Iran War-Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि पिछले दो हफ्तों के सैन्य ऑपरेशनों ने ईरान को पूरी तरह से पंगु बना दिया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के साझा हमलों ने ईरान की सैन्य शक्ति और उसके नेतृत्व के ढांचे को ध्वस्त कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान का पुराना नेतृत्व अब इतिहास बन चुका है और नया नेतृत्व भी टिक नहीं पा रहा है। हालांकि, उन्होंने परमाणु हथियार को लेकर ऐसा दावा किया जिससे सभी हैरान हो गए है।
'1 घंटे में कर देंगे परमाणु हथियार का इस्तेमाल'
ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार आ गए, तो वह इसका इस्तेमाल एक घंटे या एक दिन के भीतर कर देगा। उन्होंने कहा, 'वे न केवल इजरायल, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट को उड़ा देंगे।' ट्रंप का तर्क है कि ईरान के हाथों में परमाणु बम पूरी दुनिया के एक बड़े हिस्से के लिए खतरा है और वह इसका उपयोग तुरंत करेगा।
मिसाइल और ड्रोन की क्षमता 90% हुई कम
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के नेतृत्व की दो परतों को पूरी तरह खत्म कर दिया है और संभवतः तीसरी परत भी साफ हो चुकी है। राष्ट्रपति के अनुसार, ईरान के पास अब न तो नौसेना बची है, न वायुसेना और न ही एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ हमलों को 'दुनिया की सुरक्षा' के लिए जरूरी बताया।
ट्रंप ने हालिया हमलों की सफलता गिनाते हुए कहा कि ईरान की जवाबी हमला करने की क्षमता लगभग खत्म हो गई है। अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन सिस्टम को बड़े पैमाने पर तबाह कर दिया है। ट्रंप के अनुसार, बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च में 90% और ड्रोन हमलों में 95% की कमी आई है। उन्होंने बताया कि सोमवार को भी ईरान की तीन हथियार निर्माण साइटों पर स्ट्राइक की गई है।
ईरान में जारी है विरोध प्रदर्शन
ट्रंप ने ईरान के भीतर जारी अशांति का भी जिक्र किया। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान के नेताओं ने पिछले तीन हफ्तों में 32,000 प्रदर्शनकारियों की जान ली है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व को 'हिंसक और क्रूर' लोग बताया। उन्होंने पहले भी कहा था कि यह ईरानी जनता के लिए अपनी सरकार बदलने का सबसे बड़ा अवसर है।
होर्मुज को लेकर कही बड़ी बात
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया। ट्रंप ने कहा कि ईरान बरसों से इस रास्ते का इस्तेमाल दुनिया को डराने के लिए करता रहा है, लेकिन अब यह काम नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने फिर दोहराया कि जो देश अपनी 90-95% ऊर्जा जरूरतें इस रास्ते से पूरी करते हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा के लिए आगे आना चाहिए।