पूर्व जापानी पीएम शिंजो आबे की हत्या के दोषी टेट्सुया यामागामी को उम्रकैद की सजा, चर्च के खिलाफ गुस्से में आरोपी ने आबे को बनाया था निशान

Shinzo Abe Assassination: शिंजो आबे जापान के सबसे प्रभावशाली और सबसे लंबे समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री थे। 'एबेनॉमिक्स' (Abenomics) के जरिए जापान की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने और भारत के साथ अटूट दोस्ती के लिए उन्हें याद किया जाता है

अपडेटेड Jan 21, 2026 पर 12:44 PM
Story continues below Advertisement
शिंजो आबे चुनाव प्रचार के दौरान भाषण दे रहे थे तभी उन पर गोलीबारी की गई थी

Japanese PM Shinzo Abe: जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की सरेआम हत्या करने वाले दोषी टेट्सुया यामागामी (45) को बुधवार को जापान की एक अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। जुलाई 2022 में हुई इस सनसनीखेज हत्या ने न केवल जापान बल्कि पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया था। इस मामले ने जापान की राजनीति और एक विवादास्पद धार्मिक समूह के बीच के गहरे और 'असहज' रिश्तों को भी बेनकाब कर दिया।

8 जुलाई 2022 को क्या हुआ था?

नारा शहर के एक रेलवे स्टेशन के बाहर शिंजो आबे चुनाव प्रचार के दौरान भाषण दे रहे थे। तभी यामागामी ने अपनी खुद की बनाई हुई बंदूक से पीछे से दो गोलियां चलाईं। पहली गोली चलने पर आबे मुड़े, तभी दूसरी गोली उनके सीने के पार हो गई। आबे वहीं गिर पड़े और अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हमलावर को मौके पर ही सुरक्षाकर्मियों ने दबोच लिया था। इस घटना के बाद जापान में वीआईपी सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल उठे थे और पुलिस सुरक्षा के मानकों में भारी बदलाव किए गए।


हत्या की वजह बना 'यूनिफिकेशन चर्च' के खिलाफ गुस्सा

यामागामी ने अदालत में स्वीकार किया कि उसका लक्ष्य केवल शिंजो आबे की हत्या करना नहीं था, बल्कि वह 'यूनिफिकेशन चर्च' को बर्बाद करना चाहता था। दोषी का दावा था कि उसकी मां ने इस चर्च को इतना भारी दान दिया कि उसका परिवार सड़क पर आ गया। वह चर्च के नेता को मारना चाहता था, लेकिन उन तक पहुंचना मुश्किल था। जब उसने शिंजो आबे को इस चर्च से जुड़े एक कार्यक्रम में वीडियो संदेश देते देखा, तो उसे लगा कि आबे के जरिए वह इस चर्च और राजनीति के बीच के गठजोड़ को दुनिया के सामने ला सकता है।

उठ रही थी सजा कम करने की मांग!

अदालत में अभियोजन पक्ष ने उम्रकैद की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष के वकीलों ने यामागामी के पारिवारिक हालातों का हवाला देते हुए कम सजा की अपील की थी। जापान में आमतौर पर मौत की सजा तभी दी जाती है जब एक से ज्यादा लोगों की हत्या हुई हो, इसलिए यामागामी को उम्रकैद दी गई। इस मामले के बाद जापान में धार्मिक समूहों द्वारा मांगे जाने वाले 'जबरन दान' के खिलाफ नया कानून बनाया गया। साथ ही चर्च के जापानी मुख्यालय का 'टैक्स-फ्री' दर्जा भी छीन लिया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि हजारों लोगों ने यामागामी की सजा कम करने के लिए याचिका पर हस्ताक्षर किए थे, क्योंकि वे उसे उस चर्च का 'पीड़ित' मान रहे थे जिसने कई परिवारों को बर्बाद किया।

शिंजो आबे जापान के सबसे प्रभावशाली और सबसे लंबे समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री थे। 'एबेनॉमिक्स' (Abenomics) के जरिए जापान की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने और भारत के साथ अटूट दोस्ती के लिए उन्हें याद किया जाता है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।