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Ganga Aarti in London: ब्रिटेन में टेम्स नदी पर पहली बार हुई गंगा आरती! लंदन में गूंजे मंत्र और भक्ति के स्वर, भारतीयों का जमावड़ा

Ganga Aarti in London: ब्रिटेन में पहली बार एक ऐतिहासिक धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन देखने को मिला है। लंदन में स्थित टेम्स नदी के किनारे रविवार (13 सितंबर) को पहली बार गंगा आरती का आयोजन किया गया। इसमें हजारों की संख्या में भारतीय समुदाय के लोग शामिल हुए। भारत की गंगा नदी के तट पर होने वाली पारंपरिक आरती की तर्ज पर आयोजित इस समारोह ने लंदन में बसे भारतीय हिंदुओं को भी एक मंच पर ला दिया

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 14, 2026 पर 3:01 PM
Ganga Aarti in London: ब्रिटेन में टेम्स नदी पर पहली बार हुई गंगा आरती! लंदन में गूंजे मंत्र और भक्ति के स्वर, भारतीयों का जमावड़ा
Ganga Aarti in London: लंदन में टेम्स नदी पर पहली बार गंगा आरती का आयोजन हुआ है

Ganga Aarti in London: ब्रिटेन (यूनाइटेड किंगडम) की राजधानी लंदन में स्थित मशहूर टेम्स नदी के तट पर रविवार (13 सितंबर) को पहली बार गंगा आरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। 'टेम्स तट पर गंगा आरती: प्रकाश उत्सव' नाम से आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन 'चिन्मय मिशन यूके' ने 'टोटली टेम्स' के वार्षिक उत्सव के सहयोग से किया। यह आयोजन 'चिन्मय मिशन' की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दुनियाभर में हो रहे कार्यक्रमों का हिस्सा था।

भारत में गंगा के तट पर होने वाली प्रसिद्ध आरती की परंपरा से प्रेरित इस आयोजन की परिकल्पना प्रकृति, ज्ञान और चेतना के जीवनदायी प्रवाह के प्रतीक के रूप में की गई थी। 'चिन्मय मिशन यूके' की टीचर ब्रह्मचारिणी श्रीप्रिया चैतन्य ने कहा, "पीढ़ियों से श्रद्धालु गंगा के तट पर दीप प्रज्वलित कर मां गंगा की आराधना करते और प्रकृति एवं जीवन को संवारने वाली दिव्य शक्तियों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता दर्शाते आए हैं।"

श्रीप्रिया चैतन्य ने कहा, "टेम्स नदी के तट पर गंगा आरती भी इसी भावना को आगे बढ़ाती है और कृतज्ञता, आशा तथा एकता के साझा भाव में लोगों को एक साथ लाती है।। चैतन्य ने बताया कि चिन्मय मिशन के लिए गंगा ज्ञान के प्रवाह का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा, "हमारे संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद ने अपना जीवन वेदांत के शाश्वत ज्ञान और आध्यात्मिक संदेश को हिमालय की पवित्र भूमि से जन-जन तक पहुंचाने और उसे उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए समर्पित कर दिया।"

उन्होंने आगे कहा, "हिंदू धर्म की महान दार्शनिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं में से एक वेदांत की इस दिव्य विरासत को आगे बढ़ाते हुए चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह समारोह ज्ञान, सेवा और कृतज्ञता की उस पवित्र धारा का उत्सव भी है, जो भौगोलिक सीमाओं से परे निरंतर प्रवाहित हो रही है।"

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