इजरायल ने साफ कर दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप के प्लान के तहत गाजा के लिए प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) में पाकिस्तानी सेना की कोई भूमिका उसे मंज़ूर नहीं है। इजरायल ने हमास और पाकिस्तान से जुड़े आतंकी संगठनों के बीच कथित रिश्तों को लेकर चिंता जताई है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इजरायल भविष्य में गाजा की किसी भी सुरक्षा व्यवस्था में पाकिस्तानी सेना की भागीदारी को लेकर सहज नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक हमास पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक न तो राजनीतिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है और न ही पुनर्निर्माण संभव है। रूवेन अजार ने कहा, “हम आगे बढ़ने के लिए हालात बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए हमास को खत्म करना जरूरी है। इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।”
गाजा फोर्स में पाकिस्तान की भूमिका
भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार की ये बातें उन खबरों के बीच आई हैं, जिनमें कहा गया था कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने गाजा में प्रस्तावित स्टेबलाइजेशन और रिकंस्ट्रक्शन के लिए पाकिस्तान समेत कई देशों से सैनिक भेजने को लेकर संपर्क किया है। इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए रूवेन अजार ने कहा कि कई देश इस तरह की फोर्स में शामिल होने से पीछे हट रहे हैं। वजह यह है कि वे हमास से सीधे लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते। ऐसे में मौजूदा हालात में इस तरह की स्थिरीकरण फोर्स का विचार ही असरदार नहीं रह जाता।
जब उनसे साफ तौर पर पूछा गया कि क्या इज़राइल गाजा में पाकिस्तानी सेना की भागीदारी को स्वीकार करेगा, तो उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, “नहीं।” उन्होंने बताया कि इज़राइल आमतौर पर उन्हीं देशों के साथ मिलकर काम करता है, जिन पर वह भरोसा करता है और जिनके साथ उसके अच्छे राजनयिक संबंध होते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जिससे यह साफ हो जाता है कि इज़राइल गाजा फोर्स में पाकिस्तान को शामिल करने के खिलाफ है।
“या तो हमास खत्म हो, या आगे कुछ नहीं बढ़ेगा”
भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि इजरायल की सबसे बड़ी प्राथमिकताएं साफ हैं। इनमें सभी बंधकों को वापस लाना शामिल है, चाहे वे जीवित हों या मारे गए लोगों के अवशेष हों। इसके साथ ही हमास के सैन्य और राजनीतिक ढांचे को पूरी तरह खत्म करना भी जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि हमास और उसका समर्थन करने वाले कुछ देश इन अहम मांगों को नजरअंदाज करने की कोशिश कर रहे हैं। रूवेन अजार ने साफ चेतावनी दी कि जब तक हमास का पूरी तरह सफाया नहीं होता, तब तक किसी भी तरह की कूटनीतिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। उन्होंने कहा, “या तो हमास खत्म होगा, या फिर किसी भी योजना के अगले चरण पर काम करना मुमकिन नहीं होगा।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय दबाव कारगर साबित नहीं होता, तो इजरायल के पास अपने स्तर पर कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
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