ऑपरेशन सिंदूर से टूटा लश्कर! अब PoK में ढूंढ रहा नया सहारा

भारतीय खुफिया सूत्रों के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा PoK के रावलाकोट, मुजफ्फराबाद और LoC के आसपास आतंकी लॉन्च पैड और ट्रेनिंग कैंप फिर से सक्रिय कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, “मरकज-उल-कुद्स” जैसे ठिकानों को दोबारा तैयार किया गया है ताकि वहां से आतंकियों की घुसपैठ करवाई जा सके

अपडेटेड May 25, 2026 पर 5:31 PM
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ऑपरेशन सिंदूर से टूटा लश्कर! अब PoK में ढूंढ रहा नया सहारा

प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के बड़े नेता हाफिज तलहा सईद ने हाल ही में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के पूर्व प्रधानमंत्री सरदार अतीक अहमद खान से उनके घर पर मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात को कश्मीर मुद्दे पर स्थानीय माहौल को प्रभावित करने और लोगों को अपने पक्ष में करने की कोशिश माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि लश्कर-ए-तैयबा PoK में मदरसों का इस्तेमाल भर्ती और आतंकियों को तैयार करने के लिए कर रहा है।

भारतीय एजेंसियों का कहना है कि भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद, जिसमें लश्कर से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया था, आतंकी संगठन अब PoK में फिर से अपनी ताकत बढ़ाने और नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।

इस बैठक में कई दूसरे लोग भी शामिल थे, जिनमें कारी मुहम्मद याकूब शेख और इरफ़ान-उल-हक शामिल हैं। बैठक में पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति, कश्मीर मुद्दे और PoK में होने वाले चुनावों पर चर्चा हुई।


भारतीय खुफिया सूत्रों के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा PoK के रावलाकोट, मुजफ्फराबाद और LoC के आसपास आतंकी लॉन्च पैड और ट्रेनिंग कैंप फिर से सक्रिय कर रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, “मरकज-उल-कुद्स” जैसे ठिकानों को दोबारा तैयार किया गया है ताकि वहां से आतंकियों की घुसपैठ करवाई जा सके। इसके लिए सड़कों, ठिकानों और लॉजिस्टिक नेटवर्क को भी मजबूत किया जा रहा है।

वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पहलगाम आतंकी हमले में चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि अमेरिका में बनी एक GoPro कैमरा चीन के रास्ते आखिर लश्कर-ए-तैयबा आतंकियों तक कैसे पहुंचा।

यह कैमरा पिछले साल दाचीगाम जंगल में मारे गए आतंकियों के पास मिला था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस सप्लाई चेन का पता लगाने से उन गुप्त नेटवर्क्स का खुलासा हो सकता है जो आतंकियों तक पैसा, हथियार और तकनीकी सामान पहुंचाते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में आतंकी संगठन अब हमलों की रिकॉर्डिंग के लिए हाई-टेक कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि उनका प्रचार किया जा सके और लोगों में डर फैलाया जा सके।

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