेना को भविष्य के लिए 'अपडेट' रखने के लिए कांग्रेस से अतिरिक्त फंड की मांग की जा रही है।
$200 बिलियन के 'सप्लीमेंट्री फंड' की डिमांड
ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वह युद्ध के खर्चों को पूरा करने के लिए कांग्रेस से लगभग $200 बिलियन यानी करीब 16.7 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट मांग सकता है। बेसेंट ने कहा कि यह मांग किसी कमी को पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि अमेरिकी सेना भविष्य में भी पूरी तरह से तैयार रहे।
इस भारी-भरकम राशि को लेकर अमेरिकी संसद में विरोध भी शुरू हो गया है। डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन सांसदों का तर्क है कि पहले से ही रक्षा बजट रिकॉर्ड स्तर पर है, तो और पैसे की क्या जरूरत है? वहीं रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस फंड का बचाव करते हुए कहा कि यह 'जो हम कर चुके हैं और जो भविष्य में करना पड़ सकता है' उसके लिए जरूरी है।
टैक्स बढ़ाने की चर्चा को बताया 'हास्यास्पद'
युद्ध के बढ़ते खर्चों के बीच अमेरिका में यह चर्चा थी कि क्या जनता पर नया टैक्स लगेगा? इस संभावना को उन्होंने पूरी तरह खारिज करते हुए इसे 'हास्यास्पद' बताया। वैसे शुरुआती अनुमानों के अनुसार, यह युद्ध इराक और अफगानिस्तान के बाद अमेरिका का सबसे महंगा सैन्य अभियान बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के शुरुआती 6 दिनों में ही $11 बिलियन से ज्यादा खर्च हो चुके हैं।
तेल की कीमतों पर 'दोहरी रणनीति'
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक न पहुंच जाएं, इसके लिए ट्रंप प्रशासन ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। अमेरिका ने ईरान और रूस के तेल पर लगे प्रतिबंधों में थोड़ी ढील दी है ताकि जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश वहां से तेल खरीद सकें। बेसेंट का तर्क है कि इससे वैश्विक तेल बाजार स्थिर रहेगा। हालांकि, इससे रूस की तेल आय में करीब $2 बिलियन की बढ़ोतरी हो सकती है, जिसे अमेरिका एक 'मामूली जोखिम' मान रहा है।