तारिक रहमान के बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बनने से भारत को फायदा या नुकसान? चीन, पाकिस्तान और शेख हसीना ये तीन फैक्टर हैं सबसे अहम
India Bangladesh Relation: भारत और बांग्लादेश के रिश्ते कई साल पुराने हैं। दोनों देशों की करीब 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है। ऐसे में भारत के लिए यह इंतजार की स्थिति है कि तारिक रहमान की विदेश नीति भारत की ओर झुकेगी या उससे दूरी बनाएगी
तारिक रहमान का बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बनना भारत के लिए फायदा या नुकसान?
तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने देश के पहले चुनाव में बड़ी जीत हासिल की। लोकल TV चैनलों के अनुसार, BNP और उसके सहयोगी दलों ने 299 सीटों में से कम से कम 212 सीटें जीती हैं। यह चुनाव उस जन-आंदोलन के बाद हुआ, जिसमें शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। मतगणना जारी रहने के दौरान ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BNP और उसके प्रमुख तारिक रहमान को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत लोकतांत्रिक बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने X पर लिखा कि वह तारिक रहमान को संसदीय चुनाव में निर्णायक जीत के लिए हार्दिक बधाई देते हैं। यह जीत बांग्लादेश की जनता के उनके नेतृत्व पर भरोसे को दिखाती है। उन्होंने कहा कि भारत लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के साथ मिलकर दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करेगा और साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाएगा।
भारत के लिए क्यों अहम हैं ये नतीजे?
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते कई साल पुराने हैं। दोनों देशों की करीब 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है। लेकिन पिछले साल जुलाई में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ गया था।
अब जब तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने की स्थिति में हैं, तो यह सवाल उठ रहा है कि उनकी सरकार का भारत के साथ रिश्ता कैसा रहेगा।
BNP का भारत के प्रति रुख
तारिक रहमान की जीत के बाद यह चर्चा हो रही है कि क्या वह अपनी मां खालिदा जिया की तरह भारत के प्रति सख्त रुख अपनाएंगे।
पहले BNP को भारत के प्रति ज्यादा अनुकूल नहीं माना जाता था। खालिदा जिया के कार्यकाल (1991–1996 और 2001–2006) में भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव रहा। उस समय सीमा पार उग्रवाद, पानी बंटवारे और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दे सामने आए। भारत ने आरोप लगाया था कि उनके शासन में भारत-विरोधी संगठनों को पनाह दी गई।
उन्होंने असम के उग्रवादी संगठन ULFA और NDFB को “स्वतंत्रता सेनानी” तक कहा डाला था। उन्होंने भारत को बांग्लादेश के रास्ते पूर्वोत्तर राज्यों तक ट्रांजिट की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया था।
तारिक रहमान का नजरिया
हालांकि, तारिक रहमान ने अपनी पार्टी के घोषणापत्र में कहा है कि बांग्लादेश की स्वतंत्रता, संप्रभुता और सम्मान सबसे ऊपर होगा। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के “दोस्त हैं, कोई मालिक नहीं।”
घोषणापत्र में भारत के साथ सीमा पर होने वाली हत्याओं को रोकने और तीस्ता व पद्मा जैसी साझा नदियों के पानी में “न्यायसंगत हिस्सा” मांगने की बात कही गई है। साथ ही तस्करी और ड्रग्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया गया है।
BNP ने यह भी कहा है कि वह आतंकवाद के प्रति “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाएगी और किसी भी आतंकी को पनाह नहीं देगी।
तारिक रहमान ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो बांग्लादेश सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षित देश होगा। उनका कहना है, “धर्म व्यक्तिगत है, लेकिन राज्य सबका है।”
चीन और पाकिस्तान से संबंध
विशेषज्ञ मानते हैं कि रहमान चीन के साथ संबंध मजबूत कर सकते हैं, जो भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है। BNP के नेताओं की चीन के अधिकारियों से मुलाकातें भी हुई हैं।
BNP के पाकिस्तान के साथ भी लंबे समय से अच्छे संबंध रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार की भारत नीति से ही यह तय होगा कि क्षेत्रीय संतुलन किस दिशा में जाएगा।
शेख हसीना का मुद्दा
विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना का भारत में रहना भी भारत-BNP संबंधों को प्रभावित कर सकता है। BNP नेताओं ने कहा है कि अगर भारत किसी “तानाशाह” को शरण देता है, तो इससे बांग्लादेश के लोगों में नाराजगी हो सकती है।
हालांकि, हसीना के भारत के साथ पुराने और करीबी संबंध रहे हैं। उन पर अपने देश में “भारत समर्थक” नीतियां अपनाने के आरोप भी लगे थे, जिनमें व्यापार, परिवहन और जल समझौते शामिल थे।
अब भारत के लिए यह इंतजार की स्थिति है कि तारिक रहमान की विदेश नीति भारत की ओर झुकेगी या उससे दूरी बनाएगी।