जंग के बीच तेहरान में सीक्रेट मीटिंग! वाइट हाउस का पैगाम लेकर अचानक ईरान पहुंचे मोहसिन नकवी

US Iran Peace Talks: रिपोर्ट के मुताबिक, मोहसिन नकवी महीनों से जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका की तरफ से ईरानी अधिकारियों के साथ एक नए दौर की शांति वार्ता करने के लिए तेहरान पहुंचे हैं। इस दौरे को मिडिल ईस्ट में किसी बड़े युद्ध को टालने की आखिरी कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है

अपडेटेड Jun 07, 2026 पर 10:26 AM
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पाकिस्तानी मंत्री अपने साथ आसिम मुनीर का एक बेहद खास और सीक्रेट लेटर लेकर आए हैं(image- X)

US-Iran Peace Talks: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच शांति बहाली की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक कोशिश शुरू हुई है। पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को अचानक ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे हैं।

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, मोहसिन नकवी महीनों से जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका की तरफ से ईरानी अधिकारियों के साथ एक नए दौर की शांति वार्ता करने के लिए तेहरान पहुंचे हैं। इस दौरे को मिडिल ईस्ट में किसी बड़े युद्ध को टालने की आखिरी कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है।

पाकिस्तानी सेना प्रमुख की 'सीक्रेट चिट्ठी' लेकर पहुंचे नकवी


ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, इस बेहद संवेदनशील दौरे पर मोहसिन नकवी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा ईरानी स्टूडेंट्स न्यूज एजेंसी (ISNA) की रिपोर्ट ने एक बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी मंत्री अपने साथ पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का एक बेहद खास और सीक्रेट लेटर लेकर आए हैं। यह लेटर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को सौंपा जाना है, जिन्होंने मार्च में कार्यभार संभालने के बाद से बहुत कम सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज कराई है।

मिडिल ईस्ट संकट में 'मध्यस्थ' बना पाकिस्तान

यह दौरा क्षेत्र में खुद को एक बड़े मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की पाकिस्तान की कोशिशों का हिस्सा है। इस यात्रा पर रवाना होने से पहले गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की थी और ईरान में होने वाली इस रणनीतिक चर्चा का पूरा ब्लूप्रिंट उनके सामने रखा था।

पाकिस्तानी पीएमओ के मुताबिक, प्रधानमंत्री शरीफ ने इस बातचीत को लेकर आंतरिक मंत्री को विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही नकवी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के इतर हुई अपनी हालिया बैठकों की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी।

क्या इस बार निकलेगा कोई समाधान?

इससे पहले अप्रैल के महीने में भी पाकिस्तान की मध्यस्थता के कारण ही अमेरिका और ईरानी अधिकारियों के बीच इस युद्ध की शुरुआत के बाद पहली बार सीधी बातचीत संभव हो पाई थी। अप्रैल में हुई वह बातचीत बिना किसी बड़े नतीजे या समझौते के समाप्त हो गई थी। अब देखना यह होगा कि क्या पाकिस्तानी सेना प्रमुख की चिट्ठी और अमेरिका का नया प्रस्ताव मिडिल ईस्ट को तबाही से बचा पाता है या नहीं।

28 फरवरी के बाद से दहक रहा है मिडिल ईस्ट

दोनों देशों के बीच यह शांति वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब पूरा क्षेत्र एक भीषण संकट से गुजर रहा है। बीते 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने भी जवाबी सैन्य कार्रवाई की थी।

इस सैन्य टकराव ने पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग बाधित हो गए हैं, वैश्विक ऊर्जा बाजार हिल गए हैं और दुनिया भर में बड़े युद्ध का खतरा मंडरा रहा है।

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