Middle East Crisis: अगर मध्यपूर्व में लड़ाई हफ्तों तक जारी रहती है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। खाड़ी के तेल उत्पादक देश उत्पादन रोकने को मजबूर हो सकते हैं। इससे ऑयल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद-अल-काबी ने फाइनेंशियल टाइम्स से यह कहा है।
लड़ाई लंबी चली तो उत्पादन बंद हो जाएगा
काबी ने कहा कि मध्यपूर्व की लड़ाई लंबी चलने पर खाड़ी के तेल उत्पादक देश ऑयल की डिलीवरी बंद करने को मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने कहा, "अब तक इन देशों ने असाधारण स्थिति का ऐलान नहीं किया है। लेकिन, लड़ाई जारी रहने पर वे आने वाले दिन में ऐसा ऐलान कर सकते हैं।" उन्होंने कहा कि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो वे आगे कानूनी रूप से इसकी कीमत चुकानी होगी और यह उनकी चॉइस होगी।
दुनिया में अर्थव्यवस्थाएं ध्वस्त हो सकती हैं
उन्होंने चेतावनी दी कि गल्फ से एनर्जी के एक्सपोर्ट में अगर लंबे समय तक बाधा बनी रहती है तो इससे ग्लोबल इकोनॉमी पर असर पड़ सकता है। उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा, "इससे दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं ध्वस्त हो सकती हैं। अगर यह लड़ाई कुछ और हफ्तों तक जारी रहती है तो दुनियाभर में जीडीपी ग्रोथ पर असर पड़ेगा। हर व्यक्ति के लिए एनर्जी की कीमतें बढ़ जाएंगी।"
एनर्जी शिपमेंट रुकने से कई इंडस्ट्रीज पर पड़ेगा असर
काबी ने कहा कि एनर्जी के शिपमेंट में रुकावट का असर कई इंडस्ट्रीज पर भी पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि गल्फ के तेल उत्पादक देश बड़ी मात्रा में पेट्रोकेमिकल्स और फर्टिलाइजर्स फीडस्टॉक्स सप्लाई करते हैं, जिनका इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग में होता है। उन्होंने कहा, "कुछ प्रोडक्ट्स की कमी पैदा होगी और फैक्ट्रीज पर इसका असर चेन रिएक्शन जैसा होगा, जो सप्लाई नहीं कर सकेंगी।"
कतर एलएनजी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश
कतर दुनिया में लिक्विफायड नेचुरल गैस (LNG) का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इस हफ्ते रास लफान फैसिलिटी में ईरान के ड्रोन हमले के बाद उसने उत्पादन बंद करने का ऐलान किया। रास लफान कतर का सबसे बड़ा एलएनजी प्लांट है। काबी ने कहा कि सरकार और कतर एनर्जी अभी फैसिलिटी को हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमें अभी पता नहीं कि कितना नुकसान हुआ है। यह पता नहीं है कि इस फैसिलिटी को रिपेयर करने में कितना समय लगेगा।"
लड़ाई रुकने पर भी एक्सपोर्ट शुरू करने में काफी समय लगेगा
उन्होंने कहा कि अगर यह लड़ाई रुक जाती है तो भी कतर को फिर से निर्यात शुरू करने में हफ्तों से महीनों तक का समय लगेगा। उन्होंने कहा, "हमारे जहाज हर जगह हैं। अगर होर्मुज की खाड़ी बंद रहती है तो समुद्री जहाजों के आवागमन में बड़ी समस्या आएगी। अगर दो से तीन हफ्तों तक टैकर्स और दूसरे जहाज इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो क्रूड की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।" दुनिया में ऑयल और गैस की करीब 20 फीसदी सप्लाई इसी रास्ते से होती है।